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छत्तीसगढ़ में फंसे मध्यप्रदेश के मजदूर, बांस की बाड़ बनाकर कमा लिए 24 हजार रुपये
Sun, 26 Apr 2020 07:04 PM IST
योगेश साहू
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, रायपुर।
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, रायपुर।
Published by: योगेश साहू
Updated Sun, 26 Apr 2020 07:04 PM IST
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छत्तीसगढ़ के सूरजपुर जिले के एक राहत शिविर में बांस की बाड़ बनाते मजदूर
- फोटो : ANI
वैश्विक महामारी कोरोना वायरस के कारण लगाए गए लॉकडाउन की सबसे ज्यादा मार प्रवासी मजदूरों पर पड़ी है। ये मजदूर अलग-अलग राज्यों में फंसे हैं और अपने घरों को लौटना चाहते हैं। परंतु छत्तीसगढ़ से एक अच्छी खबर आ रही है। यहां मध्यप्रदेश से आए कुछ मजूदर फंसे हुए हैं, जो बांस की बाड़ बनाकर कमाई भी कर रहे हैं।
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Forest Department has provided them with bamboos to make tree guards & pays Rs 200 for making a tree guard so a worker earns around Rs 500 per day. We are providing them food&other essentials, as we consider them as our guests: Deepak Soni, District Collector, Surajpur. https://t.co/XypdwVSEzB pic.twitter.com/oZoxhpFGnO
— ANI (@ANI) April 26, 2020
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क्या है मामला
दरअसल, मध्यप्रदेश के बालाघाट जिले के रहने वाले करीब 15 मजदूर रोजगार की तलाश में छत्तीसगढ़ आए थे। लॉकडाउन की घोषणा होने पर यह सभी यहीं फंस गए। आर्थिक तौर पर कमजोर होने के कारण कोई निश्चित ठौर-ठिकाना नहीं था। ऐसे में सूरजपुर जिले के सरकारी राहत शिविर में शरण मिल गई।
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यहां रह रहे एक मजदूर ने बताया कि हम सभी मध्यप्रदेश के बालाघाट से आए हैं। यहां रहकर 20 अप्रैल से काम भी कर रहे हैं। अभी तक अपने काम से 24 हजार रुपये से ज्यादा की कमाई कर चुके हैं। हम बहुत खुश हैं।
बांस से एक बाड़ बनाने के मिलते हैं 200 रुपये
सूरजपुर जिले के जिलाधिकारी दीपक सोनी बताते हैं कि वन विभाग ने इन मजदूरों को पेड़ों की सुरक्षा के लिए इस्तेमाल होने वाली बाड़ बनाने का काम दिया है। इसके लिए इन्हें बांस उपलब्ध कराया गया है।
एक ट्री गार्ड बनाने के लिए 200 रुपये का भुगतान किया जाता है। इस हिसाब से एक श्रमिक एक दिन में लगभग 500 रुपये कमा लेता है। हम यहां राहत शिविर में इन्हें भोजन और अन्य जरूरी चीजें भी मुहैया करा रहे हैं। हम इन्हें अपने मेहमान के रूप में देख रहे हैं।