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छत्तीसगढ़ हाईकोर्ट का फैसला: पति को काला या मोटा कहना तलाक का आधार नहीं, याचिका खारिज, लौटाना होगा स्त्रीधन

Thu, 24 Sep 2026 10:42 PM IST
प्रिया वर्मा न्यूज डेस्क, अमर उजाला, बिलासपुर
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, बिलासपुर Published by: प्रिया वर्मा Updated Thu, 24 Sep 2026 10:42 PM IST
सार

पत्नी द्वारा पति को सांवला या मोटा कहना तलाक देने के लिए पर्याप्त आधार नहीं है। छत्तीसगढ़ हाईकोर्ट ने पति की तलाक याचिका खारिज करते फैमिली कोर्ट का फैसला बरकरार रखा और स्त्रीधन लौटाने के निर्देश दिए।

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Chhattisgarh HC: Calling Husband Dark or Fat Not Grounds for Divorce, Plea Rejected; Streedhan to Be Returned
छत्तीसगढ़ हाईकोर्ट - फोटो : अमर उजाला

विस्तार

छत्तीसगढ़ हाईकोर्ट ने पति की तलाक याचिका खारिज करते हुए कहा है कि पत्नी द्वारा पति को सांवला या मोटा कहे जाने का आरोप अपने आप में तलाक देने के लिए पर्याप्त आधार नहीं है। जस्टिस पार्थ प्रतीम साहू और जस्टिस सचिन सिंह राजपूत की डिवीजन बेंच ने फैमिली कोर्ट के उस फैसले को बरकरार रखा, जिसमें पति की तलाक याचिका खारिज की गई थी।

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2019 में हुई थी शादी
मामला जांजगीर-चांपा जिले के 28 वर्षीय अक्ष घोष और रायगढ़ की 25 वर्षीय पूजा सीत का है। दोनों की शादी 7 मार्च 2019 को रायगढ़ जिले के एक गांव में हुई थी। शादी के बाद पत्नी करीब दो से तीन महीने तक पति और उसके परिवार के साथ रही। पति ने आरोप लगाया कि पत्नी उसके साथ ठीक व्यवहार नहीं करती थी, उसे झूठे मामलों में फंसाने की धमकी देती थी और बार-बार मायके चली जाती थी। उसने यह भी आरोप लगाया कि पत्नी राजस्थान में एक रिश्तेदार की शादी में उसकी अनुमति के बिना गई और करीब 25 दिन बाद वापस लौटी। पति के अनुसार इसके बाद पत्नी को जुड़वां बच्चों का गर्भपात भी हुआ।
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पत्नी ने लगाए अलग आरोप
पत्नी ने पति के अधिकांश आरोपों से इनकार किया। उसने आरोप लगाया कि पति का किसी दूसरी महिला से संबंध था और उसके बारे में पता चलने के बाद वह शराब पीने लगा। पत्नी ने पति पर दुर्व्यवहार करने और गर्भावस्था के दौरान उचित चिकित्सा सुविधा नहीं देने का भी आरोप लगाया। पत्नी के अनुसार तबीयत खराब होने पर उसकी मां उसे इलाज के लिए रायगढ़ ले गई थीं। ठीक होने के बाद उसने पति और ससुराल वालों से उसे वापस ले जाने का अनुरोध किया लेकिन उन्होंने उसे वापस नहीं बुलाया। इसके बाद 24 फरवरी 2020 को उसकी मां ने रायगढ़ एसपी के पास शिकायत दी। महिला ने पति और उसके परिवार के खिलाफ घरेलू हिंसा अधिनियम के तहत भी मामला दर्ज कराया।
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हाईकोर्ट ने कहा- क्रूरता साबित नहीं हुई
हाईकोर्ट ने मामले में उपलब्ध साक्ष्यों की समीक्षा के बाद कहा कि पति अपनी पत्नी की ओर से क्रूरता या परित्याग के आरोपों को ठोस साक्ष्यों से साबित नहीं कर सका। अदालत ने कहा कि पति ने पत्नी पर कई आरोप लगाए लेकिन उन्हें प्रमाणित करने के लिए पर्याप्त और ठोस साक्ष्य पेश नहीं किए गए। अदालत ने विशेष रूप से पति के इस आरोप को भी पर्याप्त आधार नहीं माना कि पत्नी उसे सांवला या मोटा कहती थी। हाईकोर्ट ने कहा कि इस तरह के कथन अकेले तलाक की डिक्री देने के लिए पर्याप्त आधार नहीं हो सकते।

पत्नी को स्त्रीधन लौटाने का आदेश बरकरार
फैमिली कोर्ट ने पति की तलाक की याचिका खारिज करने के साथ पत्नी के स्त्रीधन और उसके माता-पिता की ओर से दिए गए उपहार व अन्य सामान वापस करने का भी आदेश दिया था। हाईकोर्ट ने फैमिली कोर्ट के फैसले में हस्तक्षेप करने का कोई आधार नहीं पाया। अदालत ने कहा कि पति यह साबित नहीं कर सका कि पत्नी बिना उचित कारण के अपने माता-पिता के घर रह रही थी और वैवाहिक संबंध से अलग होने का उसका स्पष्ट इरादा था। इन्हीं सब बातों के आधार पर हाईकोर्ट ने पति की अपील खारिज कर दी।

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