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छत्तीसगढ़: जूनियर डॉक्टरों का ओपीडी बहिष्कार, 28 सितंबर से इमरजेंसी सेवाएं होंगी ठप
Thu, 24 Sep 2026 08:31 PM IST
अमन कोशले
अमर उजाला नेटवर्क, रायपुर
अमर उजाला नेटवर्क, रायपुर
Published by: अमन कोशले
Updated Thu, 24 Sep 2026 08:31 PM IST
सार
छत्तीसगढ़ के शासकीय मेडिकल कॉलेजों में जूनियर डॉक्टरों ने ओपीडी सेवाओं का पूरी तरह बहिष्कार कर अनिश्चितकालीन प्रदर्शन शुरू कर दिया है।
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सांकेतिक तस्वीर
- फोटो : अमर उजाला
विस्तार
छत्तीसगढ़ के शासकीय मेडिकल कॉलेजों में जूनियर डॉक्टरों ने ओपीडी सेवाओं का पूरी तरह बहिष्कार कर अनिश्चितकालीन प्रदर्शन शुरू कर दिया है। छत्तीसगढ़ जूनियर डॉक्टर्स एसोसिएशन (जूडा) ने राज्य सरकार को स्पष्ट चेतावनी दी है कि यदि उनकी मांगों पर शीघ्र ही लिखित आदेश जारी नहीं किया गया, तो 28 सितंबर से आपातकालीन सेवाओं को भी पूरी तरह बंद कर दिया जाएगा। ओपीडी बहिष्कार के दौरान आंबेडकर अस्पताल पहुंचे मरीजों को परेशानी से बचाने के लिए चिकित्सकों ने धरना स्थल पर ही समानांतर ओपीडी संचालित की, जहां मरीजों की जांच के साथ दवा की पर्ची भी लिखी गई।
बॉन्ड व्यवस्था समाप्त करने की मांग
जूडा अध्यक्ष डॉ. पीयूष श्रीवास्तव ने कहा कि स्वास्थ्य मंत्री के साथ पूर्व में हुई बातचीत के बाद अब डॉक्टर केवल खोखले आश्वासन नहीं, बल्कि धरातल पर लिखित निर्णय चाहते हैं। आंदोलन की सबसे प्रमुख मांग चिकित्सीय बॉन्ड व्यवस्था को खत्म करने की है। सुपर स्पेशलिटी (एमसीएच) स्तर पर लगभग 75 लाख रुपये की बॉन्ड राशि का नियम लागू है। डॉक्टरों ने सवाल उठाया है कि किसी गरीब अथवा मध्यमवर्गीय परिवार का प्रतिभावान बच्चा यदि मेरिट के आधार पर चयनित होता है, तो वह इतनी बड़ी राशि कहां से लाएगा। बॉन्ड की अवधि कम होने से प्रदेश को जल्द ही विशेषज्ञ डॉक्टर मिल सकेंगे।
सुपर स्पेशलिटी कैडर का निर्माण
संघ के अनुसार राज्य सरकार ने सुपर स्पेशलिटी सेंटरों के बुनियादी ढांचे पर लगभग 200 करोड़ रुपये की विशाल राशि खर्च की है, परंतु वहां आवश्यक डॉक्टरों की भर्ती और पृथक कैडर की स्थापना अब तक अधर में लटकी है। चिकित्सकों ने कहा कि बिना पर्याप्त विशेषज्ञ डॉक्टरों के ये महंगे केंद्र सुचारू रूप से नहीं चल सकते। सुपर स्पेशलिटी कैडर बनने से राज्य में ही लिवर ट्रांसप्लांट, किडनी ट्रांसप्लांट तथा गंभीर कैंसर जैसी जटिल व्याधियों का आधुनिक इलाज संभव होगा और आम जनता को दूसरे राज्यों का रुख नहीं करना पड़ेगा।
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सम्मानजनक मानदेय देने पर जोर
