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मुख्यमंत्री सुपोषण अभियान: पौष्टिक आहार से छत्तीसगढ़ में 1.41 लाख बच्चे हुए कुपोषण मुक्त, ढाई साल में 32 फीसदी घटे

Sat, 21 Aug 2021 02:45 PM IST
Harendra Chaudhary डिजिटल ब्यूरो, अमर उजाला, नई दिल्ली
डिजिटल ब्यूरो, अमर उजाला, नई दिल्ली Published by: Harendra Chaudhary Updated Sat, 21 Aug 2021 02:45 PM IST
सार

प्रदेश के नक्सल प्रभावित बस्तर सहित वनांचल की कुछ ग्राम पंचायतों में पायलट प्रोजेक्ट के रूप में सुपोषण अभियान की शुरुआत की गई। दंतेवाड़ा जिले में पंचायतों के माध्यम से गर्म पौष्टिक भोजन और धमतरी जिले में 'लइका जतन ठउर' जैसे नवाचार कार्यक्रमों के जरिए इसे आगे बढ़ाया गया...

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chhattisgarh: 1.41 lakh children in Chhattisgarh become malnutrition free due to nutritious diet
कुपोषित बच्चे - फोटो : अमर उजाला (फाइल फोटो)

विस्तार

छत्तीसगढ़ में कुपोषण के खिलाफ शुरू की गई जंग में एक बड़ी उपलब्धि हासिल हुई है। राज्य की कांग्रेस सरकार का दावा है कि प्रदेशव्यापी मुख्यमंत्री सुपोषण अभियान के शुरू होने के दो सालों में ही कुपोषित बच्चों की संख्या में 32 फीसदी की कमी देखी गई है। प्रदेश में जनवरी 2019 की स्थिति में चिन्हांकित कुपोषित बच्चों की संख्या 4 लाख 33 हजार 541 थी, इनमें से मई 2021 की स्थिति में लगभग एक तिहाई 32 फीसदी अर्थात एक लाख 40 हजार 556 बच्चे कुपोषण से मुक्त हो गए है। प्रदेश में सर्वाधिक कुपोषित बच्चों की संख्या नक्सल प्रभावित आदिवासी और वनांचल क्षेत्रों में थी। इन क्षेत्रों में कुपोषण दूर करने में मोरिंगा (मुनगा) या ड्रमस्टिक ने महत्वपूर्ण भूमिका निभाई है। मोरिंगा लीफ से कई तरह के पौष्टिक और स्वादिष्ट आहार बनाकर कुपोषित बच्चों और महिलाओं को शासन द्वारा दिए जा रहे हैं।

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राज्य में नई सरकार के गठन के बाद मुख्यमंत्री भुपेश बघेल ने राष्ट्रीय परिवार स्वास्थ्य सर्वेक्षण-4 के आंकड़ों में महिलाओं और बच्चों में कुपोषण और एनीमिया की दर को देखते हुए प्रदेश को कुपोषण और एनीमिया से मुक्त करने अभियान की शुरुआत की। राष्ट्रीय परिवार सर्वेक्षण-4 के अनुसार प्रदेश के 5 वर्ष से कम उम्र के 37.7 फीसदी बच्चे कुपोषण और 15 से 49 वर्ष की 47 फीसदी महिलाएं एनीमिया से पीड़ित थे। इन आंकड़ों को देखें तो कुपोषित बच्चों में से अधिकांश आदिवासी और दूरस्थ वनांचल इलाकों के बच्चे थे। राज्य सरकार ने इसे एक चुनौती के रूप में लिया और 'कुपोषण मुक्त छत्तीसगढ़' की संकल्पना के साथ महात्मा गांधी की 150वीं जयंती से पूरे प्रदेश में मुख्यमंत्री सुपोषण अभियान की शुरुआत की। अभियान को सफल बनाने के लिए इसमें जन समुदाय का भी सहयोग लिया गया।

