छत्तीसगढ़ में आत्मसमर्पण कर उप सरपंच बने पूर्व उग्रवादी की नक्सलियों ने हत्या की
छत्तीसगढ़ के नारायणपुर जिले में दो साल पहले पुलिस के समक्ष आत्मसमर्पण कर अपने गांव का उप-सरपंच बने एक पूर्व उग्रवादी की नक्सलियों ने हत्या कर दी है। पुलिस ने शनिवार को यह जानकारी दी।
नारायणपुर जिले के पुलिस अधीक्षक जीतेंद्र शुक्ला ने बताया कि मनकु पोटई की छह दिसंबर की शाम को बेनूर पुलिस थाना क्षेत्र के कालेपल गांव से लगे जंगल में नक्सलियों ने गोली मार कर हत्या कर दी।
मनकु (39) सक्रिय माओवादी रह चुका था और उसने 2016 में पुलिस के समक्ष आत्मसमर्पण कर दिया था। पुलिस ने बताया कि घटना को अंजाम देकर नक्सली मौके से फरार हो गए। मनकु इस साल की शुरूआत में सरपंच की मृत्यु हो जाने के बाद से प्रभारी सरपंच था।
गौरतलब है कि तीन दिसंबर को नक्सलियों ने अपने दो पूर्व सहयोगियों की हत्या कर दी थी। समझा जाता है कि वे लोग पुलिस के मुखबिर के तौर पर काम कर रहे थे।
चेन्नई में महिला नक्सली ने किया समर्पण
चेन्नई की एक अदालत में पोटा कानून के तहत वांछित घोषित एवं फरार चल रही एक नक्सली महिला ने आत्मसमर्पण कर दिया है। 43 वर्षीय पद्मा उर्फ सत्यामरी साल 2002 में कृष्णागिरी जिले में उथंगराई सशस्त्र प्रशिक्षण मामले में कथित तौर पर शामिल थी और उसने एक पोटा अदालत में समर्पण भी किया था। आतंकवाद की रोकथाम के मकसद से बनाया गया पोटा कानून अब प्रचलन में नहीं है।
विशेष सरकारी अभियोजक एन विजयराज ने पीटीआई-भाषा को बताया, ‘जेल में ढाई साल बिताने के बाद उसे 2005 में जमानत मिली ओर तब से उसका कुछ पता नहीं था। बीते साल उसे आदतन अपराधी घोषित किया गया। उसने शुक्रवार को पूनामल्ले पोटा अदालत में आत्मसमर्पण कर दिया।’
एक साल पहले पोटा समीक्षा समिति ने भी उस पर और अन्य 31 लोगों पर लगे आरोपों को नहीं हटाया। उन्होंने बताया, ‘उसका अचानक से आत्मसमर्पण सरकार के कई कदमों का नतीजा है जिसमें उसकी जमानत रद्द करना भी शामिल है।’ पद्मा पर पोटा के अलावा आईपीसी की कई धाराओं, शस्त्र अधिनियम, विस्फोटक पदार्थ अधिनियम के तहत भी मामला दर्ज है।