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सीजीपीएससी घोटाला केस: आरती वासनिक को सुप्रीम कोर्ट से राहत, ललित गनवीर भी जमानत पर होंगे रिहा
Tue, 01 Sep 2026 04:29 PM IST
अमन कोशले
अमर उजाला नेटवर्क, रायपुर
अमर उजाला नेटवर्क, रायपुर
Published by: अमन कोशले
Updated Tue, 01 Sep 2026 04:29 PM IST
सार
छत्तीसगढ़ लोक सेवा आयोग (सीजीपीएससी) भर्ती घोटाले से जुड़े मामले में सुप्रीम कोर्ट ने तत्कालीन परीक्षा नियंत्रक आरती वासनिक को बड़ी राहत दी है।
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सुप्रीम कोर्ट
- फोटो : अमर उजाला
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विस्तार
छत्तीसगढ़ लोक सेवा आयोग (सीजीपीएससी) भर्ती घोटाले से जुड़े मामले में सुप्रीम कोर्ट ने तत्कालीन परीक्षा नियंत्रक आरती वासनिक को बड़ी राहत दी है। अदालत ने मामले में गिरफ्तार आरती वासनिक और पूर्व उप परीक्षा नियंत्रक ललित गनवीर को नियमित जमानत पर रिहा करने का आदेश दिया है। दोनों लंबे समय से न्यायिक हिरासत में थे। मामले की सुनवाई न्यायमूर्ति एम.एम. सुंदरेश और न्यायमूर्ति प्रसन्ना बी. वराले की पीठ ने की। दोनों पक्षों की दलीलें सुनने के बाद अदालत ने जमानत देने का फैसला किया।
सुप्रीम कोर्ट में आरती वासनिक की ओर से वरिष्ठ अधिवक्ता पी.बी. मुरेश के साथ अधिवक्ता हर्षवर्धन परगनिहा ने पक्ष रखा। बचाव पक्ष ने अदालत को बताया कि आरती वासनिक एक वर्ष से अधिक समय से जेल में हैं और इस मामले में जांच एजेंसी चार्जशीट भी दाखिल कर चुकी है। दलील के दौरान यह भी बताया गया कि मामले में 100 से अधिक गवाहों के बयान दर्ज किए जाने हैं। ऐसे में मुकदमे की प्रक्रिया पूरी होने में लंबा समय लग सकता है। बचाव पक्ष ने कहा कि सुनवाई में देरी आरती वासनिक की वजह से नहीं, बल्कि अभियोजन स्वीकृति से जुड़ी प्रक्रिया के कारण हो रही है।
सीधी भूमिका का आरोप नहीं होने का तर्क
बचाव पक्ष ने अदालत के सामने यह भी कहा कि केंद्रीय जांच ब्यूरो (सीबीआई) की ओर से आरती वासनिक की घोटाले में किसी प्रत्यक्ष भूमिका का आरोप नहीं लगाया गया है। साथ ही कथित रूप से लाभ पाने वाले अभ्यर्थियों की नियुक्तियों पर फिलहाल रोक होने की बात भी अदालत के संज्ञान में लाई गई। इन दलीलों और मामले की परिस्थितियों पर विचार करने के बाद सुप्रीम कोर्ट ने दोनों आरोपियों को नियमित जमानत देने का आदेश जारी किया। आदेश के बाद आरती वासनिक और ललित गनवीर के जेल से बाहर आने का रास्ता साफ हो गया है।
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सीजीपीएससी घोटाला वर्ष 2020 से 2022 के बीच हुई भर्ती परीक्षाओं और साक्षात्कारों में कथित अनियमितताओं से संबंधित है। आरोपों में प्रभावशाली लोगों से जुड़े अभ्यर्थियों को लाभ पहुंचाने और चयन प्रक्रिया में गड़बड़ी किए जाने की बात सामने आई थी। मामले की जांच छत्तीसगढ़ सरकार के अनुरोध पर सीबीआई को सौंपी गई थी। जांच के दौरान एजेंसी ने कई स्थानों पर कार्रवाई की और दस्तावेज बरामद किए। मामले में सीजीपीएससी के पूर्व अध्यक्ष टामन सिंह सोनवानी, ललित गनवीर समेत कई लोगों के खिलाफ कार्रवाई की जा चुकी है।
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सुप्रीम कोर्ट में आरती वासनिक की ओर से वरिष्ठ अधिवक्ता पी.बी. मुरेश के साथ अधिवक्ता हर्षवर्धन परगनिहा ने पक्ष रखा। बचाव पक्ष ने अदालत को बताया कि आरती वासनिक एक वर्ष से अधिक समय से जेल में हैं और इस मामले में जांच एजेंसी चार्जशीट भी दाखिल कर चुकी है। दलील के दौरान यह भी बताया गया कि मामले में 100 से अधिक गवाहों के बयान दर्ज किए जाने हैं। ऐसे में मुकदमे की प्रक्रिया पूरी होने में लंबा समय लग सकता है। बचाव पक्ष ने कहा कि सुनवाई में देरी आरती वासनिक की वजह से नहीं, बल्कि अभियोजन स्वीकृति से जुड़ी प्रक्रिया के कारण हो रही है।
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सीधी भूमिका का आरोप नहीं होने का तर्क
बचाव पक्ष ने अदालत के सामने यह भी कहा कि केंद्रीय जांच ब्यूरो (सीबीआई) की ओर से आरती वासनिक की घोटाले में किसी प्रत्यक्ष भूमिका का आरोप नहीं लगाया गया है। साथ ही कथित रूप से लाभ पाने वाले अभ्यर्थियों की नियुक्तियों पर फिलहाल रोक होने की बात भी अदालत के संज्ञान में लाई गई। इन दलीलों और मामले की परिस्थितियों पर विचार करने के बाद सुप्रीम कोर्ट ने दोनों आरोपियों को नियमित जमानत देने का आदेश जारी किया। आदेश के बाद आरती वासनिक और ललित गनवीर के जेल से बाहर आने का रास्ता साफ हो गया है।
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सीजीपीएससी घोटाला वर्ष 2020 से 2022 के बीच हुई भर्ती परीक्षाओं और साक्षात्कारों में कथित अनियमितताओं से संबंधित है। आरोपों में प्रभावशाली लोगों से जुड़े अभ्यर्थियों को लाभ पहुंचाने और चयन प्रक्रिया में गड़बड़ी किए जाने की बात सामने आई थी। मामले की जांच छत्तीसगढ़ सरकार के अनुरोध पर सीबीआई को सौंपी गई थी। जांच के दौरान एजेंसी ने कई स्थानों पर कार्रवाई की और दस्तावेज बरामद किए। मामले में सीजीपीएससी के पूर्व अध्यक्ष टामन सिंह सोनवानी, ललित गनवीर समेत कई लोगों के खिलाफ कार्रवाई की जा चुकी है।