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मुख्यमंत्री विष्णुदेव साय ने राजमिस्त्री बनकर की ईंट जोड़ाई: सीएम बोले- जल संकट से बचने ऐसे प्रयास आवश्यक

Fri, 09 May 2025 05:07 PM IST
अमन कोशले अमर उजाला नेटवर्क, रायपुर
अमर उजाला नेटवर्क, रायपुर Published by: अमन कोशले Updated Fri, 09 May 2025 05:07 PM IST
सार

सीएम साय ने मोर गांव, मोर पानी महाभियान के अंतर्गत जल संचयन के लिए जल संचयन वाहिनी द्वारा निर्मित किए जा रहे सोखता गड्ढे का अवलोकन किया। इस दौरान उन्होंने स्वयं निर्माणाधीन सोखता गड्ढे में ईंट जोड़ाई की।

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CM Vishnudev Sai became a mason and laid bricks: said- Such efforts are necessary to avoid water crisis in cg
मुख्यमंत्री विष्णुदेव साय ने राजमिस्त्री बनकर की ईंट जोड़ाई - फोटो : अमर उजाला

विस्तार

छत्तीसगढ़ के मुख्यमंत्री विष्णुदेव साय आज बलौदाबाजार भाटापारा जिले के विकासखंड कसडोल के विशेष पिछड़ी जनजाति कमार बाहुल्य ग्राम बलदाकछार पहुँचे। उन्होंने मोर गांव, मोर पानी महाभियान के अंतर्गत जल संचयन के लिए जल संचयन वाहिनी द्वारा निर्मित किए जा रहे सोखता गड्ढे का अवलोकन किया। इस दौरान उन्होंने स्वयं निर्माणाधीन सोखता गड्ढे में ईंट जोड़ाई की। पानी बचाने के लिए जल संचयन वाहिनी के कार्यों की सराहना करते हुए मुख्यमंत्री ने कहा कि जल संकट से बचने ऐसे प्रयास आवश्यक हैं।
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जल संचयन वाहिनी की सदस्य ललिता ध्रुव ने बताया कि मोर गांव, मोर पानी महाभियान के तहत बलदाकछार में अब तक 10 नलकूपों के पास सोखता गड्ढों का निर्माण किया जा चुका है। इस अभियान के अंतर्गत तालाबों की सफाई, जागरूकता रैली, दीवार लेखन, तथा वाटर हार्वेस्टिंग सिस्टम के लिए ग्रामीणों को जागरूक किया जा रहा है।
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मुख्यमंत्री विष्णुदेव साय ने पंचायत राज दिवस के अवसर पर 24 अप्रैल 2025 को मोर गांव, मोर पानी महाभियान की शुरुआत की थी। इस अभियान के अंतर्गत बलौदाबाजार-भाटापारा जिले की सभी 519 ग्राम पंचायतों में अब तक नलकूपों के पास 2500 सोखता गड्ढों का निर्माण पूर्ण किया जा चुका है। साथ ही, लगभग 1291 तालाबों की सफाई भी की गई है। 
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जल संचयन हेतु ग्राम स्तर पर ग्राम जल एवं स्वच्छता समिति की बैठकें आयोजित की जा रही हैं, जिनमें वर्षा जल संचयन हेतु आवश्यक संरचनाओं के निर्माण के प्रस्ताव पारित किए जा रहे हैं तथा निर्मित संरचनाओं का ग्रामवासियों द्वारा भौतिक सत्यापन भी किया जा रहा है। प्रत्येक पंचायत में दो जल संचयन वाहिनियाँ गठित की गई हैं, जो ग्रामीणों को जल संरक्षण के लिए निरंतर प्रोत्साहित कर रही हैं।
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