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GPM: भ्रष्टाचार की भेंट चढ़ी प्रधानमंत्री आवास योजना, सरपंच ने अधिकारियों के साथ मिलकर कर दिया खेला, पढ़ें

Tue, 02 Jul 2024 02:13 PM IST
Digvijay Singh अमर उजाला नेटवर्क, गौरेला पेंड्रा मरवाही
अमर उजाला नेटवर्क, गौरेला पेंड्रा मरवाही Published by: Digvijay Singh Updated Tue, 02 Jul 2024 02:13 PM IST
सार

देश के प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की सबसे महत्वाकांक्षी योजना प्रधानमंत्री आवास योजना भ्रष्टाचार की भेंट चढ़ गई है। पेंड्रा विकासखंड में हितग्राहियों को मिलने वाले पैसे को सरपंच द्वारा अधिकारियों से साथ गांठ कर निकालने का आरोप है।

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Prime Minister Housing Scheme fell prey to corruption in Gaurela Pendra Marwahi
भ्रष्टाचार की भेंट चढ़ी पीएम आवास योजना - फोटो : अमर उजाला

विस्तार

देश के प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की सबसे महत्वाकांक्षी योजना प्रधानमंत्री आवास योजना भ्रष्टाचार की भेंट चढ़ गई है। पेंड्रा विकासखंड में हितग्राहियों को मिलने वाले पैसे को सरपंच द्वारा अधिकारियों से साथ गांठ कर निकालने का आरोप है। जिसकी वजह से हितग्रहियों का आवास पूर्ण नहीं हो पाया, जबकि सरकारी रिकॉर्ड में आवास पूर्ण होना बताकर अंतिम किस्त भी निकाल ली गई है। वहीं कुछ हितग्राहियों परेशान होकर पक्के कंक्रीट छत की जगह छप्पर लगाकर रहने का इंतजाम किया है तो दर्जनों हितग्राहियों के साथ यही खेला कर दिया गया है। अब ये बेचारे गांव के भोले भाले ग्रामीण करे तो करे क्या ये अपने कच्चे घरों में रहने को मजबूर है। 

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गौरेला पेंड्रा मरवाही जिले में आदिवासियों के साथ हो रहे भ्रष्टाचार थमने का नाम नही ले रहा है,,,पेंड्रा जनपद पंचायत के बम्हनी गांव में जो मामला सामने आया है वह पूरे सरकारी तंत्र पर सवालिया निशान लगाता है, दरअसल केंद्र सरकार ने गरीबों को पक्के आवास उपलब्ध कराने के उद्देश्य से अपनी महत्वाकांक्षी योजना प्रधानमंत्री आवास योजना की शुरुआत की देश के प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की सबसे महत्वाकांक्षी योजना सबसे बड़ा हितग्राही मूलक योजना में गरीब बीपीएल परिवार के हितग्राहियों को पक्का कंक्रीट से बना मकान देने की योजना है जिसे भ्रष्टाचार से बचाने के लिए पूरी फूल प्रूफ प्लान प्लानिंग की गई।  
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पेंड्रा विकासखंड में इस योजना में बड़ा भ्रष्टाचार किया गया ग्राम पंचायत बम्हनी में गरीब हितग्राहियों के अनपढ़ और सीधे साधे होने का फायदा उठाकर उनके आवास का निर्माण  गाव के सरपंच और उसके चहेते ठेकेदारों ने ले लिया, और गरीब अनपढ़ ग्रामीणों के पैसे को हजम कर गए गांव में दर्जनों ऐसे मकान है जो अब तक अधूरे पड़े हैं, हितग्राहियों ने मामले में सीधे गाव के सरपंच और अधिकारियों पर साठ गांठ का आरोप लगाते हुए कहा कि जब आवास की योजना आई तो अपने आवास निर्माण में हितग्राहियों ने खुद अपने पास से ईट दी मकान की नई खोदने से लेकर दीवाल जोड़ने में भी सहयोग के रूप में श्रम किया जिसका उन्हें भुगतान भी नहीं मिला पर उनका आवास भी पूर्ण नहीं हो पाया।  
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सरपंच के ठेकेदारों ने आवास बनाने के लिए सिर्फ रेत और सीमेंट ही दिया और हितग्राही के खाते में आने वाले सभी पैसे का आहरण भी कर लिया अब योजना का पूरा पैसा हितग्राहीयो को सरकार द्वारा तो दिया जा चुका है जबकि मौके पर आवास पूर्ण नहीं है। महत्वपूर्ण बात यह है कि सरकार ने अलग-अलग स्तर पर मकान के जियो टैगिंग और हितग्राही के साथ फोटो अपलोड करने के बाद ही भुगतान की व्यवस्था की बावजूद पूरे सिस्टम में सेंध लगाते हुए भ्रष्टाचारियो के द्वारा किसी दूसरे पूर्ण मकान की फोटो हितग्राही के साथ अपलोड करवा दी जबकि मौके पर मकान आज भी आधा अधूरा पड़ा है कुछ हितग्राहियों ने तो परेशान होकर अपने मकान में छप्पर लगा लिया जबकि योजना के अनुसार मकान की छत पक्के कंक्रीट से निर्मित होना था। 

प्रधानमंत्री आवास योजना के यह अभी मकान छत्तीसगढ़ में कांग्रेस शासन के पूर्व स्वीकृत हुए थे मतलब हर एक आवास कम से कम 5 साल पुराना है आश्चर्य की बात यह है कि पिछले 5 सालों से इन गरीब आदिवासियों के अधूरे आवास पर स्थानीय प्रशासन की नजर क्यों नहीं गई ? जबकि शासन के द्वारा योजना का पूरा पैसा दिया जा चुका है हालांकि अब पूरे मामले पर जिला पंचायत के प्रोजेक्ट डायरेक्टर का कहना है कि इस मामले में सरपंच सहित कई लोगों को नोटिस जारी की गई है कोशिश यह की जाएगी कि शीघ्र ही ग्रामीणों के आवास पूरा हो और हितग्राहियों को शासन द्वारा दी जा रही सुविधा का फायदा मिल सके। 


हितग्राही के अपूर्ण प्रधानमंत्री आवास को पूर्ण बताने के लिए फर्जी कूट रचित दस्तावेज शासकीय कार्यालय में जमा कर हितग्राही का पैसा आहरित कर हजम करना न सिर्फ भ्रष्टाचार है बल्कि बीएनएस की धारा 318(4) के तहत अपराध भी नजर आता है देखना यह होगा कि मामला सामने आने के बाद प्रशासनिक अधिकारी अब इस मामले में दोषियों पर क्या कार्रवाई करता है।

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