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16 साल बाद मिली शिक्षा: बीजापुर के इन गावों में सुविधाएं नहीं, फिर खुले स्कूल: हिंदी-अंग्रेजी में होगी पढ़ाई
Mon, 25 Sep 2023 09:12 PM IST
अनुज कुमार
अमर उजाला नेटवर्क, बीजापुर
अमर उजाला नेटवर्क, बीजापुर
Published by: अनुज कुमार
Updated Mon, 25 Sep 2023 09:12 PM IST
सार
16 सालों से इन गांवों में शिक्षा की बुनियादि सुविधा नहीं होने से हजारों बच्चे शिक्षा के अधिकार से वंचित थे। जिनके हाथों में अब कॉपी-कलम और किताब आ जाने से उन्हें अशिक्षा के अंधकार से आजादी मिलने की राह आसान हो गयी है।
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बीजापुर में स्वामी आत्मानंद स्कूल
- फोटो : अमर उजाला
विस्तार
जिले के बीजापुर, भोपालपटनम, उसूर और भैरमगढ़ मुख्यालय में 14 स्वामी आत्मानंद उत्कृष्ट अंग्रेजी माध्यम विद्यालय, 23 स्वामी आत्मानंद उत्कृष्ट हिन्दी माध्यम विद्यालय संचालित किया जा रहा है। जिनमें अंग्रेजी माध्यम के 2524 और 8384 हिन्दी माध्यम कुल 10908 विद्यार्थी शिक्षा ग्रहण कर रहे हैं।
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स्वामी आत्मानंद स्कूलों में उन्नत किस्म के क्लास रूम, डिजिटल क्लास रूम, लैब लाइब्रेरी सहित आकर्षक माहौल तैयार किया जा रहा है। जिसमें बच्चों के सर्वागीण विकास में सहायता मिल रही है। सलवा जुडूम अभियान और नक्सली दहशत के चलते अंदरुनी और अतिसंवेदनशील क्षेत्र के 16 साल पहले बंद स्कूलों में से 199 स्कूल खोलने में जिला प्रशासन को सफलता मिली है।
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16 सालों से इन गांवों में शिक्षा की बुनियादि सुविधा नहीं होने से हजारों बच्चे शिक्षा के अधिकार से वंचित थे। जिनके हाथों में अब कॉपी-कलम और किताब आ जाने से उन्हें अशिक्षा के अंधकार से आजादी मिलने की राह आसान हो गयी है। ये गांव बीजापुर के अतिसंवेदनशील दुर्गम और पहुंच विहीन इलाकों में शामिल है। जहां 16 सालों बाद शिक्षा की बुनियाद फिर से रख पाना आसान नहीं था।
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लेकिन शासन और जिला प्रशासन की सकारात्मक पहल और ग्रामीणों की सहभागिता ने इसे आसान बनाने में महती भूमिका निभाई। बीजापुर, भैरमगढ़, उसूर और भोपालपटनम के धुर नक्सल प्रभावित गांव पेददाजोजेर, कमकानार, बुरजी, मल्लूर,पालनार, पुसनार, चोखनपाल, मेटापाल, मर्रीवाड़ा, गुज्जाकोंटा,सेन्ड्रा, पिल्लूर, मल्लेमपेंटा, उड़तामल्ला, पालागुडा, पुलादी, मडकापाल, कुंगलेर, वायनार जैसे अतिसंवेदनशील और पहुंच विहीन गांव में 16 साल बाद फिर से खोले गये हैं।
जिनमें 7122 बच्चे शिक्षा की मुख्य धारा से जुड़े। इन गांवों में छ.ग. सरकार और जिला प्रशासन की मदद से गांवों के युवा बेरोजगार को ज्ञान-दूत के रुप में निश्चित मानदेय पर ग्राम पंचायत के प्रस्ताव पर नियुक्त किया गया है। जिनके माध्यम से इन इलाकों में शिक्षा की रोशनी बच्चों के भविष्य को रोशन करेगी।
बीजापुर जिले अंतर्गत सत्र 2019-20 में 51 नक्सल प्रभाव से बंद स्कूलों को खोला गया है। जिसमें 12वीं उत्तीर्ण शिक्षादूतों के माध्यम से स्कूलों का संचालन किया जा रहा है। जिन्हें प्रतिमाह 10 हजार मानदेय राशि दी जाएगी।
साल 2021-22 नक्सल प्रभाव से बंद 111 स्कूलों को खोला गया है। वर्ष 2022-23 में 37 स्कूल खोले गये हैं। वर्तमान में खोले गये स्कूलों में दर्ज संख्या 7122 छात्र-छात्राएं अध्ययनरत हैं। जिले में शिक्षा को प्रभावी ढंग से मजबूत करने डिजिटल क्लास रूम एवं 100 से अधिक प्राथमिक शालाओं में टीवी के माध्यम से भी बच्चों को रोचक ढंग से शिक्षा सुलभ करानी है।