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सीजी: शिक्षिकाओं के हौसले को सलाम, बच्चों का भविष्य संवारने 9 माह की मासूम के साथ नदी पार कर पहुंचती हैं स्कूल
Sat, 19 Sep 2026 09:13 AM IST
प्रिया वर्मा
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, बलरामपुर
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, बलरामपुर
Published by: प्रिया वर्मा
Updated Sat, 19 Sep 2026 09:13 AM IST
सार
बलरामपुर जिले के वाड्रफनगर ब्लॉक स्थित ढौरपुर पारा स्कूल से शिक्षिकाओं के समर्पण की एक अनूठी तस्वीर सामने आई है। दोनों शिक्षिकाएं अपनी जान जोखिम में डालकर, उफनती नदी पार कर और पथरीले रास्तों पर 3 किलोमीटर पैदल चलकर रोज बच्चों को पढ़ाने पहुंचती हैं।
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शिक्षिकाओं के हौसले को सलाम
- फोटो : अमर उजाला
विस्तार
कहते हैं कि अगर मन में कुछ कर गुजरने का जज्बा हो तो रास्ते की बड़ी से बड़ी रुकावटें भी घुटने टेक देती हैं। ऐसा ही एक अद्भुत और प्रेरणादायक उदाहरण छत्तीसगढ़ के बलरामपुर जिले के वाड्रफनगर ब्लॉक स्थित ढौरपुर पारा प्राथमिक स्कूल से सामने आया है। यहां पदस्थ दो महिला शिक्षिकाएं अपनी जान जोखिम में डालकर, उफनती नदी पार करके और पथरीले रास्तों पर 3 किलोमीटर पैदल चलकर रोज बच्चों को पढ़ाने पहुंचती हैं। इनमें से एक शिक्षिका तो अपनी महज 9 महीने की मासूम बच्ची को गोद में उठाकर नदी के तेज बहाव को पार करती हैं।
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स्कूटर पार्क कर 3 किमी पैदल, फिर कमर तक पानी में सफर
शिक्षिका संध्या हलदर और कारमिला टोप्पो रोज अपनी स्कूटर मर्ना गांव में खड़ी करती हैं। इसके बाद शुरू होता है पहाड़ियों और पत्थरों से भरा 3 किलोमीटर का कठिन पैदल रास्ता। सफर का सबसे खौफनाक मोड़ तब आता है जब मोरान और इरिया नदी के संगम को पार करना पड़ता है। बारिश के दिनों में यहां पानी कमर से लेकर पेट तक आ जाता है।
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शिक्षिका संध्या हलदर बताती हैं जब पानी का बहाव तेज होता है, तो पैर काँपने लगते हैं लेकिन जब हम स्कूल पहुंचते हैं और बच्चे हमें देखकर खुश होते हैं तो सारी थकान और डर मिट जाता है। हम चाहते हैं कि बच्चों की पढ़ाई का नुकसान न हो।
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वहीं वर्ष 2014 से यहां सेवा दे रहीं शिक्षिका कारमिला टोप्पो कहती हैं कि हर साल बारिश के मौसम में यही हाल होता है। स्थानीय लोग मना भी करते हैं, लेकिन बच्चों के भविष्य की चिंता हमें खींच लाती है।
कलेक्टर ने सराहा, कहा- पूरे जिले के लिए गर्व की बात
शिक्षिकाओं के इस समर्पण की खबर सोशल मीडिया और मीडिया प्लेटफॉर्म्स के जरिए सामने आने के बाद बलरामपुर कलेक्टर चंदन संजय त्रिपाठी ने उनके जज्बे की खुलकर तारीफ की है।
कलेक्टर चंदन संजय त्रिपाठी ने कहा- मुझे मीडिया के माध्यम से जानकारी मिली कि हमारी एक शिक्षिका अपनी छोटी सी बच्ची को गोद में लेकर उफनती नदी पार करती हैं और 3 किलोमीटर चलकर स्कूल पहुंचती हैं। उन्होंने अपनी कर्तव्यनिष्ठा से पूरे जिले के शिक्षकों के सामने एक अनुकरणीय मिसाल पेश की है। ऐसी समर्पित शिक्षिकाओं का सम्मान करना पूरे जिले के लिए गर्व और सम्मान की बात है।