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130 सूअरों की मौत ने बढ़ाई चिंता: जांच रिपोर्ट में अफ्रीकन स्वाइन फीवर की पुष्टि
Thu, 17 Sep 2026 08:51 PM IST
अमन कोशले
अमर उजाला नेटवर्क, रायपुर
अमर उजाला नेटवर्क, रायपुर
Published by: अमन कोशले
Updated Thu, 17 Sep 2026 08:51 PM IST
सार
टेहका गांव में अफ्रीकन स्वाइन फीवर की पुष्टि हुई है। निजी फार्म में 130 सूअरों की मौत के बाद प्रशासन ने एक किलोमीटर क्षेत्र में सूअर पालन पर प्रतिबंध लगाया है।
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सांकेतिक तस्वीर
- फोटो : अमर उजाला
विस्तार
बलौदाबाजार जिले में अफ्रीकन स्वाइन फीवर के मामले की पुष्टि होने से हड़कंप मच गया है। भाटापारा विकासखंड के ग्राम टेहका स्थित निजी सूअर फार्म में बीमारी फैलने से अब तक 130 सूअरों की मौत हो चुकी है। भोपाल स्थित प्रयोगशाला में भेजे गए नमूनों की जांच रिपोर्ट में सभी सैंपलों में अफ्रीकन स्वाइन फीवर का संक्रमण पाया गया है। मामला सामने आने के बाद पशुधन विकास विभाग की टीमों ने प्रभावित क्षेत्र में महामारी की रोकथाम के लिए बड़े पैमाने पर कार्रवाई शुरू कर दी है।
गंभीर विषाणुजनित बीमारी
ग्राम टेहका निवासी किसान समीर ध्रुव के सूअर फार्म में 30 अगस्त से पशु बीमार पड़ने लगे थे। इसके बाद 1 सितंबर से सूअरों की मौत का सिलसिला आरंभ हुआ। फार्म में बड़ी संख्या में सूअरों की स्थिति बिगड़ने पर पशुधन विकास विभाग की टीम ने 5 और 9 सितंबर को नमूनों को जांच के लिए भोपाल भेजा था। प्रयोगशाला से आई जांच रिपोर्ट में अफ्रीकन स्वाइन फीवर की पुष्टि हुई। पशुधन विकास विभाग के अनुसार फार्म में 70 सूअरों की पहले ही मौत हो चुकी थी, जबकि 60 अन्य सूअर संक्रमित मिले थे। विभाग की टीमों ने गांव पहुंचकर संक्रमित सूअरों को इंजेक्शन देकर उनका निस्तारण कराया। पशुधन विकास विभाग के उप संचालक डॉ. नरेंद्र सिंह ने बताया कि अफ्रीकन स्वाइन फीवर घरेलू और जंगली सूअरों में होने वाली गंभीर विषाणुजनित बीमारी है, जिसकी रोकथाम के लिए तय प्रोटोकॉल के तहत कदम उठाए जा रहे हैं।
प्रतिबंध और मुआवजे के प्रावधान
प्रशासन ने बीमारी के फैलाव को रोकने के लिए प्रभावित फार्म के आसपास एक किलोमीटर के दायरे में सूअर पालन पर पूरी तरह प्रतिबंध लगा दिया है। इसके अलावा, 10 किलोमीटर के दायरे में आने वाले सभी सूअर फार्मों की गहन निगरानी की जा रही है। नियमों के अनुसार प्रभावित फार्म संचालक को आर्थिक क्षति का मुआवजा दिया जाएगा, परंतु इस फार्म में अगले छह महीनों तक किसी भी पशु का पालन करने पर पाबंदी रहेगी। विभाग ने यह स्थिति भी स्पष्ट की है कि यह बीमारी स्वाइन फ्लू नहीं है।
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सुरक्षा मानकों पर खड़े हुए सवाल
निस्तारण अभियान के दौरान सुरक्षा और पारदर्शिता को लेकर सवाल उठे हैं। मौके पर मौजूद प्रशासनिक अधिकारी तो पीपीई किट पहने हुए थे, लेकिन फार्म के कर्मचारी बिना सुरक्षा उपकरणों के ही निस्तारण कार्य में लगे दिखे। इसके अतिरिक्त, सरकारी नियमों का हवाला देकर मीडियाकर्मियों को भी वहां से हटा दिया गया, जिससे पूरी प्रक्रिया की पारदर्शिता पर सवाल खड़े हो रहे हैं।
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गंभीर विषाणुजनित बीमारी
ग्राम टेहका निवासी किसान समीर ध्रुव के सूअर फार्म में 30 अगस्त से पशु बीमार पड़ने लगे थे। इसके बाद 1 सितंबर से सूअरों की मौत का सिलसिला आरंभ हुआ। फार्म में बड़ी संख्या में सूअरों की स्थिति बिगड़ने पर पशुधन विकास विभाग की टीम ने 5 और 9 सितंबर को नमूनों को जांच के लिए भोपाल भेजा था। प्रयोगशाला से आई जांच रिपोर्ट में अफ्रीकन स्वाइन फीवर की पुष्टि हुई। पशुधन विकास विभाग के अनुसार फार्म में 70 सूअरों की पहले ही मौत हो चुकी थी, जबकि 60 अन्य सूअर संक्रमित मिले थे। विभाग की टीमों ने गांव पहुंचकर संक्रमित सूअरों को इंजेक्शन देकर उनका निस्तारण कराया। पशुधन विकास विभाग के उप संचालक डॉ. नरेंद्र सिंह ने बताया कि अफ्रीकन स्वाइन फीवर घरेलू और जंगली सूअरों में होने वाली गंभीर विषाणुजनित बीमारी है, जिसकी रोकथाम के लिए तय प्रोटोकॉल के तहत कदम उठाए जा रहे हैं।
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प्रतिबंध और मुआवजे के प्रावधान
प्रशासन ने बीमारी के फैलाव को रोकने के लिए प्रभावित फार्म के आसपास एक किलोमीटर के दायरे में सूअर पालन पर पूरी तरह प्रतिबंध लगा दिया है। इसके अलावा, 10 किलोमीटर के दायरे में आने वाले सभी सूअर फार्मों की गहन निगरानी की जा रही है। नियमों के अनुसार प्रभावित फार्म संचालक को आर्थिक क्षति का मुआवजा दिया जाएगा, परंतु इस फार्म में अगले छह महीनों तक किसी भी पशु का पालन करने पर पाबंदी रहेगी। विभाग ने यह स्थिति भी स्पष्ट की है कि यह बीमारी स्वाइन फ्लू नहीं है।
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सुरक्षा मानकों पर खड़े हुए सवाल
निस्तारण अभियान के दौरान सुरक्षा और पारदर्शिता को लेकर सवाल उठे हैं। मौके पर मौजूद प्रशासनिक अधिकारी तो पीपीई किट पहने हुए थे, लेकिन फार्म के कर्मचारी बिना सुरक्षा उपकरणों के ही निस्तारण कार्य में लगे दिखे। इसके अतिरिक्त, सरकारी नियमों का हवाला देकर मीडियाकर्मियों को भी वहां से हटा दिया गया, जिससे पूरी प्रक्रिया की पारदर्शिता पर सवाल खड़े हो रहे हैं।