CG: पूर्व गृहमंत्री को लेकर कांग्रेस का तंज; साय सरकार में प्रशासनिक अराजकता हावी, बगावत पर उतारू बीजेपी नेता
CG Congress taunts on BJP: छत्तीसगढ़ के पूर्व गृहमंत्री रह चुके बीजेपी के सीनियर नेता ननकीराम कंवर के रायपुर में धरने देने की चेतावनी पर कांग्रेस ने तंज कसा है।
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CG Congress taunts on BJP: छत्तीसगढ़ के पूर्व गृहमंत्री रह चुके बीजेपी के सीनियर नेता ननकीराम कंवर के रायपुर में धरने देने की चेतावनी पर कांग्रेस ने तंज कसा है। कांग्रेस ने निशाना साधते हुए कहा कि पूर्व गृहमंत्री के सीएम हाउस रायपुर के सामने धरने पर बैठने की घोषणा करने से ये साफ जाहिर है कि साय सरकार जनसरोकार दूर है। प्रदेश कांग्रेस अध्यक्ष ने कहा कि ननकीराम भाजपा के वरिष्ठतम नेताओं में एक हैं, उनको अपनी मांग मनवाने के लिए मुख्यमंत्री निवास के सामने धरना देने की घोषणा करना पड़ रहा है। ऐसे में कल्पना कर सकते हैं कि आम आदमी का क्या हाल होगा।
प्रदेश कांग्रेस अध्यक्ष दीपक बैज ने कहा कि ननकीराम ने जिन मुद्दों को उठाया है वे राज्य की जमीनी हकीकत है। मुख्यमंत्री और उपमुख्यमंत्री ने उनके पत्र के मुद्दों को संज्ञान लिया था फिर अभी तक कार्यवाही क्यों नहीं हुई? कंवर अकेले नहीं है साय सरकार की कार्यप्रणाली से कोई भी भाजपा का नेता कार्यकर्ता खुश नहीं है दलीय प्रतिबद्धता के कारण सबकी जुबान बंद है।
उन्होंने कहा कि भाजपा राज में प्रशासनिक अराजकता हावी है। कंवर ने अपने पत्र में सिल-सिलेवार बताया है कि किस प्रकार से प्रशासनिक अधिकारी भाजपा के कार्यकर्ताओं और पत्रकारों को प्रताड़ित कर रहे हैं। जब भाजपा के कार्यकर्ताओं का यह हाल है तो आम आदमी के साथ यह अधिकारी कैसा सलूक करते होगें, इसकी कल्पना कर सकते हैं। कंवर का आरोप है कि कलेक्टर डीएमएफ फंड का दुरुपयोग कर रहे व्यक्तिगत लाभ ले रहे हैं। वरिष्ठ नेता की ओर से सीएम साय को पत्र लिखना और उसका निराकरण न होना बताता है कि प्रशासनिक अराजकता को सरकार का संरक्षण है।
प्रदेश कांग्रेस अध्यक्ष ने कहा कि कंवर ने तो केवल एक जिले के कलेक्टर के बारे में पत्र में लिखा है। पूरे प्रदेश में यही हालात है। कंवर के पहले भाजयुमो के पूर्व अध्यक्ष आदिवासी नेता रवि भगत ने भी बेलगाम नौकरशाही और मंत्री के मनमानी को उजागर किया था। सरकार की कमजोर पकड़ के कारण प्रशासनिक तंत्र बेलगाम हो गया है। पिछले एक साल में राज्य में काम करने की संस्कृति खत्म हो गई है। आम आदमी अपने रोजमर्रा के कार्यों के लिये सरकारी दफ्तरों के चक्कर काटने को मजबूर है, किसी की कही सुनवाई नहीं हो रही है।