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नक्सल प्रभावित क्षेत्रों से हुई शुरुआत

प्रदेश के नक्सल प्रभावित बस्तर सहित वनांचल की कुछ ग्राम पंचायतों में पायलट प्रोजेक्ट के रूप में सुपोषण अभियान की शुरुआत की गई। दंतेवाड़ा जिले में पंचायतों के माध्यम से गर्म पौष्टिक भोजन और धमतरी जिले में 'लइका जतन ठउर' जैसे नवाचार कार्यक्रमों के जरिए इसे आगे बढ़ाया गया। जिला खनिज न्यास निधि का एक बेहतर उपयोग कर सुपोषण अभियान के तहत गरम भोजन प्रदान करने की व्यवस्था की गई। योजना की सफलता को देखते हुए मुख्यमंत्री बघेल ने इसे पूरे प्रदेश में लागू किया। इस अभियान के तहत चिन्हांकित बच्चों को आंगनवाड़ी केन्द्र में दिए जाने वाले पूरक पोषण आहार के अतिरिक्त स्थानीय स्तर पर निशुल्क पौष्टिक आहार और कुपोषित महिलाओं और बच्चों को गर्म पौष्टिक भोजन की व्यवस्था की गई है।

बच्चों को दिए जा रहे है ये स्वादिष्ट आहार

अतिरिक्त पोषण आहार में गर्म भोजन के साथ अंडा, लड्डू, चना, गुड़, अंकुरित अनाज, दूध, फल, मूंगफली और गुड़ की चिक्की, सोया बड़ी, दलिया, सोया चिक्की और मुनगा भाजी से बने पौष्टिक और स्वादिष्ट आहार दिये जा रहे हैं। इससे बच्चों में खाने के प्रति रूचि जागृत हुई है। स्थानीय स्तर पर उपलब्ध सब्जियों और पौष्टिक चीजों के प्रति भी जागरूकता बढ़ी है। इससे पोषण स्तर में सुधार आना शुरू हो गया है। स्वास्थ विभाग के सहयोग से एनीमिया प्रभावितों को आयरन फोलिक एसिड, कृमिनाशक गोली दी जाती है। प्रदेश को आगामी तीन वर्षों में कुपोषण से मुक्त करने के लक्ष्य के साथ महिला एवं बाल विकास विभाग, स्वास्थ्य विभाग सहित अन्य विभागों द्वारा समन्वित प्रयास लगातार किये जा रहे हैं।

कोरोना काल में भी बच्चों और महिलाओं को मिला पोषक आहार  

कोरोना वायरस संकट के समय में सभी आंगनबाड़ी और मिनी आंगनबाड़ी केंद्रों के बंद होने के बावजूद भी बच्चों और महिलाओं के पोषण स्तर को बनाए रखने के लिए आंगनबाड़ी कार्यकर्ताओं और सहायिकाओं के माध्यम से प्रदेश के 51 हजार 455 आंगनबाड़ी केंद्रों के लगभग 28 लाख 78 हजार हितग्राहियों को घर-घर जाकर रेडी-टू-ईट पोषक आहार का वितरण सुनिश्चित कराया गया। पूरक पोषण आहार कार्यक्रम के तहत 6 माह से 6 वर्ष तक के बच्चों, गर्भवती, शिशुवती महिलाओं और किशोरी बालिकाओं को रेडी-टू-ईट भोजन का वितरण किया जा रहा है। कुपोषण पर मिल रही विजय को बनाए रखने और कोरोना का असर बच्चों के स्वास्थ्य पर न हो इसे देखते हुए प्रदेश में संक्रमण मुक्त स्थानों पर जनप्रतिनिधियों और पालकों की सहमति से आंगनबाड़ी को खोला गया है। जहां सुरक्षा के प्रबंध के साथ फिर से मुख्यमंत्री सुपोषण अभियान के अंतर्गत हितग्राहियों को गर्म भोजन देने की व्यवस्था की गई है।

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