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Bijapur: वनकर्मियों के आवासों का हाल बेहाल, वर्षों से नहीं हुई मरम्मत और न ही रंगाई पोताई, हर साल आता है बजट

Mon, 08 Jul 2024 01:29 PM IST
Digvijay Singh अमर उजाला नेटवर्क, बीजापुर (छत्तीसगढ़)
अमर उजाला नेटवर्क, बीजापुर (छत्तीसगढ़) Published by: Digvijay Singh Updated Mon, 08 Jul 2024 01:29 PM IST
सार

बीजापुर में जिला मुख्यालय में वनविभाग के कर्मचारी जिन शासकीय भवनों में रहते हैं उनकी हालत बेहद ख़राब व जर्जर है। किसी के आवास का दरवाजा टूटा है तो किसी की खिड़की। वहीं कई वर्षों से आवासों में रंगाई पोताई तक नहीं कराई गई है।

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condition of houses of forest workers is pathetic there has been no repair or painting for years in Bijapur
वनकर्मियों के आवासों का हाल बेहाल - फोटो : अमर उजाला

विस्तार

बीजापुर में जिला मुख्यालय में वनविभाग के कर्मचारी जिन शासकीय भवनों में रहते हैं उनकी हालत बेहद ख़राब व जर्जर है। किसी के आवास का दरवाजा टूटा है तो किसी की खिड़की। वहीं कई वर्षों से आवासों में रंगाई पोताई तक नहीं कराई गई है। ऐसे में वनविभाग के इन आवासों की मरम्मत न होने से इनमें परिवार के साथ साथ वनकर्मियों को भी काफ़ी परेशानियों का सामना करना पड़ रहा है। आवासों में रहने वाले लोगों ने बताया की कई बार हम अपने आवासो की मरम्मत के लिए लिखके दे चुके है। वहीं बीच-बीच में विभाग के लोग भी समस्या जानने के लिए आते हैं और समस्याएं लिखकर ले जाते हैं लेकिन कई साल हो गए विभाग की ओर से हमारे आवासो में किसी भी प्रकार का मरम्मत और न ही रंगाई पोताई का काम किया गया है। जिससे आवासों की हालत सही नहीं है। 

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लेटबाथ चोक, पानी की किल्लत
जिला अस्पताल के सामने बने वनविभाग के कर्मचारियों के 8 आवास है। इन आवासो में सबसे बड़ी समस्या शौच की है।  यहाँ पर रह रहे लोगों ने बताया की यहाँ पर जितने भी क्वाटर है उनमें अधिकतर का लेटबाथ चोक है। पानी की निकासी भी सही नहीं है। जिससे शौच के लिए बड़ी समस्या होती है। यहाँ पर कई कर्मचारी है जो इन समस्याओं के कारण दूसरे जगह पर या किराये पर रहने को मजबूर है।

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अपने खर्चे पर करवा रहे मरम्मत
वहीं इन सरकारी आवासो में 10 साल पहले विभाग ने खानापूर्ति के लिए सीट लगा कर अपना पल्ला झाड लिया था  उसके बाद वनविभाग ने वनकर्मियों के इन आवासो की तरफ मुड़कर नहीं देखा। वहीं पिछले 3 से 4 साल हो गए कर्मचारियों के इन आवासो में किसी तरह का कोई मरम्मत का कार्य नहीं हुआ। कर्मचारी अब अपने पैसों से अपने आवासो की मरम्मत करवा रहे है। वहीं कर्मचारियों के वेतन से हाउस रेंट की भी कटौती विभाग करता है  लेकिन विभाग अपने कर्मचारियों के साथ ऐसा सौतेला व्यवहार क्यों कर रहा है यह समझ से परे है।
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सूत्रों से मिली जानकारी के अनुसार हर साल कर्मचारियों के आवासो की मरम्मत के लिए बजट आता है।  लेकिन इस बजट का इस्तेमाल वनविभाग के जिम्मेदार अफसर कहाँ करते है ये  जाँच का विषय है।


क्या बोले जिम्मेदार 
डीएफओ रामाकृष्णा रंगानाघा वाय ने इस संबध में कम बजट का हवाला देते हुए कहा की  हर साल 4 से 5 लाख रूपये का बजट आता है। लेकिन जिले में कुल 140 से 150 शासकीय आवास है। ऐसे में इतने कम बजट में सभी आवासो का मरम्मत करवाना आसान नहीं है । जहाँ पर प्राथमिकता होती है वैसे आवासो में मरम्मत का कार्य कराया जाता है और जो कर्मचारी सालों से इन आवासो में रह रहे है उन्हें भी छोटे छोटे कामों को करवाना चाहिए ये उनकी भी जिम्मेदारी है।




 
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