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'न जल, न जीवन' मिशन: जीपीएम में 328 करोड़ की लागत से 74 हजार घरों में नल लगे, फिर भी साल भर से 222 गांव प्यासे

Tue, 02 May 2023 01:42 PM IST
मोहनीश श्रीवास्तव न्यूज डेस्क, अमर उजाला, गौरेला-पेंड्रा-मरवाही
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, गौरेला-पेंड्रा-मरवाही Published by: मोहनीश श्रीवास्तव Updated Tue, 02 May 2023 01:42 PM IST
सार

जिले की कलेक्टर प्रियंका ऋषि महोबिया का कहना है कि जल जीवन मिशन के तहत चल रहे कामो में कुछ जगहों पर अनिमितता की शिकायत है। मामले की जानकारी लेकर दुरुस्त कराया जाएगा। हालांकि जिले में ज्यादातर काम जो मिशन के तहत हुए गुणवत्ताहीन है। उसकी जांच की बात तो कही जाती है, पर होता कुछ नहीं है। 

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corruption in jal jeevan mission water did not reach tribal village in gpm
दूर से गंदा पानी भरकर लाने को मजबूर हैं ग्रामीण। - फोटो : संवाद

विस्तार

छत्तीसगढ़ के गौरेला-पेंड्रा-मरवाही (GPM) जिले में केंद्र सरकार की हर घर तक पानी पहुंचाने की योजना जल जीवन मिशन भ्रष्टाचार की भेंट चढ़ गई है। लोक स्वास्थ्य यांत्रिकी विभाग ने 327 करोड़ 91 लाख की लागत से 222 गांवों के 74 हजार 838 घरों ने नल लगाए, पर साल भर बीतने के बाद भी इनमें पानी नहीं आया। खास बात यह है कि इनमें से ज्यादातर गांव आदिवासियों के हैं। कलेक्टर ऋषि महोबिया भी इसमें अनियमितता की बात स्वीकार करती हैं। हालांकि वह इसे दुरुस्त कराने की बात कहती हैं। 

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यह भी पढ़ें...जल जीवन मिशन में नल तो है पर जल नहीं: बस्ती ऊपर, टंकी लगाई निचले इलाके में; गड्ढे से गंदा पानी पानी पी रहे लोग
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ठोड़ी का गंदा पानी पी रहे लोग
गौरेला की आदिवासी ग्राम पंचायत टीडी में साल भर पहले ही लोगों के घरों में नल कनेक्शन पहुंच गया था। हालांकि इन नलों से पानी अभी तक नहीं आया। इसके चलते यहां के ग्रामीण आज भी पेयजल के लिए संघर्ष कर रहे हैं। वे ठोड़ी से गंदा पानी लेकर आते हैं और उसे पीने के लिए मजबूर हैं। यही स्थिति पुटा ग्राम पंचायत के टीडी गांव में भी हैं। गांव की संतरा बाई बताती हैं कि, नल कलेक्शन तो लगा है, पर पानी डेढ़ सालों में आज तक नहीं मिला। ऐसे ही हालात करंगरा सहित अन्य गांवों में भी हैं। 
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नलों में पानी आया नहीं, हैंडपंप में भी मोटर लगा दी
विशेष जनजाति बैगा बाहुल्य करंगरा गांव में जल जीवन मिशन के तहत लगाए गए नलों से आज तक पानी नहीं आया है। आता भी है तो बस उस नल से जो टंकी के ही नीचे लगाया गया है। ग्रामीण बताते हैं कि गांव में जिस हैंडपंप से लोगों को पहले पानी मिलता था, उसमें भी ठेकेदार ने मोटर फिट करवा दी। दूरस्थ इलाका होने के कारण कई बार घंटों बिजली नहीं रहती। लाल जी बैगा बतला रहे है कि हैंडपंप से पानी ले आते थे, उंसमें भी मशीन डाल दी। अब बिजली बंद तो पानी नहीं मिलता। इसके चलते दूर से पानी लाना पड़ता है।




पेयजल लाइन जमीन के नीचे की जगह ऊपर ही बिछाई गई
योजना के तहत ठेकेदारों की लापरवाही का खामियाजा ग्रामीण भुगत रहे हैं। ठेकेदारों ने पेयजल लाइन को जमीन के तीन फीट नीचे डालने की जगह, ऊपर से ही बिछा दिया। इसके कारण जगह-जगह से पेयजल लाइन फूट गई है। इसके कारण भी पानी नहीं आता। कई गांवों में पानी की टंकी को ही नीचे लगा दिया गया है। करंगरा गांव में रहने वाले अमर साए बैगा बताते हैं कि, नल काफी ऊपर है, इसके कारण भी पानी नहीं आता है। हालांकि इसके लिए अफसर भी जिम्मेदार हैं, जिन्होंने जांच तक नहीं की। 



गुणवत्ताहीन टंकी बनाई, फिर तोड़ने के आदेश, अब अधूरी छोड़ी
जिला मुख्यालय से करीब 15 किमी दूर मरवाही ब्लॉक का महोरा गांव। यहां पेय जल की समस्या सालों से है। ठेकेदारों ने पानी की टंकी बनाई और हर घर में नल लगाया। काम विभाग के इंजीनियर, एसडीओ और ईई की निगरानी में हुआ। नतीजा स्कूल परिसर में बनाई गई इस टंकी को गुणवत्ताहीन बताते हुए तोड़ने का आदेश अफसरों ने कर दिया। उसमें भी लापरवाही बरती गई। ऊपरी हिस्सा तोड़कर उसे छोड़ दिया गया। स्थानीय ग्रामीण कहते हैं कि टंकी के इस्तेमाल के बाद हादसा हो सकता था, अब भी ऐसी ही स्थिति है। 

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