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Cg Elections 2023: बिलासपुर की छह में से तीन सीटों पर BJP का कब्जा, दो कांग्रेस के पास, जानें मस्तूरी का हाल

Fri, 13 Oct 2023 01:30 PM IST
Digvijay Singh अमर उजाला नेटवर्क, बिलासपुर (छत्तीसगढ़)
अमर उजाला नेटवर्क, बिलासपुर (छत्तीसगढ़) Published by: Digvijay Singh Updated Fri, 13 Oct 2023 01:30 PM IST
सार

बता दें कि मस्तूरी विधानसभा क्षेत्र एससी बाहुल्य विधानसभा सीट है। इस क्षेत्र में सतनामी और निषाद दोनों समाज के लोग बहुतायत हैं, लेकिन चुनाव के दौरान एससी समाज का वोट एससी प्रत्याशियों में बंट जाता है। यहां बतौर निर्णायक ओबीसी का वोट माना जाता है। 

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Cg Elections 2023 BJP captures three out of six seats in Bilaspur
छत्तीसगढ़ विधानसभा चुनाव 2023 - फोटो : अमर उजाला

विस्तार

चुनावी चर्चा के तहत आज हम बात करेंगे बिलासपुर जिले की एक बेहद ही महत्वपूर्ण सीट मस्तूरी विधानसभा क्षेत्र के बारे में। वर्तमान में बिलासपुर जिले के मस्तूरी विधानसभा सीट पर भाजपा का कब्जा है। यह सीट शुरू से ही भाजपा का गढ़ रही है। क्षेत्र के खोंदरा से जौंधरा के बीच का करीब 120 किमी का इलाका मस्तूरी विधानसभा क्षेत्र में आता है। बीते कार्यकाल में यहां से भाजपा शासनकाल में स्वास्थ्य मंत्री रहे कृष्णमूर्ति बांधी ने जीत दर्ज की थी। पिछले विधानसभा चुनाव में जब कई भाजपाई दिग्गजों को हार का मुंह देखना पड़ा था, तब भी डॉ कृष्णमूर्ति बांधी ने जीत हासिल की थी।

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विधानसभा सीट पर एक नजर

मस्तूरी की आबादी 305001 है। इस सीट पर एससी की आबादी 70 फीसद के आसपास है। एसटी यहां न के बराबर हैं। यहां ओबीसी 20 फीसद और जनरल 10 फीसद हैं। इस सीट पर हार और जीत का फैसला ओबीसी वोटर करते हैं। बात अगर रोजगार के साधन की करें तो यहां एनटीपीसी है। लेकिन यहां मजदूरों की आवश्यकता इतनी नहीं पड़ती, जितने यहां बेरोजगार हैं। यही वजह है कि मस्तूरी की सबसे बड़ी समस्या यहां से पलायन है जो बदस्तूर जारी है। क्षेत्र में कोई बड़ी फैक्ट्री या कंपनी नहीं है और कृषि के लिए अच्छे साधन और रोजगार नहीं है।

 

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मस्तूरी में मतदाताओं की संख्या

मस्तूरी विधानसभा सीट पर कुल 305001 मतदाता हैं, जिसमें पुरुष मतदाता 154327 हैं और महिला मतदाताओं की संख्या 150660 है । यहां महिला और पुरुष मतदाताओं की संख्या में ज्यादा अंतर नहीं है। इस बार 18 से 19 साल के युवा मतदाताओं की संख्या 8305 है।


 
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मस्तूरी के बेसिक मुद्दे और समस्याएं

आजादी के बाद से लेकर अब तक यहां के चुनावी मुद्दे हावी रहे हैं। मुख्य मार्गों से ग्रामों तक जाने वाली कच्ची सड़कों को पक्की बनाने की मांग लंबे समय से चलती आ रही है। इसके अलावा यहां एक ही कॉलेज है। यहां से 2003 में कृष्णमूर्ती बांधी विधायक चुनकर प्रदेश के स्वास्थ्य मंत्री बने। यहां स्वास्थ्य सुविधाओं की इतनी कमी है कि विधानसभा के लोगों को दूसरी जगह जाकर इलाज कराना पड़ता है।

मस्तूरी विधानसभा क्षेत्र अनुसूचित जाति वर्ग के लिए आरक्षित सीट है। जिले की इस महत्वपूर्ण सीट पर 2003 व 2008 के चुनाव में भाजपा ने डॉ. कृष्णमूर्ति बांधी को प्रत्याशी बनाया था। 2003 का चुनाव यहां काफी रोचक था,क्योंकि भाजपा के सिटिंग विधायक मदन सिंह डहरिया ने जोगी शासनकाल में भाजपा छोड़कर कांग्रेस ज्वॉइन कर लिया। फिर वे कांग्रेस से चुनाव लड़े थे। इस चुनाव में मदन सिंह डहरिया को हराकर डॉ. बांधी विधायक बने और फिर डॉ. रमन कैबिनेट में स्वास्थ्य मंत्री भी बने। 2008 के विधानसभा चुनाव में फिर से इनके बीच मुकाबला हुआ,जिसमें भाजपा के डॉ. बांधी दूसरी बार मस्तूरी विधानसभा से चुनाव जीत गए। दूसरी पारी में उन्हें राज्य अनुसूचित जाति आयोग का अध्यक्ष बनाया गया। लेकिन उनके 10 साल के कार्यकाल में मस्तूरी क्षेत्र में विकास की गंगा नहीं बह पाई। 

क्षेत्र के मतदाता इस कदर नाराज हुए और क्षेत्र में सत्ताविरोधी लहर इस कदर फैली कि 2013 के चुनाव में मस्तूरी विधानसभा सीट भाजपा से छीनकर कांग्रेस की झोली में चली गई। कांग्रेस पार्टी ने क्षेत्र के लोक कलाकार दिलीप लहरिया को चुनाव लड़ाया, जिसमें दिलीप लहरिया निर्वाचित हुए। लेकिन कांग्रेस को यह सीट मिलने के बाद भी मस्तूरी क्षेत्र की जनता को बुनियादी समस्याओं से छुटकारा नहीं मिला। 2018 में भाजपा के डॉ कृष्णमूर्ति बांधी ने कांग्रेस प्रत्याशी दिलीप लहरिया को हराकर वो फिर मस्तूरी के विधायक बने।

बता दें कि मस्तूरी विधानसभा क्षेत्र एससी बाहुल्य विधानसभा सीट है। इस क्षेत्र में सतनामी और निषाद दोनों समाज के लोग बहुतायत हैं, लेकिन चुनाव के दौरान एससी समाज का वोट एससी प्रत्याशियों में बंट जाता है। यहां बतौर निर्णायक ओबीसी का वोट माना जाता है। एससी के बाद यहां ओबीसी के वोटर्स अधिक हैं। सामान्य और एसटी की बात करें तो एसटी समाज के लोग मस्तूरी विधानसभा में नहीं के बराबर हैं।

पिछले चुनाव में बीजेपी के डॉ कृष्णमूर्ति बांधी 36.37 वोट प्रतिशत और सर्वाधिक 67950 मत के साथ विधायक चुने गए थे। दूसरे नम्बर पर बसपा के जयेंद्र सिंह पाटले 28.82 वोट प्रतिशत व 53843 मतों के साथ दूसरे नम्बर पर आए थे, तो वहीं कांग्रेस प्रत्याशी दिलीप लहरिया ने 28.70 वोट प्रतिशत व 53620 मतों के साथ तीसरा स्थान हासिल किया था।

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