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CG News: लाल किले में गूंजा 'छत्तीसगढ़िया सबले बढ़िया', अंतरराष्ट्रीय मंच पर छत्तीसगढ़ी संस्कृति की धूम

Tue, 16 Dec 2025 12:51 PM IST
अमन कोशले अमर उजाला नेटवर्क, रायपुर
अमर उजाला नेटवर्क, रायपुर Published by: अमन कोशले Updated Tue, 16 Dec 2025 12:51 PM IST
सार

बिलासपुर जिले की सांस्कृतिक संस्था लोक श्रृंगार भारती के गेड़ी लोक नृत्य दल ने यूनेस्को और भारत सरकार के संस्कृति मंत्रालय के आमंत्रण पर भव्य प्रस्तुति देकर देश-विदेश से आए प्रतिनिधियों को मंत्रमुग्ध कर दिया। 

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'Chhattisgarhiya Sable Badhiya' resonates at Red Fort, Chhattisgarhi culture shines on the international stage
अंतरराष्ट्रीय मंच पर छत्तीसगढ़ी संस्कृति की धूम - फोटो : अमर उजाला

विस्तार

नई दिल्ली के ऐतिहासिक लाल किला प्रांगण में छत्तीसगढ़ की लोक संस्कृति ने अंतरराष्ट्रीय पहचान बनाई। बिलासपुर जिले की सांस्कृतिक संस्था लोक श्रृंगार भारती के गेड़ी लोक नृत्य दल ने यूनेस्को और भारत सरकार के संस्कृति मंत्रालय के आमंत्रण पर भव्य प्रस्तुति देकर देश-विदेश से आए प्रतिनिधियों को मंत्रमुग्ध कर दिया। 7 से 13 दिसंबर तक आयोजित इस अंतरराष्ट्रीय समारोह में 180 देशों के प्रतिनिधियों की सहभागिता रही।
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गेड़ी नृत्य की ऊर्जावान और साहसिक प्रस्तुति ने दर्शकों का दिल जीत लिया। कलाकारों के संतुलन, ताल और पारंपरिक भाव-भंगिमाओं से सजी इस प्रस्तुति को अंतरराष्ट्रीय मंच पर खूब सराहना मिली। मुख्यमंत्री विष्णु देव साय ने गेड़ी नर्तक दल को इस उपलब्धि के लिए बधाई और शुभकामनाएं दीं। समारोह के दौरान केंद्रीय संस्कृति एवं पर्यटन मंत्री गजेंद्र सिंह शेखावत गेड़ी नृत्य से खासे प्रभावित नजर आए। उन्होंने कलाकारों का उत्साह बढ़ाते हुए ‘छत्तीसगढ़िया सबले बढ़िया’ का नारा दिया, जिस पर पूरा प्रांगण तालियों से गूंज उठा।
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कार्यक्रम का एक ऐतिहासिक क्षण तब आया, जब भारत के महापर्व दीपावली को यूनेस्को द्वारा विश्व सांस्कृतिक धरोहर के रूप में मान्यता दी गई। इस अवसर पर छत्तीसगढ़ के गेड़ी लोक नृत्य दल की प्रस्तुति को विशेष सराहना मिली और इसे भारतीय लोक परंपरा का सशक्त प्रतीक बताया गया।
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मुख्य गायक एवं नृत्य निर्देशक अनिल गढ़ेवाल के नेतृत्व में गेड़ी नृत्य दल ने अपने जोशीले और रोमांचक प्रदर्शन से अंतरराष्ट्रीय दर्शकों को झूमने पर मजबूर कर दिया। कार्यक्रम में विदेश मंत्री एस. जयशंकर, केंद्रीय संस्कृति एवं पर्यटन मंत्री गजेंद्र सिंह शेखावत, दिल्ली की मुख्यमंत्री रेखा गुप्ता सहित विभिन्न राज्यों के कलाकार और 180 देशों के प्रतिनिधि मौजूद रहे।

मुख्य गायक अनिल गढ़ेवाल द्वारा प्रस्तुत “काट ले हरियर बांसे” गीत ने विदेशी प्रतिनिधियों में छत्तीसगढ़ी संस्कृति के प्रति खास जिज्ञासा जगाई। मांदल वादक मोहन डोंगरे के एक स्थान पर घूमते हुए किए गए वादन ने दर्शकों को चकित किया। हारमोनियम वादक सौखी लाल कोसले और बांसुरी वादक महेश नवरंग की मधुर धुनों पर विदेशी मेहमान भी झूमते नजर आए। गेड़ी नर्तकों ने साहसिक करतब दिखाते हुए एक गेड़ी पर मानवीय संरचनाएं बनाईं, जिस पर पूरा प्रांगण तालियों से गूंज उठा।


पारंपरिक वेशभूषा, कौड़ियों और चीनी मिट्टी की मालाएं, पटसन वस्त्र, सिकबंध और मयूर पंखों से सजी प्रस्तुति ने कार्यक्रम को और भी आकर्षक बना दिया। यूनेस्को के महानिदेशक खालिद एन. एनानी सहित विभिन्न देशों के प्रतिनिधियों ने गेड़ी नृत्य दल के साथ स्मृति चित्र खिंचवाए और छत्तीसगढ़ को अंतरराष्ट्रीय स्तर पर सांस्कृतिक पहचान दिलाने के लिए कलाकारों की सराहना की।
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