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भूपेश बघेल को हाईकोर्ट से झटका: चुनाव याचिका निरस्त करने की अर्जी खारिज

Thu, 17 Sep 2026 08:44 PM IST
अमन कोशले अमर उजाला नेटवर्क, रायपुर
अमर उजाला नेटवर्क, रायपुर Published by: अमन कोशले Updated Thu, 17 Sep 2026 08:44 PM IST
सार

दुर्ग लोकसभा चुनाव मामले में छत्तीसगढ़ हाईकोर्ट ने भूपेश बघेल की अर्जी खारिज कर दी। अब विजय बघेल की चुनाव याचिका पर साक्ष्य और आगे की सुनवाई की प्रक्रिया जारी रहेगी।

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High Court gives a setback to Bhupesh Baghel: Application to quash election petition dismissed
भूपेश बघेल को हाईकोर्ट से झटका - फोटो : अमर उजाला

विस्तार

छत्तीसगढ़ उच्च न्यायालय ने 2024 के दुर्ग लोकसभा चुनाव से संबंधित मामले में पूर्व मुख्यमंत्री भूपेश बघेल की अर्जी को खारिज कर दिया है। अदालत ने भाजपा के सांसद विजय बघेल की चुनाव याचिका को शुरुआती चरण में ही निरस्त करने की मांग स्वीकार नहीं की। उच्च न्यायालय के इस निर्णय के बाद अब विजय बघेल की चुनाव याचिका पर आगे की न्यायिक प्रक्रिया जारी रहेगी और मामले की सुनवाई आगे बढ़ेगी।
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भाजपा सांसद विजय बघेल ने दुर्ग लोकसभा क्षेत्र से पूर्व मुख्यमंत्री भूपेश बघेल के निर्वाचन को चुनौती देते हुए उच्च न्यायालय में याचिका दायर की थी। इस याचिका को प्रारंभिक स्तर पर खत्म कराने के लिए भूपेश बघेल की ओर से नागरिक प्रक्रिया संहिता के आदेश 7 नियम 11 के अंतर्गत आवेदन प्रस्तुत किया गया था। इस आवेदन में लोक प्रतिनिधित्व अधिनियम की धारा 86(1) का संदर्भ देते हुए तर्क दिया गया था कि याचिका में कार्रवाई का कोई वैधानिक आधार प्रस्तुत नहीं होता। भूपेश बघेल के अनुसार याचिका आवश्यक कानूनी शर्तों को पूरा नहीं करती। अदालत में दोनों पक्षों के अधिवक्ताओं ने दलीलें पेश कीं, जिसके बाद उच्च न्यायालय ने प्रारंभिक आपत्ति को अस्वीकार कर दिया।
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साक्ष्य दर्ज करने का मार्ग प्रशस्त
इस मामले में पूर्व में 10 सितंबर को साक्ष्य दर्ज कराने के लिए विजय बघेल और उनके गवाह सौरभ दुबे उच्च न्यायालय पहुंचे थे। हालांकि, उसी दौरान भूपेश बघेल की तरफ से आदेश 7 नियम 11 का आवेदन दायर किए जाने से साक्ष्य दर्ज करने का कार्य रुक गया था। अदालत ने दोनों पक्षों के तर्कों को सुनने के उपरांत निर्णय के लिए 17 सितंबर की तिथि निर्धारित की थी। इससे पूर्व अगस्त 2026 में यह विवाद सर्वोच्च न्यायालय तक भी पहुंचा था, जहां भूपेश बघेल की विशेष अनुमति याचिका पर सुनवाई करते हुए शीर्ष अदालत ने उच्च न्यायालय की कार्यवाही में हस्तक्षेप करने से इन्कार कर दिया था। इसके पश्चात उच्च न्यायालय में साक्ष्य दर्ज करने का मार्ग खुला था।
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अंतिम निर्णय पर सुनवाई जारी रहेगी
अदालत में अब साक्ष्य दर्ज करने की प्रक्रिया और अन्य कानूनी कार्यवाहियां आगे बढ़ेंगी। अभी याचिका के अंतिम निर्णय को लेकर कोई निष्कर्ष सामने नहीं आया है और न्यायालय में नियमित प्रक्रिया चलती रहेगी।
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