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President in Bilaspur: राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू बोलीं- भारत के 'हाई साइंस एट लो कॉस्ट' की दुनिया में तारीफ
Fri, 01 Sep 2023 06:26 PM IST
अनुज कुमार
अमर उजाला नेटवर्क, बिलासपुर
अमर उजाला नेटवर्क, बिलासपुर
Published by: अनुज कुमार
Updated Fri, 01 Sep 2023 06:26 PM IST
सार
राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू ने कहा कि समानता के आदर्शों पर चलकर ही युवा सुख के रास्ते पर बढ़ सकते हैं। श्रेष्ठ समाज का निर्माण आगे और कर सकते हैं। मैं आशा करती हूं कि ऐसे कार्यों के अच्छे परिणाम सामने आए।
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राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू और सीएम भूपेश बघेल
- फोटो : अमर उजाला
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विस्तार
गुरुघासीदास सेंट्रल यूनिवर्सिटी में राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू ने आज अपने उद्बोधन के दौरान उपाधियां प्राप्त करने वाले सभी विद्यार्थियों को बधाई दी। उन्होंने उपाधी प्राप्त करने वाले छात्रों के माता-पिता को भी बधाई दी। उन्होंने विद्यार्थियों की सफलता में योगदान देने वाले प्राध्यापकों और विश्वविद्यालय टीम के सदस्यों की सराहना की।
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राष्ट्रपति ने कहा कि मुझे यह देखकर बहुत प्रसन्नता हुई है कि स्वर्ण पदक प्राप्त करने वाले 76 प्रतिशत विद्यार्थियों में छात्राओं की संख्या 45 है, जो लगभग 60 फीसदी है। विश्वविद्यालय में विद्यार्थियों में भी छात्राओं की संख्या लगभग 47 फीसदी है। उन्होंने कहा कि छात्राओं के बेहतर प्रदर्शन के पीछे उनकी अपनी प्रतिभा लगन के साथ-साथ उनके परिवार जनों के साथ ही विश्वविद्यालय की टीम का योगदान भी है।
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उन्होंने कहा कि हमारे देश की कुल आबादी में महिलाओं की संख्या लगभग आधी है। मुझे बताया गया है कि इस विश्वविद्यालय द्वारा विद्यार्थियों की भागीदारी के साथ समाज सेवा के कार्य भी किए जाते हैं। मैं आशा करती हूं कि ऐसे कार्यों के अच्छे परिणाम सामने आए। राष्ट्रपति ने कहा कि शिक्षा के माध्यम से महिला सशक्तिकरण में अधिक योगदान होना चाहिए। हमारे देश के कुल आबादी में महिलाओं की आबादी आधी है। विश्वविद्यालय द्वारा विद्यार्थियों की भागीदारी के साथ समाज सेवा के कार्य भी किये जा रहे हैं, ये अच्छी बात है।
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उन्होंने अपने उद्बोधन के दौरान कहा कि विश्वविद्यालय के आसपास के क्षेत्र में आदिवासी समुदाय काफी है। राज्य की एक तिहाई आबादी जनजातीय है। जनजातीय समुदाय के प्रति संवेदनशीलता और महिलाओं की भागीदारी जैसे विषय बहुत महत्वपूर्ण है। विश्वविद्यालय द्वारा इस संबंध में अच्छा कार्य किया जा रहा है। जो देश विज्ञानऔर प्रौद्योगिकी को अपनाने में आगे रहेंगे, वे ज्यादा तरक्की करेंगे। इस विश्वविद्यालय में आधुनिक प्रयोगशालाएं स्थापित की जा रही है। मैं आशा करती हूं कि उपयोगी अनुसंधान के माध्यम से अपनी पहचान विश्वविद्यालय दुनिया में स्थापित करें।
राष्ट्रपति ने कहा कि भारत ने अपना चंद्रयान-3 चांद पर भेजा है। बरसों से निष्ठा से इस पर काम होता रहा। मार्ग में आने वाली रूकावटों की परवाह न करते हुए हम सब आगे बढ़ते रहें। यही जीवन में भी होता है। तात्कालिक असफलताओं से हताश नहीं होना चाहिए। आज भारत अपने वैज्ञानिकों और इंजीनियरों के प्रतिभा के बल पर स्पेस क्लब और न्यूक्लियर के क्षेत्र में प्रमुख स्थान बना चुका है। हमने कम लागत में यह कार्य किया है, जिसे दुनिया में सराहा गया।
कभी-कभी इन क्षेत्रों में भारत को दुनिया में असहयोग का सामना करना पड़ा। लेकिन भारत पीछे नहीं हटा और अपना लक्ष्य प्राप्त किया। चुनौतियां हमारे जीवन में आती हैं। लेकिन यह नये मौके भी लाती है। हमारे देश की परंपराएं अत्यंत समृद्ध है और इन्हें बचाये रखने में अनेक विभूतियों की मेहनत है। इस विश्वविद्यालय का महत्व इसलिए भी है क्योंकि यहां गुरु घासीदास जी का नाम है। उन्होंने मनखे मनखे एक समान का संदेश दिया।
गुरु घासीदास ने सबकी समानता पर काम किया। समानता के आदर्शों पर चलकर ही युवा सुख के रास्ते पर चल सकते हैं और श्रेष्ठ समाज का निर्माण कर सकते हैं। रायपुर का हवाई अड्डा स्वामी विवेकानंद के नाम पर है। वे स्वाध्याय, खेलकूद को भी महत्व देते थे। स्वामी जी आत्मविश्वास की मूर्ति थे। स्वामी जी ने शिकागो में भारतीय संस्कृति की श्रेष्ठता का विश्वघोष किया था। उस समय भारत में गुलामी की मानसिकता अपने चरम पर थी। एशिया के लोग हीनता की भावना से ग्रस्त थे। ऐसे वातावरण में विवेकानंद ने भारत का नाम बढ़ाया।
राष्ट्रपति ने कहा कि विश्व समुदाय के अग्रणी राष्ट्र में भारत की गणना होती है। स्वामी विवेकानंद के अद्भुत उदाहरण से प्रेरणा लेकर हमे युवा पीढ़ी को आगे बढ़ाना है। आज हमारा तिरंगा चांद पर पहुंच चुका है। चांद की सतह पर हमने शिवशक्ति की ऊर्जा पहुंचाई है। इस ऐतिहासिक उपलब्धि के विषय पर विश्वविद्यालय को कुछ आयोजन करने चाहिए ताकि समाज में साइंटिफिक टेंपर का विकास होता रहे। यह हमारे संविधान के मूल कर्तव्यों में शामिल है। उन्होंने कहा कि हमारा देश अमृत काल में है। युवा संविधान में उल्लेखित मूल कर्तव्यों का पालन करेंगे तो समग्र विकास को जरूर गति मिलेगी।