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छत्तीसगढ़: भरण-पोषण केस में हाईकोर्ट का बड़ा फैसला, पति को पत्नी की आय पर सवाल पूछने का अधिकार
Wed, 02 Sep 2026 12:36 PM IST
अमर उजाला ब्यूरो
अमर उजाला नेटवर्क, बिलासपुर
अमर उजाला नेटवर्क, बिलासपुर
Published by: अमर उजाला ब्यूरो
Updated Wed, 02 Sep 2026 12:36 PM IST
सार
कोर्ट ने कहा है कि दोनों पक्षों को एक-दूसरे की आय और संपत्ति से संबंधित शपथ पत्र पर जिरह यानी क्रॉस एग्जामिनेशन करने का पूरा अधिकार है। अदालत के इस फैसले से अब भरण-पोषण के मामलों में आय और संपत्ति की वास्तविक स्थिति सामने लाने में मदद मिलेगी।
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गुजारा भत्ता मामले में hc का अहम आदेश
विस्तार
छत्तीसगढ़ हाईकोर्ट ने भरण-पोषण से जुड़े मामलों में एक अहम फैसला सुनाते हुए पति-पत्नी के अधिकारों को लेकर स्थिति स्पष्ट कर दी है। कोर्ट ने कहा है कि दोनों पक्षों को एक-दूसरे की आय और संपत्ति से संबंधित शपथ पत्र पर जिरह यानी क्रॉस एग्जामिनेशन करने का पूरा अधिकार है। अदालत के इस फैसले से अब भरण-पोषण के मामलों में आय और संपत्ति की वास्तविक स्थिति सामने लाने में मदद मिलेगी।
मामला रायपुर निवासी एक महिला से जुड़ा है, जिसने अपने पति के खिलाफ दुर्ग फैमिली कोर्ट में भरण-पोषण के लिए आवेदन प्रस्तुत किया था। सुनवाई के दौरान महिला ने अपनी आय और संपत्ति से संबंधित जानकारी शपथ पत्र के जरिए अदालत में पेश की।
इसी शपथ पत्र में दर्ज आय और संपत्ति के विवरण को लेकर पति की ओर से सवाल पूछे जा रहे थे। हालांकि, 3 अगस्त को दुर्ग फैमिली कोर्ट ने आय और संपत्ति से जुड़े बिंदुओं पर जिरह करने से पति को रोक दिया। पति ने इस आदेश को हाईकोर्ट में चुनौती देते हुए कहा कि यदि उसे शपथ पत्र में दी गई जानकारी पर सवाल करने का अवसर नहीं दिया गया, तो वह प्रभावी ढंग से अपना पक्ष नहीं रख पाएगा।
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मामले की सुनवाई के बाद हाईकोर्ट की सिंगल बेंच ने फैमिली कोर्ट के आदेश को निरस्त कर दिया। कोर्ट ने माना कि किसी पक्ष द्वारा आय और संपत्ति का शपथ पत्र प्रस्तुत किए जाने के बाद दूसरे पक्ष को उसकी सत्यता और विवरण पर जिरह करने का अवसर मिलना चाहिए।
हाईकोर्ट ने दुर्ग फैमिली कोर्ट को निर्देश दिया है कि आगामी 11 सितंबर की सुनवाई में पति को जिरह की अनुमति दी जाए। इस फैसले को भरण-पोषण से जुड़े मामलों में निष्पक्ष सुनवाई और दोनों पक्षों को अपना पक्ष रखने का महत्वपूर्ण अवसर देने की दिशा में अहम माना जा रहा है।
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मामला रायपुर निवासी एक महिला से जुड़ा है, जिसने अपने पति के खिलाफ दुर्ग फैमिली कोर्ट में भरण-पोषण के लिए आवेदन प्रस्तुत किया था। सुनवाई के दौरान महिला ने अपनी आय और संपत्ति से संबंधित जानकारी शपथ पत्र के जरिए अदालत में पेश की।
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इसी शपथ पत्र में दर्ज आय और संपत्ति के विवरण को लेकर पति की ओर से सवाल पूछे जा रहे थे। हालांकि, 3 अगस्त को दुर्ग फैमिली कोर्ट ने आय और संपत्ति से जुड़े बिंदुओं पर जिरह करने से पति को रोक दिया। पति ने इस आदेश को हाईकोर्ट में चुनौती देते हुए कहा कि यदि उसे शपथ पत्र में दी गई जानकारी पर सवाल करने का अवसर नहीं दिया गया, तो वह प्रभावी ढंग से अपना पक्ष नहीं रख पाएगा।
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मामले की सुनवाई के बाद हाईकोर्ट की सिंगल बेंच ने फैमिली कोर्ट के आदेश को निरस्त कर दिया। कोर्ट ने माना कि किसी पक्ष द्वारा आय और संपत्ति का शपथ पत्र प्रस्तुत किए जाने के बाद दूसरे पक्ष को उसकी सत्यता और विवरण पर जिरह करने का अवसर मिलना चाहिए।
हाईकोर्ट ने दुर्ग फैमिली कोर्ट को निर्देश दिया है कि आगामी 11 सितंबर की सुनवाई में पति को जिरह की अनुमति दी जाए। इस फैसले को भरण-पोषण से जुड़े मामलों में निष्पक्ष सुनवाई और दोनों पक्षों को अपना पक्ष रखने का महत्वपूर्ण अवसर देने की दिशा में अहम माना जा रहा है।