{"_id":"682326f4f93a55bedc0095ee","slug":"farmer-arun-cultivated-maize-oilseeds-instead-of-paddy-farmers-are-getting-benefits-from-crop-diversification-2025-05-13","type":"story","status":"publish","title_hn":"CG News: कृषक अरुण ने की धान के बदले मक्का और तिलहन की खेती, फसल विविधीकरण से किसानों को मिल रहा लाभ","category":{"title":"City & states","title_hn":"शहर और राज्य","slug":"city-and-states"}}
CG News: कृषक अरुण ने की धान के बदले मक्का और तिलहन की खेती, फसल विविधीकरण से किसानों को मिल रहा लाभ
Tue, 13 May 2025 05:12 PM IST
अमन कोशले
अमर उजाला नेटवर्क, रायपुर
अमर उजाला नेटवर्क, रायपुर
Published by: अमन कोशले
Updated Tue, 13 May 2025 05:12 PM IST
सार
पत्थलगांव विकासखंड के ग्राम चेचनडांड निवासी कृषक अरुण कुमार भगत ने भी शासन की इस पहल को अपनाते हुए ग्रीष्मकालीन धान के स्थान पर मक्का की खेती कर रहे हैं। उन्होंने मक्का किस्म कॉर्न-9544 को एक हेक्टेयर खेत में मक्का लगाया है।
विज्ञापन
मक्का किस्म कॉर्न-9544 को एक हेक्टेयर खेत में मक्का लगाया
- फोटो : अमर उजाला
खबरें लगातार पढ़ने के लिए अमर उजाला एप डाउनलोड करें
या
वेबसाइट पर पढ़ना जारी रखने के लिए वीडियो विज्ञापन देखें
अगर आपके पास प्रीमियम मेंबरशिप है तो
विस्तार
छत्तीसगढ़ के जशपुर जिले के कृषकों को ग्रीष्मकालीन सीजन में परंपरागत धान की खेती के बदले जैसे मक्का, दलहन एवं तिलहन की खेती हेतु प्रेरित किया जा रहा है। कृषि विभाग द्वारा किसानों को गुणवत्तापूर्ण बीज, आवश्यक आदान सामग्री एवं तकनीकी मार्गदर्शन उपलब्ध कराकर फसल विविधीकरण को बढ़ावा दिया जा रहा है।
पत्थलगांव विकासखंड के ग्राम चेचनडांड निवासी कृषक अरुण कुमार भगत ने भी शासन की इस पहल को अपनाते हुए ग्रीष्मकालीन धान के स्थान पर मक्का की खेती कर रहे हैं। उन्होंने मक्का किस्म कॉर्न-9544 को एक हेक्टेयर खेत में मक्का लगाया है, जिसके लिए उन्हें कृषि विभाग से बीज एवं अन्य आवश्यक आदान सामग्री प्राप्त हुई।
कृषक अरुण भगत ने बताया कि मक्का की इस किस्म से प्रति हेक्टेयर लगभग 35 हजार रुपये तक शुद्ध लाभ प्राप्त होने की संभावना है। उन्होंने कहा कि परंपरागत धान की अपेक्षा मक्का की खेती में कम पानी की आवश्यकता होती है तथा उत्पादन लागत भी अपेक्षाकृत कम होती है। शासन की योजनाओं से मिले मार्गदर्शन एवं सहयोग से वे पहली बार फसल परिवर्तन करते हुए मक्के की खेती कर रहे हैं। कृषक अरुण भगत ने मुख्यमंत्री विष्णु देव साय के प्रति आभार व्यक्त करते हुए कहा कि फसल विविधिकरण किसानों के लिए लाभदायक है।
विज्ञापन
फसल विविधीकरण की यह रणनीति कृषि क्षेत्र में स्थायित्व, जल संरक्षण तथा किसानों की आय वृद्धि की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम सिद्ध हो रही है।
विज्ञापन
पत्थलगांव विकासखंड के ग्राम चेचनडांड निवासी कृषक अरुण कुमार भगत ने भी शासन की इस पहल को अपनाते हुए ग्रीष्मकालीन धान के स्थान पर मक्का की खेती कर रहे हैं। उन्होंने मक्का किस्म कॉर्न-9544 को एक हेक्टेयर खेत में मक्का लगाया है, जिसके लिए उन्हें कृषि विभाग से बीज एवं अन्य आवश्यक आदान सामग्री प्राप्त हुई।
विज्ञापन
कृषक अरुण भगत ने बताया कि मक्का की इस किस्म से प्रति हेक्टेयर लगभग 35 हजार रुपये तक शुद्ध लाभ प्राप्त होने की संभावना है। उन्होंने कहा कि परंपरागत धान की अपेक्षा मक्का की खेती में कम पानी की आवश्यकता होती है तथा उत्पादन लागत भी अपेक्षाकृत कम होती है। शासन की योजनाओं से मिले मार्गदर्शन एवं सहयोग से वे पहली बार फसल परिवर्तन करते हुए मक्के की खेती कर रहे हैं। कृषक अरुण भगत ने मुख्यमंत्री विष्णु देव साय के प्रति आभार व्यक्त करते हुए कहा कि फसल विविधिकरण किसानों के लिए लाभदायक है।
विज्ञापन
फसल विविधीकरण की यह रणनीति कृषि क्षेत्र में स्थायित्व, जल संरक्षण तथा किसानों की आय वृद्धि की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम सिद्ध हो रही है।