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'ऑक्सीजन सिलेंडर' पर विकास की आरी: कलेक्ट्रेट बनाने के लिए 'गुरुकुल' में काटे जा रहे पेड़; लोगों ने ओढ़ाया कफन

Sun, 02 Jul 2023 06:05 PM IST
मोहनीश श्रीवास्तव न्यूज डेस्क, अमर उजाला, गौरेला-पेंड्रा-मरवाही
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, गौरेला-पेंड्रा-मरवाही Published by: मोहनीश श्रीवास्तव Updated Sun, 02 Jul 2023 06:05 PM IST
सार

गुरुकुल परिसर सेनेटोरियम परिसर से लगा हुआ है। जहां पर गुरुदेव रविंद्र नाथ टैगोर अपनी पत्नी का इलाज कराने आए थे। वह यहां पर लंबे समय तक रुके थे। इसी सेनेटोरियम परिसर के सौ से डेढ़ सौ साल पुराने हरे औषधीय वृक्षों को काटा जा रहा है। 

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Hundred year old trees being cut in Gurudev Sanatorium to make collectorate in GPM
जीपीएम में पर्यावरण प्रेमियों ने पेड़ बचाने के लिए बरगद को बांधा रक्षा सूत्र। - फोटो : संवाद

विस्तार

छत्तीसगढ़ के गौरेला-पेंड्रा-मरवाही (GPM) जिले में स्थित गुरुकुल परिसर में कम्पोजिट बिल्डिंग और कलेक्ट्रेट भवन बनाने के लिए प्रशासन ने पेड़ों की कटाई शुरू कर दी है। इस परिसर से लगा सेनेटोरियम भी है। यहीं पर गुरुदेव रवींद्र नाथ टैगोर लंबे समय तक रुक चुके हैं। जिन पेड़ों को काटा जा रहा है वह सैकड़ों साल पुराने हैं। ऐसे में स्थानीय लोगों और पर्यावरण प्रेमियों ने विरोध शुरू कर दिया है। उन्होंने मौके पर पहुंचकर काटे गए पेड़ों को कफन ओढ़ाया और पूजा करन उनकी रक्षा नहीं कर पाने का अफसोस जाहिर किया। 

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यहीं गुरुदेव टैगोर अपनी पत्नी के साथ रुके थे
दरअसल, गुरुकुल परिसर सेनेटोरियम परिसर से लगा हुआ है। जहां पर गुरुदेव रविंद्र नाथ टैगोर अपनी पत्नी का इलाज कराने आए थे। वह यहां पर लंबे समय तक रुके थे। इसी सेनेटोरियम परिसर के सौ से डेढ़ सौ साल पुराने हरे औषधीय वृक्षों को काटा जा रहा है। यहां जिले की कंपोजिट बिल्डिंग बनना है। सेनेटोरियम में पेड़ों की कटाई शुरू होने से पर्यावरण प्रेमियों में शोक की लहर है। उन्होंने कभी सोचा भी नहीं था कि विकास की ऐसी कीमत उन्हें चुकानी पड़ेगी। सैकड़ों साल पुराने पेड़ों को काटा जा रहा है।  




अंग्रेजों ने पर्यावरण को देख बनाया था टीबी अस्पताल
सेनेटोरियम में गुरुदेव रविंद्र नाथ टैगोर की स्मृतियों को स्थाई बनाना था, परंतु हो इसका उल्टा रहा है। इसी वर्ष सेनेटोरियम परिसर में गुरुदेव की मूर्ति भी स्थापना की गई है। गौरेला से पेंड्रा जाने वाले मुख्य मार्ग पर स्थित विश्व प्रसिद्ध सेनेटोरियम अपने प्राकृतिक वातावरण और आबोहवा के लिए प्रसिद्ध है। यहां की औषधीय युक्त हवाओं और वातावरण को ध्यान में रखते हुए ब्रिटिश शासन में एशिया का प्रसिद्ध टीबी हॉस्पिटल बनाया गया था। साल सरई के वृक्षों के बीच यह इलाका उत्तम जलवायु के लिए ऑक्सीजोन कहलाता है। 

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साल, सरई के पेड़ों को काटने के लिए चिन्हित किया गया
मुख्य मार्ग पर दोनों ओर साल, सरई के घने जंगल किसी का भी मन मोह लेते हैं, लेकिन अब उन्हीं पेड़ों को काटा जा रहा है।जिला प्रशासन ने कलेक्ट्रेट और संयुक्त भवन निर्माण के लिए इस स्थल का चयन किया है। कलेक्ट्रेट के ड्राइंग डिजाइन के लिए साल, सरई के लगभग 100 से 200 साल पुराने दर्जनों पेड़ों को इस की बलि देनी होगी। प्रशासन ने उन पेड़ों को चिन्हित कर काटने की तैयारी कर ली है। प्रारंभिक तौर पर अभी हर्रा, बहेरा, पीपल इमली और महुआ के पेड़ों को काटा जा रहा है। फिर बाकी पेड़ों को काटा जाएगा। 



बरगद के विशाल पेड़ को बांधा रक्षा सूत्र
जिले के पर्यावरण प्रेमियों ने इस बात पर कड़ी आपत्ति जताई है। उन्होंने वृक्ष काटने का विरोध तो किया ही साथ ही शासन-प्रशासन से कहा है कि इस जमीन के आसपास भी ऐसी कई एकड़ जमीन रिक्त पड़ी है, जहां बिना वृक्षों को काटे भवन बनाया जा सकता है। इसके बाद भी सुनवाई नहीं होने से नाराज पर्यावरण प्रेमियों ने रविवार को कटे हुए वृक्षों के समीप जाकर प्रार्थना की और उन्हें श्रद्धांजलि देते हुए अफसोस जताया। विशाल बरगद के पेड़ पर  रक्षा सूत्र बांधकर उसकी रक्षा करने का संकल्प लिया है। 

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