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छत्तीसगढ़ की दीदियां बनीं आत्मनिर्भरता की ब्रांड एंबेसडर: लखपति दीदियों की सफलता महिलाओं के लिए बनी प्रेरणा
Sat, 04 Oct 2025 01:10 PM IST
ललित कुमार सिंह
अमर उजाला ब्यूरो, रायपुर
अमर उजाला ब्यूरो, रायपुर
Published by: ललित कुमार सिंह
Updated Sat, 04 Oct 2025 01:10 PM IST
सार
Raipur News: महिलाएं आज जीवन के हर क्षेत्र में सफलता के नए आयाम गढ़ रही हैं। तकनीक ने पूरी दुनिया के उत्पादों को फिंगरटिप्स पर ला दिया है और अब डिजिटल माध्यम से वैश्विक बाजार तक पहुँचना संभव हो गया है। इसी उद्देश्य से
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स्टालों का अवलोकन करते सीएम विष्णुदेव साय
- फोटो : अमर उजाला डिजिटल
विस्तार
Raipur News: महिलाएं आज जीवन के हर क्षेत्र में सफलता के नए आयाम गढ़ रही हैं। तकनीक ने पूरी दुनिया के उत्पादों को फिंगरटिप्स पर ला दिया है और अब डिजिटल माध्यम से वैश्विक बाजार तक पहुँचना संभव हो गया है। इसी उद्देश्य से बिहान की दीदियों को डिजिटल प्रशिक्षण दिया जा रहा है ताकि छत्तीसगढ़ के उत्पाद देश और दुनिया के बाजारों तक पहुँच सकें। मुख्यमंत्री विष्णु देव साय ने राजधानी रायपुर के शहीद स्मारक भवन में पंचायत एवं ग्रामीण विकास विभाग की ओर से आयोजित बिहान दीदियों के प्रशिक्षण कार्यक्रम को संबोधित करते हुए यह बात कही।
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मुख्यमंत्री साय ने कहा कि नवरात्रि का पर्व हमारी संस्कृति में नारी शक्ति के सम्मान और पूजन का प्रतीक है। जहां नारी का सम्मान होता है, वहीं देवताओं का वास माना जाता है। उन्होंने कहा कि प्रदेश की महिलाएं इतिहास रच रही हैं। बिहान की बहनों की कामयाबी हमें गर्व से भर देती है। छत्तीसगढ़ की दीदियां अब आत्मनिर्भरता की ब्रांड एम्बेसडर बन रही हैं। लखपति दीदियां सपनों को नए पंख दे रही हैं और आज उन्हें डिजिटली सक्षम बनाकर उनके उत्पादों को वैश्विक बाजार से जोड़ने का कार्य किया जा रहा है।
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सीएम ने कहा कि यदि हम संकल्प लेकर आगे बढ़ें तो सफलता निश्चित है। केंद्र और राज्य सरकार मिलकर महिलाओं को आत्मनिर्भर बनाने के लिए निरंतर कार्य कर रही हैं। वर्ष 2027 तक देशभर में 3 करोड़ और छत्तीसगढ़ में 8 लाख महिलाओं को आत्मनिर्भर बनाने का लक्ष्य निर्धारित किया गया है। उन्होंने बताया कि जशपुर जैसे जिलों में महुआ आधारित उत्पाद तैयार हो रहे हैं, जिन्हें ‘जशप्योर’ ब्रांड के रूप में राष्ट्रीय पहचान मिली है। कोरोना काल में महुआ से सैनिटाइज़र बनाकर महिलाओं ने अपनी क्षमता और नवाचार का परिचय दिया था।
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उन्होंने कहा कि महतारी वंदन योजना से महिलाओं को आर्थिक रूप से सशक्त बनाने में मदद मिली है। आत्मनिर्भरता का मार्ग संकल्प और प्रयास से ही संभव है। महिला स्व-सहायता समूहों के नवाचार और परिश्रम से प्रदेश की अर्थव्यवस्था को नई दिशा मिल रही है। उन्होंने भरोसा दिलाया कि सरकार महिलाओं को और अधिक सशक्त बनाने के लिए हरसंभव सहयोग करेगी।
महिलाओं ने साझा किया लखपति बनने का सफर
इस अवसर पर मुख्यमंत्री ने लखपति दीदी बनने की प्रेरक कहानियाँ सुनीं। बलरामपुर जिले के तारकेश्वरपुर की पूनम गुप्ता ने बताया कि सरस्वती महिला स्व-सहायता समूह से जुड़ने के बाद उनके जीवन में बड़ा बदलाव आया। प्रशासन के सहयोग से किराना दुकान खोली, आटा चक्की स्थापित की और अब पिकअप व ट्रैक्टर खरीदकर व्यवसाय को विस्तार दिया है।
गरियाबंद की हेमिन साहू ने बताया कि एक समय सब्जी खरीदने तक में कठिनाई होती थी। बिहान से लोन लेकर आचार-पापड़ का व्यवसाय शुरू किया, जो अब राजिम में दुकान तक पहुँच चुका है। आज उन्हें प्रतिदिन लगभग 4 हजार रुपए की आय हो रही है। हाल ही दिल्ली के सरस मेले में उन्होंने 2 लाख 31 हजार रुपए की बिक्री की। गीता वैष्णव ने भावुक होकर कहा कि पहले उन्हें 10 रुपए के लिए हाथ फैलाना पड़ता था। लेकिन बिहान के माध्यम से मां वैभवलक्ष्मी स्व-सहायता समूह से जुड़कर उन्होंने आचार-पापड़ व्यवसाय शुरू किया। अब वे अपनी कमाई से बेटे को सॉफ्टवेयर इंजीनियर बनाने का सपना पूरा कर रही हैं।
रायपुर की गीता वर्मा ने बताया कि वैभव स्व-सहायता समूह से जुड़कर हल्दी-मसाले का व्यवसाय शुरू किया और आज हर महीने 15 से 20 हजार रुपए की आय अर्जित कर रही हैं। उन्होंने कहा कि प्रधानमंत्री जी के लखपति दीदी बनाने के संकल्प ने उनकी और लाखों बहनों की जिंदगी बदल दी है।