झीरम घाटी: ना तीर ना बंदूक चलानी आती थी जोगा को, फिर कैसे दोषी? परिवार ने एनआईए कोर्ट के फैसले पर उठाये सवाल
2013 के झीरम घाटी नक्सल हमले में एनआईए कोर्ट ने 10 आरोपियों को दोषी ठहराया है। इनमें से एक दोषी जोगा मरकाम के परिवार ने इस फैसले का कड़ा विरोध किया है।
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कोर्ट ने आरोपियों को भारतीय दंड संहिता, गैर-कानूनी गतिविधियां (रोकथाम) अधिनियम और शस्त्र अधिनियम की विभिन्न धाराओं के तहत दोषी पाया है। सजा की अवधि पर बहस के लिए 16 सितंबर की तारीख तय की गई है। जोगा मरकाम के भाई दुर्जन मरकाम ने निराशा व्यक्त की है। उन्होंने बताया कि 31 अगस्त को फैसला आने की बात कही गई थी। फिर 5 सितंबर की तारीख दी गई और अब 16 सितंबर को आने को कहा गया है।
दुर्जन ने कहा कि उनके भाई का झीरम घाटी घटना में कोई हाथ नहीं था। उन्होंने यह भी बताया कि जोगा को न तो तीर चलाना आता था और न ही बंदूक चलानी। दुर्जन ने लंबे मुकदमे के कारण परिवार पर पड़े आर्थिक और शारीरिक बोझ का भी उल्लेख किया। उन्होंने कहा कि हर बार दूर से आने में बहुत पैसे खर्च होते हैं।
जोगा के जीजा संतोष कुमार पोडियामी ने बताया कि घटना के समय जोगा एक सामाजिक कार्यक्रम में था। वह पूर्व सरपंच जितेन मरकाम की शादी में शामिल हो रहे थे। संतोष ने दावा किया कि जोगा शादी के कार्यक्रमों में व्यस्त थे। उन्होंने अभियोजन पक्ष के दावों की व्यावहारिकता पर सवाल उठाए।
संतोष ने बताया कि घटना दोपहर करीब 3:00 बजे हुई थी। शादी की जगह से हमले वाली जगह लगभग 20 किलोमीटर दूर पहाड़ी इलाका था। वहां से घटना स्थल तक पहुंचना बेहद मुश्किल था। उन्होंने कहा कि शादी के कार्यक्रमों के बाद वहां पहुंचना संभव नहीं था। संतोष के अनुसार, जब जोगा की कोई भूमिका नहीं थी, तो उन्हें सजा नहीं मिलनी चाहिए थी।