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महानाट्य 'जाणता राजा' का मंचन शुरू: सीएम साय बोले- शिवाजी महान योद्धा ही नहीं, उच्च आदर्शों वाले शासक
Thu, 19 Feb 2026 11:06 PM IST
ललित कुमार सिंह
अमर उजाला नेटवर्क, रायपुर
अमर उजाला नेटवर्क, रायपुर
Published by: ललित कुमार सिंह
Updated Thu, 19 Feb 2026 11:06 PM IST
सार
CG News: छत्तीसगढ़ की राजधानी रायपुर स्थित साइंस कॉलेज मैदान में गुरुवार से ऐतिहासिक महानाट्य ‘जाणता राजा’ के मंचन शुरू हुआ।
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कार्यक्रम का शुभारंभ करते सीएम साय
- फोटो : अमर उजाला डिजिटल
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विस्तार
CG News: छत्तीसगढ़ की राजधानी रायपुर स्थित साइंस कॉलेज मैदान में गुरुवार से ऐतिहासिक महानाट्य ‘जाणता राजा’ के मंचन शुरू हुआ। इस दौरान बड़ी संख्या में लोग नाटक देखने पहुंचे। कार्यक्रम को शुरुआत करते हुए प्रदेश के मुखिया सीएम विष्णुदेव साय ने कहा कि छत्रपति शिवाजी महाराज का जीवन साहस, धैर्य, रणनीति और आदर्श नेतृत्व का प्रेरक उदाहरण है, इसलिए हम सभी को अपने जीवन में शिवाजी जैसा लक्ष्य निर्धारित करना चाहिए।
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उन्होंने कहा कि शिवाजी महाराज ने विपरीत परिस्थितियों में भी अद्भुत साहस और बुद्धिमत्ता का परिचय दिया। अफजल खाँ के साथ हुई घटना का उल्लेख करते हुए उन्होंने कहा कि शिवाजी ने संकट को भांपकर धैर्य और रणनीति से निर्णय लिया और विजय प्राप्त की। इसी प्रकार शाइस्ता खान के विरुद्ध उनकी युक्तिपूर्ण रणनीति यह सिखाती है कि बड़े से बड़े शत्रु को भी सूझबूझ और साहस से पराजित किया जा सकता है।
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'महान योद्धा ही नहीं,उच्च आदर्शों वाले शासक'
मुख्यमंत्री ने कहा कि शिवाजी महाराज केवल महान योद्धा ही नहीं, बल्कि उच्च आदर्शों वाले शासक भी थे। उन्होंने सभी धर्मों के लोगों की आस्था का सम्मान किया और महिलाओं के सम्मान को सर्वोच्च प्राथमिकता दी। माता जीजाबाई के संस्कारों का उल्लेख करते हुए उन्होंने कहा कि शिवाजी महाराज का चरित्र हमें मर्यादा, नैतिकता और सम्मानजनक आचरण का संदेश देता है।
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उन्होंने अपने छात्र जीवन की स्मृतियों को साझा करते हुए महाकवि भूषण की पंक्तियों का उल्लेख किया, जिनमें शिवाजी महाराज के पराक्रम और वीरता का अद्भुत वर्णन मिलता है। उन्होंने कहा कि शिवाजी का जीवन केवल इतिहास नहीं, बल्कि प्रेरणा का स्रोत है, जो हमें कठिन परिस्थितियों में भी लक्ष्य के प्रति दृढ़ रहने की प्रेरणा देता है।
22 फरवरी तक होगा ‘जाणता राजा’ का मंचन
यह ऐतिहासिक महानाट्य ‘जाणता राजा’ का यह विशेष मंचन 22 फरवरी तक प्रतिदिन शाम को साइंस कॉलेज मैदान में होगा। लगभग तीन घंटे की यह भव्य प्रस्तुति छत्रपति शिवाजी महाराज के जीवन और हिंदवी स्वराज्य की स्थापना की गाथा पर आधारित है, जिसमें सजीव दृश्य, विशाल मंच सज्जा और तकनीकी उत्कृष्टता के माध्यम से दर्शकों को ऐतिहासिक काल का जीवंत अनुभव कराया जा रहा है।
छत्तीसगढ़ राज्य युवा आयोग की ओर से आयोजित इस महानाट्य के लिए महाराष्ट्र मंडल के संत ज्ञानेश्वर सभागृह में ऑडिशन लिया गया था। इसमें विभिन्न आयु वर्ग के लगभग 40 स्थानीय कलाकारों का चयन हुआ। चयनित कलाकारों ने निर्देशक योगेश शिरोले के मार्गदर्शन में गहन अभ्यास किया। स्थानीय कलाकारों में प्रांजल बक्षी, वर्तिका क्षीरसागर, कृति लाड, आकांक्षा और आस्था काले सहित अन्य प्रतिभागियों ने उत्साहपूर्वक भागीदारी निभाई।
घोड़ों के साथ सैनिकों की टुकड़ी रही आकर्षण का केंद्र
मंचन के दौरान घोड़ों के साथ सैनिकों की टुकड़ी दर्शकों के आकर्षण का केंद्र रही, वहीं ऊंटों को भी प्रस्तुति में शामिल किया गया। पुणे से आए तकनीकी विशेषज्ञ कौशिक नाइक और वैभव जोशी मंच सज्जा और प्रकाश व्यवस्था की जिम्मेदारी देख रहे हैं। पारंपरिक प्रस्तुतियों में कोली गीत सहित विभिन्न सांस्कृतिक आयामों ने कार्यक्रम को विशेष आकर्षण प्रदान किया।