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Kanker: बस्तर फाइटर में भर्ती के नाम पर ठगे 10 लाख, फेसबुक प्रोफाइल में लगाता था नेताओं के साथ फोटो

Wed, 09 Nov 2022 07:01 PM IST
मोहनीश श्रीवास्तव न्यूज डेस्क, अमर उजाला, कांकेर
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, कांकेर Published by: मोहनीश श्रीवास्तव Updated Wed, 09 Nov 2022 07:01 PM IST
सार

पुलिस पूछताछ में आरोपी हुसैन रिजवी खान ने अपना जुर्म कबूल कर लिया है। उसने बताया कि ठगे गए रुपये उसने अपने दोस्त नौशाद अली निवासी कैंप 2 भिलाई के बैंक खाते में ट्रांसफर किए हैं। इस मामले में भी पुलिस जांच कर रही है। फिलहाल आरोपी को कोर्ट में पेश किया गया, जहां से जेल भेज दिया गया है। 
 

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fraudster arrested in the name of recruitment in bastar fighters
पुलिस गिरफ्त में शातिर ठग। - फोटो : संवाद न्यूज एजेंसी

विस्तार

छत्तीसगढ़ के कांकेर पुलिस ने नौकरी के नाम पर युवाओं को ठगने वाले एक शातिर को गिरफ्तार किया है। पकड़े गए आरोपी ने बस्तर फाइटर में भर्ती कराने के नाम पर युवाओं से 10 लाख रुपये लिए थे। बदले में उनको फर्जी नियुक्ति पत्र भी जारी किया था। बताया जा रहा है कि आरोपी मध्य प्रदेश के बालाघाट में भी युवाओं को नौकरी के नाम पर ठग चुका है। मामला पंखाजूर थाना क्षेत्र का है।

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जानकारी के मुताबिक, पीवी 27 निवासी कमलेश पाल और उसके दो अन्य दोस्तों का बस्तर फाइटर की भर्ती परीक्षा में वेटिंग लिस्ट में नाम आया था। तभी तीनों का संपर्क पीवी 40 निवासी विश्वजीत देवनाथ से हुआ। विश्वजीत ने बताया कि चरोदा के भिलाई-3 निवासी हसन खान उर्फ हुसैन रिजवी है। वह फेसबुक आईडी में भी नेताओं के साथ फोटो लगाकर उनका खास दिखता है। मंत्रालय तक उसकी पहुंच है। 
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विश्वजीत ने बताया कि उसने भी अपने भतीजे और भांजी को फूड इंस्पेक्टर व क्लर्क ग्रेड-3 में नौकरी लगवाने के लिए चार लाख रुपये दिए हैं। कुछ दिन में ही मंत्रालजय से नौकरी लगाने का आदेश जारी हो जाएगा। विश्वजीत की बातों में आकर कमलेश पाल और उसके दोस्तों ने हुसैन रिजवी से संपर्क किया। उसके ठाठ देखकर झांसे में आ गए और अपने सारे दस्तावेज उसे सौंप दिए। 
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इसके बाद हुसैन रिजवी 14 सितंबर को पखांजूर आया और झांसा देते हुए उनसे पांच लाख रुपये ले लिए। फिर फोन-पे के जरिए एक लाख रुपये और डलवाए। इसके बाद 25 सितंबर को कमलेश पाल को व्हॉट्सएप के जरिए नियुक्ति प्रमाण पत्र और आदेश की कॉपी भेज दी। दस्तावेजों पर उसने हस्ताक्षर देखे तो वह रायपुर एसपी और अन्य अफसरों के थे। इस पर उसे ठगे जाने की आशंका हुई। 


तीनों ने विश्वजीत से संपर्क किया तो उसे भी भांजे के नियुक्ति पत्र का फर्जी होना पता चला। इसके बाद उन्होंने थाने में एफआईआर दर्ज करा दी। मामला दर्ज होने के बाद आरोपी फरार हो गया। उसने अपने मोबाइल भी बंद कर लिए। इस बीच उसके जगदलपुर में रुकने और ओडिशा भागने की फिराक का पता चला। इसके बाद पुलिस ने झांसा दिया कि रेंजर पोस्ट के लिए एक व्यक्ति पैसा देने को तैयार है। बातों में आकर आरोपी भानुप्रतापपुर पहुंचा और पुलिस ने उसे दबोच लिया। 

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