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Bijapur: जवानों की शहादत पर भ्रष्टाचार हावी, पहली बारिश में दो टुकड़ों में बंट गई डेढ़ किलोमीटर सड़क

Tue, 30 Jul 2024 07:42 PM IST
Digvijay Singh अमर उजाला नेटवर्क, बीजापुर
अमर उजाला नेटवर्क, बीजापुर Published by: Digvijay Singh Updated Tue, 30 Jul 2024 07:42 PM IST
सार

बीजापुर ज़िले के अति नक्सल प्रभावित क्षेत्र हीरौली से कावड़गाँव तक 1.53 कि.मी. सड़क 49.99 लाख रुपयों की लागत से बनाया गया। लेकिन बारिश के बाद ही सड़क दरकने लग गई है।

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Corruption prevails over martyrdom of soldiers one and a half kilometer road split into two pieces in the firs
बारिश में दो टुकड़ों में बंट गई सड़क - फोटो : अमर उजाला

विस्तार

बीजापुर में राज्य सरकार अंदुरुनी क्षेत्रों में सड़क, पुल, पुलियों का निर्माण कर गांवों को मुख्य धारा से जोड़ने का हर संभव प्रयास कर रही है। इसमें काफी हद तक सफल भी हो रही है। जिससे अंदरूनी क्षेत्र के आदिवासी ग्रामीणों को सरकार की योजनाओं का लाभ मिल सके। इसके के लिए सरकार नक्सल प्रभावित क्षेत्रों में दिन-रात सुरक्षा बलों द्वारा पहरी देकर ग्रामीण क्षेत्रों में सड़कों का जाल बिछा रही है। इन अंदरूनी सड़को को बनाने में कई जवानों की शहादत भी हुई है। जिससे सरकार और प्रशासन में बैठे लोग भी इस बात से वाकिफ हैं।

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बीजापुर ज़िले के अति नक्सल प्रभावित क्षेत्र हीरौली से कावड़गाँव तक 1.53 कि.मी. सड़क 49.99 लाख रुपयों की लागत से बनाया गया। लेकिन बारिश के बाद ही सड़क दरकने लग गई है। ज़िला निर्माण समिति से बन रही ये सड़क सात दशकों के बाद बनाई जा रही थी। लेकिन वे भी भ्रष्टाचार की भेंट चढ गई। ऐसा लगता कि ठेकेदार और इंजीनियर ने इन्हें बनवाने में कोई दिलचस्पी नही दिखाई।
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यह डेढ़ किलोमीटर की सड़क बनाने की लागत राशि लगभग 50 लाख रुपये है।इंजीनियर अगर इन 50 लाख रुपयों से बन रही सड़क पर 55 मिनट समय भी उस जगह पर जाकर दिया होता तो शायद इस सड़क बनवाने में शहीद जवानों की आत्मा को शांति मिलती। लेकिन ठेकेदार के साथ इंजीनियर ने मिलकर अपने कमीशन के चलते घर बैठे इस डेढ़ किलोमीटर की सड़क का मूल्यांकन कर पूरी राशि आहरण करने ठेकेदार की मदद की.और इस डेढ़ किलोमीटर की सड़क में ठेकेदार व इंजीनियर ने मिलकर गुणवत्ताहीन कार्य करा कर इस सड़क पर एक भ्रष्टाचार की लकीर खींच दी।

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