आंदोलनकारी डॉक्टरों ने मानदेय में विषमता का मुद्दा भी प्रमुखता से उठाया है। प्रदेश में लंबे समय से कार्यरत कई डॉक्टरों को केवल 15,900 रुपये का भुगतान किया जा रहा है, जो देश के अन्य राज्यों की तुलना में काफी कम है। जूडा ने मांग रखी है कि इंटर्न, रेजिडेंट, पीजी बॉन्डेड और एमबीबीएस बॉन्डेड चिकित्सकों को उनके श्रम और उत्तरदायित्व के अनुसार उचित मानदेय दिया जाए। रायपुर, बिलासपुर, अंबिकापुर और जगदलपुर के मेडिकल कॉलेजों के डॉक्टर इस आंदोलन में एकजुट हैं। यदि मांगों पर त्वरित निर्णय न हुआ तो 28 सितंबर से इमरजेंसी सेवाएं भी ठप कर दी जाएंगी।
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बॉन्ड व्यवस्था समाप्त करने की मांग
जूडा अध्यक्ष डॉ. पीयूष श्रीवास्तव ने कहा कि स्वास्थ्य मंत्री के साथ पूर्व में हुई बातचीत के बाद अब डॉक्टर केवल खोखले आश्वासन नहीं, बल्कि धरातल पर लिखित निर्णय चाहते हैं। आंदोलन की सबसे प्रमुख मांग चिकित्सीय बॉन्ड व्यवस्था को खत्म करने की है। सुपर स्पेशलिटी (एमसीएच) स्तर पर लगभग 75 लाख रुपये की बॉन्ड राशि का नियम लागू है। डॉक्टरों ने सवाल उठाया है कि किसी गरीब अथवा मध्यमवर्गीय परिवार का प्रतिभावान बच्चा यदि मेरिट के आधार पर चयनित होता है, तो वह इतनी बड़ी राशि कहां से लाएगा। बॉन्ड की अवधि कम होने से प्रदेश को जल्द ही विशेषज्ञ डॉक्टर मिल सकेंगे।
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सुपर स्पेशलिटी कैडर का निर्माण
संघ के अनुसार राज्य सरकार ने सुपर स्पेशलिटी सेंटरों के बुनियादी ढांचे पर लगभग 200 करोड़ रुपये की विशाल राशि खर्च की है, परंतु वहां आवश्यक डॉक्टरों की भर्ती और पृथक कैडर की स्थापना अब तक अधर में लटकी है। चिकित्सकों ने कहा कि बिना पर्याप्त विशेषज्ञ डॉक्टरों के ये महंगे केंद्र सुचारू रूप से नहीं चल सकते। सुपर स्पेशलिटी कैडर बनने से राज्य में ही लिवर ट्रांसप्लांट, किडनी ट्रांसप्लांट तथा गंभीर कैंसर जैसी जटिल व्याधियों का आधुनिक इलाज संभव होगा और आम जनता को दूसरे राज्यों का रुख नहीं करना पड़ेगा।
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सम्मानजनक मानदेय देने पर जोर
आंदोलनकारी डॉक्टरों ने मानदेय में विषमता का मुद्दा भी प्रमुखता से उठाया है। प्रदेश में लंबे समय से कार्यरत कई डॉक्टरों को केवल 15,900 रुपये का भुगतान किया जा रहा है, जो देश के अन्य राज्यों की तुलना में काफी कम है। जूडा ने मांग रखी है कि इंटर्न, रेजिडेंट, पीजी बॉन्डेड और एमबीबीएस बॉन्डेड चिकित्सकों को उनके श्रम और उत्तरदायित्व के अनुसार उचित मानदेय दिया जाए। रायपुर, बिलासपुर, अंबिकापुर और जगदलपुर के मेडिकल कॉलेजों के डॉक्टर इस आंदोलन में एकजुट हैं। यदि मांगों पर त्वरित निर्णय न हुआ तो 28 सितंबर से इमरजेंसी सेवाएं भी ठप कर दी जाएंगी।