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छत्तीसगढ़ कोयला घोटाला: कांग्रेस भवन पहुंची 104 करोड़ रुपये की अवैध रकम…पूरक चालान में दावा
Sat, 10 Oct 2026 03:29 PM IST
अमन कोशले
अमर उजाला नेटवर्क, रायपुर
अमर उजाला नेटवर्क, रायपुर
Published by: अमन कोशले
Updated Sat, 10 Oct 2026 03:29 PM IST
सार
कोयला लेवी घोटाले में ईओडब्ल्यू के छठे पूरक चालान में 104.20 करोड़ रुपये कांग्रेस भवन तक पहुंचने का दावा किया गया है। करीब 9,500 पन्नों के चालान में डायरियों की प्रविष्टियों, कथित लेनदेन और निवेश का ब्योरा शामिल है।
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छत्तीसगढ़ कोयला घोटाला का 104 करोड़ रुपये का अवैध पैसा कांग्रेस भवन पहुंचने का दावा
- फोटो : अमर उजाला
विस्तार
छत्तीसगढ़ के बहुचर्चित कोयला लेवी घोटाले में आर्थिक अपराध अन्वेषण शाखा (ईओडब्ल्यू) ने विशेष न्यायालय में लगभग 9,500 पन्नों का छठा पूरक चालान पेश किया है। इस चालान में जांच एजेंसी ने दावा किया है कि अक्तूबर 2020 से जून 2022 के बीच कोयला घोटाले की 104.20 करोड़ रुपये की अवैध रकम रायपुर स्थित राजीव भवन (कांग्रेस भवन) तक पहुंचाई गई। जब्त हस्तलिखित डायरियों की जांच में एजेंसी को 'भवन', 'BHAWAN' और 'C PARTY' के नाम से कुल 32 प्रविष्टियां दर्ज मिली हैं। जांच एजेंसी के अनुसार सूर्यकांत तिवारी के निर्देश पर यह नकद राशि विभिन्न माध्यमों से वहां पहुंचाई जाती थी।
एजेंसी की जांच रिपोर्ट के मुताबिक, यह पूरा अवैध तंत्र 15 जुलाई, 2020 को जारी एक सरकारी आदेश के बाद शुरू हुआ था। इस आदेश के जरिये ऑनलाइन ई-परमिट जारी करने से पहले जिला खनिज अधिकारी की मंजूरी अनिवार्य कर दी गई थी। इस व्यवस्था का दुरुपयोग कर कोयला परिवहनकर्ताओं और व्यापारियों से 25 रुपये प्रति टन की दर से अवैध वसूली की गई। अलग-अलग जिलों से एकत्रित राशि रायपुर पहुंचाई जाती थी और हस्तलिखित डायरियों में इसका विस्तृत हिसाब-किताब रखा जाता था।
डायरियों में दर्ज लेनदेन और निवेश
जांच एजेंसी ने चालान में डायरियों की विभिन्न प्रविष्टियों का विस्तृत ब्योरा दिया है। डायरियों में 27 जनवरी, 2022 को 10 करोड़ रुपये, 2 मार्च, 2022 को छह करोड़ रुपये, 30 मार्च को पांच करोड़ रुपये, 6 मई को आठ करोड़ रुपये तथा 7 जून 2022 को 8.70 करोड़ रुपये दर्ज मिले हैं। इसके अलावा जिलों में दौरों के दौरान विश्राम गृहों में 'सीएम हाउस' के नाम से कमरे बुक कराए जाने के साक्ष्य भी मिले हैं।
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जांच में सामने आया कि कोयला लेवी से हासिल अवैध राशि को जमीन, फ्लैट, कोयला वाशरी और विभिन्न कंपनियों में निवेश किया गया। जोगेन्दर सिंह से जुड़ी सात फर्मों में लगभग 40 करोड़ रुपये के लेनदेन के विवरण मिले हैं। वहीं सुनील कुमार अग्रवाल, अनुराग चौरसिया, पियूष कुमार साहू और दीपेश टांक द्वारा संपत्ति खरीदने और वाशरी में निवेश करने के तथ्यों की जांच भी चालान में शामिल की गई है। प्रवर्तन निदेशालय के अनुसार, इस पूरे मामले में 570 करोड़ रुपये से अधिक की अवैध वसूली का अनुमान है।
नेताओं की मिलीभगत और वॉट्सएप चैट
चार्जशीट में कई नेताओं की सीधी संलिप्तता का उल्लेख किया गया है। विधायक देवेंद्र यादव और सूर्यकांत तिवारी के बीच हुई वॉट्सएप बातचीत के साक्ष्य अदालत में पेश किए गए हैं, जिसमें मुलाकातों और खैरागढ़ चुनाव का जिक्र है। पूर्व विधायक चंद्रदेव प्रसाद राय पर 46 लाख रुपये लेने का आरोप है। इसमें से 42 लाख रुपये उत्तर प्रदेश चुनाव में खर्च किए गए और चार लाख रुपये से पत्नी के लिए सोने का हार खरीदा गया।
कांग्रेस नेता विनोद तिवारी द्वारा 19 किश्तों में 1.87 करोड़ रुपये लेने के सबूत मिले हैं। वहीं, नेता आरपी सिंह ने पूछताछ के दौरान स्वीकार किया कि उन्होंने 2.01 करोड़ रुपये की राशि ली थी, जिसका इस्तेमाल पार्टी के लिए वाहनों और मीडिया प्रबंधन में किया गया था।
प्रशासनिक अधिकारियों की भूमिका और कार्रवाई
