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पितृत्व का अधिकार निजता से बड़ा: सुप्रीम कोर्ट ने डीएनए टेस्ट को माना वाजिब हक, जानें पूरा मामला
Sun, 31 May 2026 05:27 PM IST
Digvijay Singh
अमर उजाला नेटवर्क, बिलासपुर
अमर उजाला नेटवर्क, बिलासपुर
Published by: Digvijay Singh
Updated Sun, 31 May 2026 05:27 PM IST
सार
सुप्रीम कोर्ट ने एक अहम आदेश जारी करते हुए कहा है कि किसी व्यक्ति के प्राइवेसी का अधिकार उसके बच्चे के पितृत्व जानने से बड़ा नहीं हो सकता । यह कहते हुए सुप्रीम कोर्ट ने याचिका खारिज कर दी है।
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सुप्रीम कोर्ट
- फोटो : एएनआई
विस्तार
सुप्रीम कोर्ट ने एक अहम आदेश जारी करते हुए कहा है कि किसी व्यक्ति के प्राइवेसी का अधिकार उसके बच्चे के पितृत्व जानने से बड़ा नहीं हो सकता । यह कहते हुए सुप्रीम कोर्ट ने याचिका खारिज कर दी है। याचिकाकर्ता ने अपनी याचिका में डीएनए टेस्ट कराने की मांग के विरुद्ध छत्तीसगढ़ हाईकोर्ट और निचली अदालत के निर्णय को चुनौती दी थी ।
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सुप्रीम कोर्ट ने मामले में। निर्णय सुनाते हुए बेटे के पक्ष में निर्णय दिया है और डीएनए टेस्ट को वाजिब हक माना है। उच्चतम न्यायालय ने कहा डीएनए की मांग पर अगर कोई स्पष्ट जवाब नहीं मिला तो याचिकाकर्ता का बेटा हमेशा के लिए उन अधिकारों से वंचित रह सकता है जो एक बेटे के रूप में उसे मिलना चाहिए। बेटा अमर प्रधान की मां का दावा है कि जनवरी 1999 में चतुर्भुज प्रधान के साथ संबंध था,इसी से अमर का जन्म हुआ।
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बेटे ने हमेशा इस रिश्ते से इनकार किया और दुष्कर्म के केस में बरी होने का हवाला दिया। बेटे अमर ने बालिक होने के बाद सिविल कोर्ट में मुकदमा पेश कर मांग की कि उसे चतुर्भुज का बेटा घोषित कर संपत्ति में हिस्सा दिया जाय । इसी मुकदमे के दौरान कोर्ट ने सच सामने लाने के लिए डीएनए टेस्ट का आदेश दिया था,जिसे हाईकोर्ट ने बरकरार रखा था। याचिकाकर्ता चतुर्भुज ने इसे सुप्रीम कोर्ट में चुनौती दी थी।
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आपको बता दें कि डीएनए टेस्ट के मामले में एनडी तिवारी के मामले में सुप्रीम कोर्ट का फैसला अहम माना जाता है। एनडी तिवारी ने इस मामले में निजता के उल्लंघन का हवाला देते हुए बेटे रोहित शेखर तिवारी की याचिका को गलत बताया था । बाद में रोहित शेखर तिवारी के हक में निर्णय आया और एनडी तिवारी ने रोहित शेखर को सार्वजनिक रूप से संतान स्वीकार किया।