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Chhattisgarh News: रायपुर में जेम्स एंड ज्वेलरी पार्क के निर्माण का रास्ता साफ, हाईकोर्ट ने खारिज की याचिका
Tue, 27 Jun 2023 08:09 PM IST
मोहनीश श्रीवास्तव
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, बिलासपुर
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, बिलासपुर
Published by: मोहनीश श्रीवास्तव
Updated Tue, 27 Jun 2023 08:09 PM IST
सार
साल 2020 से दायर याचिका पर सुनवाई के बाद हाईकोर्ट की डिवीजन बेंच ने मामले की अंतिम सुनवाई तक किसी भी प्रकार के निर्माण कार्य पर रोक लगा दी थी, तब से प्रकरण में स्थगन आदेश लागू था।
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छत्तीसगढ़ हाईकोर्ट
- फोटो : Social media
विस्तार
छत्तीसगढ़ की राजधानी रायपुर में बनने वाले जेम्स एंड ज्वेलरी पार्क के निर्माण का रास्ता साफ हो गया है। हाईकोर्ट ने इस पर लगी रोक हटा दी है। पार्क के खिलाफ दायर हुई याचिका पर सुनवाई करते हुए कोर्ट ने इसे मंगलवार को निराधार बताते हुए खारिज कर दिया। इसके बाद शासन की औद्यौगिक नीति के तहत पांडतराई में कृषि उपज मंडी की जमीन पर इसका निर्माण कराया जा सकेगा।
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धरसींवा के पूर्व विधायक और कृषि उपज मंडी समिति रायपुर के पूर्व अध्यक्ष देवजीभाई पटेल ने अधिवक्ता किशोर श्रीवास्तव, आशुतोष पांडेय, हिमांशु सिन्हा, शशांक ठाकुर और एवी श्रीधर के जरिए हाईकोर्ट में जनहित याचिका दायर की थी। इसमें कृषि उपज मंडी रायपुर में सर्वसुविधायुक्त जेम्स एंड ज्वेलरी पार्क की स्थापना के लिए आवंटित भूमि 11 जून 2020 के आदेश को विधि विरुद्ध बताया गया था। कोर्ट ने मामले की सुनवाई के बाद इस पार्क के निर्माण पर रोक लगा दी थी।
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भूमि स्वामी हक कृषि उपज मंडी को
याचिका में कहा गया था कि मंडी समिति की जमीन 1975 में किसानों ने खरीदी थी। उसका भूमि स्वामी हक कृषि उपज मंडी रायपुर को प्राप्त है। याचिका के अनुसार कृषि उपज मंडी अधिनियम के तहत समिति की जमीन सिर्फ मंडी के प्रयोजन के लिए ही उपयोग में लाई जा सकती है। किसी अन्य प्रयोजन में उपयोग नहीं हो सकती। याचिका के अनुसार 11 जून 2020 को एक ही दिन में राज्य शासन ने 5 से 6 एजेंसियों को निर्देशित करते हुए कृषि उपज मंडी अधिनियम के विपरीत पार्क के लिए भूमि आवंटित कर दी।
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मुख्य सचिव की अध्यक्षता में शाम 6 बजे विभागीय अधिकारियों की बैठक कर मंडी समिति की जमीन लेने का निर्णय लिया गया। उसी दिन रात में 8 बजे के बाद मंडी बोर्ड, सीएसआईडीसी, मंडी समिति रायपुर, राजस्व सचिव, संचालक उद्योग और कलेक्टर रायपुर को जमीन अधिग्रहण के निर्देश जारी किए गए। सभी ने रात में ही पत्राचार करते हुए भूमि अधिग्रहण का आदेश जारी किया था। साथ ही रात में ही भूमि को उद्योग विभाग को कब्जा दे दिया गया।
हाईकोर्ट ने लगाई थी रोक
साल 2020 से दायर याचिका पर सुनवाई के बाद हाईकोर्ट की डिवीजन बेंच ने मामले की अंतिम सुनवाई तक किसी भी प्रकार के निर्माण कार्य पर रोक लगा दी थी, तब से प्रकरण में स्थगन आदेश लागू रहा। मंगलवार को प्रकरण की सुनवाई के दौरान राज्य शासन की तरफ से महाधिवक्ता सतीशचंद वर्मा, विक्रम वर्मा ने पैरवी की। महाधिवक्ता सतीश चंद्र वर्मा ने कहा कि विधि के अनुरूप आदेश पारित किया गया है। दोनों पक्षों को सुनने के बाद कोर्ट ने याचिका खारिज कर दी।