प्रवर्तन निदेशालय की रिपोर्ट पर ईओडब्ल्यू ने दो पूर्व मंत्रियों और विधायकों सहित 36 लोगों के खिलाफ नामजद प्राथमिकी दर्ज की है। मामले में तत्कालीन संचालक आईएएस समीर विश्नोई, आईएएस रानू साहू, पूर्व मुख्यमंत्री की उप सचिव सौम्या चौरसिया, जेडी माइनिंग एसएस नाग और कारोबारी सूर्यकांत तिवारी को गिरफ्तार किया गया है।
जांच में यह भी सामने आया कि आईपीएस पारूल माथुर, आईपीएस प्रशांत अग्रवाल और आईपीएस भोजराम पटेल जैसे पुलिस अधिकारी भी सिंडिकेट के संपर्क में थे। इन पर विभागीय सूचनाएं साझा करने और निर्देशों पर वाहनों पर कार्रवाई करने का आरोप है। इसके अलावा एक कांस्टेबल पर जांच एजेंसी के अधिकारियों की जासूसी करने का आरोप है। पूरे मामले में अन्य संदिग्धों की जांच जारी है।
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एजेंसी की जांच रिपोर्ट के मुताबिक, यह पूरा अवैध तंत्र 15 जुलाई, 2020 को जारी एक सरकारी आदेश के बाद शुरू हुआ था। इस आदेश के जरिये ऑनलाइन ई-परमिट जारी करने से पहले जिला खनिज अधिकारी की मंजूरी अनिवार्य कर दी गई थी। इस व्यवस्था का दुरुपयोग कर कोयला परिवहनकर्ताओं और व्यापारियों से 25 रुपये प्रति टन की दर से अवैध वसूली की गई। अलग-अलग जिलों से एकत्रित राशि रायपुर पहुंचाई जाती थी और हस्तलिखित डायरियों में इसका विस्तृत हिसाब-किताब रखा जाता था।
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डायरियों में दर्ज लेनदेन और निवेश
जांच एजेंसी ने चालान में डायरियों की विभिन्न प्रविष्टियों का विस्तृत ब्योरा दिया है। डायरियों में 27 जनवरी, 2022 को 10 करोड़ रुपये, 2 मार्च, 2022 को छह करोड़ रुपये, 30 मार्च को पांच करोड़ रुपये, 6 मई को आठ करोड़ रुपये तथा 7 जून 2022 को 8.70 करोड़ रुपये दर्ज मिले हैं। इसके अलावा जिलों में दौरों के दौरान विश्राम गृहों में 'सीएम हाउस' के नाम से कमरे बुक कराए जाने के साक्ष्य भी मिले हैं।
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जांच में सामने आया कि कोयला लेवी से हासिल अवैध राशि को जमीन, फ्लैट, कोयला वाशरी और विभिन्न कंपनियों में निवेश किया गया। जोगेन्दर सिंह से जुड़ी सात फर्मों में लगभग 40 करोड़ रुपये के लेनदेन के विवरण मिले हैं। वहीं सुनील कुमार अग्रवाल, अनुराग चौरसिया, पियूष कुमार साहू और दीपेश टांक द्वारा संपत्ति खरीदने और वाशरी में निवेश करने के तथ्यों की जांच भी चालान में शामिल की गई है। प्रवर्तन निदेशालय के अनुसार, इस पूरे मामले में 570 करोड़ रुपये से अधिक की अवैध वसूली का अनुमान है।
नेताओं की मिलीभगत और वॉट्सएप चैट
चार्जशीट में कई नेताओं की सीधी संलिप्तता का उल्लेख किया गया है। विधायक देवेंद्र यादव और सूर्यकांत तिवारी के बीच हुई वॉट्सएप बातचीत के साक्ष्य अदालत में पेश किए गए हैं, जिसमें मुलाकातों और खैरागढ़ चुनाव का जिक्र है। पूर्व विधायक चंद्रदेव प्रसाद राय पर 46 लाख रुपये लेने का आरोप है। इसमें से 42 लाख रुपये उत्तर प्रदेश चुनाव में खर्च किए गए और चार लाख रुपये से पत्नी के लिए सोने का हार खरीदा गया।
कांग्रेस नेता विनोद तिवारी द्वारा 19 किश्तों में 1.87 करोड़ रुपये लेने के सबूत मिले हैं। वहीं, नेता आरपी सिंह ने पूछताछ के दौरान स्वीकार किया कि उन्होंने 2.01 करोड़ रुपये की राशि ली थी, जिसका इस्तेमाल पार्टी के लिए वाहनों और मीडिया प्रबंधन में किया गया था।
प्रशासनिक अधिकारियों की भूमिका और कार्रवाई
प्रवर्तन निदेशालय की रिपोर्ट पर ईओडब्ल्यू ने दो पूर्व मंत्रियों और विधायकों सहित 36 लोगों के खिलाफ नामजद प्राथमिकी दर्ज की है। मामले में तत्कालीन संचालक आईएएस समीर विश्नोई, आईएएस रानू साहू, पूर्व मुख्यमंत्री की उप सचिव सौम्या चौरसिया, जेडी माइनिंग एसएस नाग और कारोबारी सूर्यकांत तिवारी को गिरफ्तार किया गया है।
जांच में यह भी सामने आया कि आईपीएस पारूल माथुर, आईपीएस प्रशांत अग्रवाल और आईपीएस भोजराम पटेल जैसे पुलिस अधिकारी भी सिंडिकेट के संपर्क में थे। इन पर विभागीय सूचनाएं साझा करने और निर्देशों पर वाहनों पर कार्रवाई करने का आरोप है। इसके अलावा एक कांस्टेबल पर जांच एजेंसी के अधिकारियों की जासूसी करने का आरोप है। पूरे मामले में अन्य संदिग्धों की जांच जारी है।