फ्री ई-पेपर
पर्सनलाइज़्ड फ़ीड
पर्सनलाइज़्ड नोटिफ़िकेशन
चलते-फिरते ख़बरें
लॉयल्टी रिवॉर्ड्स
डाउनलोड करें

सब्सक्राइब करें
Hindi News ›   Chhattisgarh ›   Farmers claims Raipur airport land, demands compensation of Rs 3500 crore in Supreme Court

Raipur News: रायपुर एयरपोर्ट की जमीन पर किसान का दावा, सुप्रीम कोर्ट में 3500 करोड़ रुपये मुआवजे की मांग

Sat, 04 Jul 2026 02:11 PM IST
अमन कोशले अमर उजाला नेटवर्क, रायपुर
अमर उजाला नेटवर्क, रायपुर Published by: अमन कोशले Updated Sat, 04 Jul 2026 02:11 PM IST
सार

रायपुर स्थित स्वामी विवेकानंद एयरपोर्ट की जमीन को लेकर एक बड़ा मामला सामने आया है। रायपुर के किसान अश्विनी बांधे ने एयरपोर्ट परिसर की करीब 34.35 हेक्टेयर जमीन पर अपने पुश्तैनी अधिकार का दावा करते हुए सुप्रीम कोर्ट में याचिका दायर की है।

विज्ञापन
Farmers claims Raipur airport land, demands compensation of Rs 3500 crore in Supreme Court
सांकेतिक तस्वीर - फोटो : अमर उजाला

विस्तार

रायपुर स्थित स्वामी विवेकानंद एयरपोर्ट की जमीन को लेकर एक बड़ा मामला सामने आया है। रायपुर के किसान अश्विनी बांधे ने एयरपोर्ट परिसर की करीब 34.35 हेक्टेयर जमीन पर अपने पुश्तैनी अधिकार का दावा करते हुए सुप्रीम कोर्ट में याचिका दायर की है। याचिका में करीब 3500 करोड़ रुपये के मुआवजे की मांग की गई है।
विज्ञापन


किसान का कहना है कि जिस भूमि पर वर्तमान एयरपोर्ट टर्मिनल और अन्य संरचनाएं बनी हैं, वह उनके पूर्वजों की थी। उनका दावा है कि यह जमीन द्वितीय विश्व युद्ध के दौरान ब्रिटिश शासन ने अस्थायी रूप से लीज पर ली थी, लेकिन युद्ध समाप्त होने के बाद भी न तो जमीन लौटाई गई और न ही तय शर्तों का पालन किया गया।
विज्ञापन


अश्विनी बांधे के अनुसार, पिछले करीब 35 वर्षों से वह इस मामले में विभिन्न सरकारी कार्यालयों और अदालतों के चक्कर लगा रहे हैं। इस दौरान दस्तावेज जुटाने और कानूनी प्रक्रिया में उनका लगभग 20 करोड़ रुपये खर्च हो चुका है। हाल ही में संस्कृति विभाग की एक प्रदर्शनी में उन्हें अधिग्रहण से जुड़े पुराने राजस्व दस्तावेज मिले, जिनकी प्रमाणित प्रतियां प्राप्त कर उन्होंने सुप्रीम कोर्ट में अपने दावे के समर्थन में प्रस्तुत की हैं। इन रिकॉर्ड में माना एयरफील्ड के लिए बरौदा, रामचंडी और आसपास के गांवों की भूमि अधिग्रहण का उल्लेख बताया गया है।
विज्ञापन
विज्ञापन


1942 में बनी थी माना एयरफील्ड
दस्तावेजों के अनुसार, ब्रिटिश सरकार ने डिफेंस ऑफ इंडिया एक्ट के तहत वर्ष 1942 में युद्धकालीन जरूरतों को देखते हुए माना एयरफील्ड के निर्माण के लिए कई गांवों की जमीन ली थी। किसान का दावा है कि उस समय उनके पूर्वजों को केवल 1300 रुपये वार्षिक लीज राशि पर जमीन देने के लिए सहमत कराया गया था और युद्ध समाप्त होने के बाद भूमि वापस करने का आश्वासन दिया गया था।


अब सुप्रीम कोर्ट में दायर याचिका पर होने वाली सुनवाई इस पूरे मामले की दिशा तय करेगी। यदि अदालत किसान के दावे को स्वीकार करती है, तो यह प्रदेश के सबसे चर्चित भूमि विवादों में से एक साबित हो सकता है।
विज्ञापन
विज्ञापन

रहें हर खबर से अपडेट, डाउनलोड करें Android Hindi News App, iOS Hindi News App और Amarujala Hindi News APP अपने मोबाइल पे|
Get all India News in Hindi related to live update of politics, sports, entertainment, technology and education etc. Stay updated with us for all breaking news from India News and more news in Hindi.

विज्ञापन
विज्ञापन
विज्ञापन

एड फ्री अनुभव के लिए अमर उजाला प्रीमियम सब्सक्राइब करें

Next Article

AU ऐप में पढ़ें

Followed