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आंगनबाड़ी केंद्र में बनेगा जाति प्रमाणपत्र: बालोद में नहीं लगाने होंगे दफ्तरों के चक्कर, कलेक्टर ने की शुरुआत

Mon, 23 Jan 2023 04:16 PM IST
मोहनीश श्रीवास्तव न्यूज डेस्क, अमर उजाला, बालोद
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, बालोद Published by: मोहनीश श्रीवास्तव Updated Mon, 23 Jan 2023 04:16 PM IST
सार

कलेक्टर कुलदीप शर्मा ने बताया कि जाति प्रमाण पत्र की मान्यता लाइफटाइम के लिए होगी। यह एक तरह से स्थाई रिकॉर्ड है। बार-बार जाति प्रमाण जारी किए जाने की आवश्यकता नहीं है। जाति प्रमाण पत्र खो जाने पर अधिकारी इसका डुप्लीकेट भी जारी करेंगे।

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caste certificate will now be made in anganwadi centers in balod
बालोद के स्कूल में जाति प्रमाण पत्र बनने का निरीक्षण करते कलेक्टर। - फोटो : संवाद न्यूज एजेंसी

विस्तार

छत्तीसगढ़ के बालोद में अब लोगों को जाति प्रमाण पत्र के लिए दफ्तरों और तहसीलों के चक्कर नहीं लगाने होंगे। जिला प्रशासन की ओर से आंगनबाड़ी केंद्रों में ही प्रमाणपत्र बनवाने की व्यवस्था कर दी गई है। इसकी शुरुआत सोमवार को कलेक्टर कुलदीप शर्मा ने की। उन्होंने कहा कि, अब छोटे बच्चों के परिजनों से लेकर छात्र-छात्राओं को भटकना नहीं पड़ेगा। उन्होंने सभी बच्चों का प्रमाण पत्र बनाने के निर्देश दिए हैं। 

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एक से पांचवीं तक के बच्चों के बनाए जा रहे प्रमाणपत्र
दरअसल, राज्य सरकार की ओर से सभी स्कूलों के बच्चों के शत-प्रतिशत जाति प्रमाण पत्र बनवाने के निर्देश दिए गए हैं। इसी के तहत सोमवार को बालोद विकासखंड के ग्राम टेकापार में कलेक्टर ने इसकी शुरुआत की। उन्होंने वहां पहुंचकर जाति प्रमाण पत्र बनाए जाने की स्थिति का जायजा लिया और ग्रामीणों से भी बात की। कलेक्टर ने बताया कि जिले में कक्षा एक से पांचवीं तक बच्चों का प्रमाण पत्र बनाने का काम जारी है। 
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हर बच्चे को मिले प्रमाण पत्र 
राजस्व और शिक्षा विभाग के अधिकारी और कर्मचारी रोस्टर निर्धारित कर विभिन्न स्कूलों में शिविर आयोजित कर रहे हैं। इस दौरान कलेक्टर टेकापार स्कूल परिसर में लगाए गए शिविर में पहुंचे। उन्होंने अब तक प्राप्त कुल आवेदन और जारी किए गए जाति प्रमाण पत्र के संबंध में जानकारी ली। अधिकारियों को निर्देश दिए कि आप सभी यह सुनिश्चित करें कोई भी बच्चा प्रमाण पत्र से वंचित न रह जाए। 
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सरपंचों और जन प्रतिनिधियों से लिया फीडबैक
कलेक्टर ने सरपंचों और जनप्रतिनिधियों से प्रमाण पत्र बनाए जाने के संबंध में फीडबैक भी लिया। ग्रामीणों ने बताया कि पहले उन्हें अपने बच्चों के जाति प्रमाण पत्र बनाने के लिए तहसील कार्यालयों का चक्कर लगाना पड़ता था। इसके अलावा बहुत समय भी लगता था, लेकिन उनके गांव के स्कूलों में शिविर लगाकर जाति प्रमाण पत्र प्रदान किया जा रहा है। इससे उनको काफी मदद मिली है और फायदा हुआ है। 

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