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CG: दीदी ई-रिक्शा सहायता योजना से आत्मनिर्भर बनीं भुनेश्वरी, 1 लाख रुपये का मिला अनुदान, स्वरोजगार हुआ स्थापित
Sun, 01 Jun 2025 11:11 AM IST
अमन कोशले
अमर उजाला नेटवर्क, रायपुर
अमर उजाला नेटवर्क, रायपुर
Published by: अमन कोशले
Updated Sun, 01 Jun 2025 11:11 AM IST
सार
उन्होंने ‘दीदी ई-रिक्शा योजना’ के तहत एक ई-रिक्शा खरीदी और उसे ही अपनी आजीविका का साधन बना लिया। इस योजना के अंतर्गत पंजीकृत महिला श्रमिकों को ई-रिक्शा खरीदने पर 1 लाख रूपए की सब्सिडी प्रदान की जाती है।
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दीदी ई-रिक्शा सहायता योजना
- फोटो : अमर उजाला
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विस्तार
छत्तीसगढ़ सरकार की श्रम विभाग की ओर से श्रमिकों के हित में अनेक प्रयास किए जा रहे हैं। रायपुर के एक साधारण परिवार से ताल्लुक रखने वाली भुनेश्वरी साहू कभी रोजी-मजदूरी कर अपने परिवार के खर्चों में अपना योगदान देती थीं। सीमित आय और कठिन परिस्थितियों में जीवन जीते हुए भी उन्होंने हार नहीं मानी। उनके अंदर आत्मनिर्भर बनने की इच्छा थी, जिसे उन्होंने कभी खत्म होने नहीं दिया। आज भुनेश्वरी साहू अपने आत्मविश्वास, मेहनत और छत्तीसगढ़ शासन के सहयोग से समाज में एक सशक्त महिला के रूप में सामने आई। अब वे अपने पैरों पर खड़ी हैं और दूसरों के लिए एक प्रेरणा बन चुकी हैं।
लगभग डेढ़ साल पहले उन्होंने ‘दीदी ई-रिक्शा योजना’ के तहत एक ई-रिक्शा खरीदी और उसे ही अपनी आजीविका का साधन बना लिया। इस योजना के अंतर्गत छत्तीसगढ़ भवन एवं अन्य सन्निर्माण कर्मकार कल्याण मंडल द्वारा पंजीकृत महिला श्रमिकों को ई-रिक्शा खरीदने पर 1 लाख रूपए की सब्सिडी प्रदान की जाती है। साहू ने इस योजना का लाभ उठाते हुए न केवल अपना स्वरोजगार स्थापित किया, बल्कि अपनी मेहनत से यह सिद्ध कर दिखाया कि अगर अवसर मिले और हौसला हो, तो कोई भी महिला आत्मनिर्भर बन सकती है और किसी भी मुकाम को हासिल कर सकती है।
वर्तमान में साहू प्रतिदिन 6 से 8 घंटे ई-रिक्शा चलाती हैं और उसी से प्राप्त आय से अपने घर का खर्च चलाने के साथ-साथ अपने बच्चों को पढ़ा रही हैं। वे नियमित रूप से लोन की मासिक किश्त ईएमआई चुका रही हैं और भविष्य में अपने व्यवसाय के विस्तार का सपना देख रही हैं। उनका मानना है कि स्वरोजगार केवल आय का स्रोत नहीं होता, बल्कि यह आत्मसम्मान और आत्मविश्वास का प्रतीक होता है।
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भुनेश्वरी साहू कहती हैं, पहले मैं एक श्रमिक के रूप में काम करती थी और मुश्किल से घर चलाती थी। लेकिन मेरा सपना था कि मैं कुछ अपना करूं, जिससे न केवल मेरा बल्कि मेरे बच्चों का भविष्य भी सुरक्षित हो सके। जब मैंने छत्तीसगढ़ भवन एवं अन्य सन्निर्माण कर्मकार कल्याण मंडल में पंजीयन कराया, तब मुझे श्रम विभाग से जानकारी मिली कि सरकार महिलाओं के लिए स्वरोजगार की योजनाएं चला रही है। जब मैंने दीदी ई-रिक्शा योजना के बारे में जाना, तो मुझे लगा कि यही मौका है। मैंने साहस किया, आवेदन किया और आज परिणाम मेरे सामने है।
पात्रता
फ़ायदे
आवश्यक दस्तावेज़
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लगभग डेढ़ साल पहले उन्होंने ‘दीदी ई-रिक्शा योजना’ के तहत एक ई-रिक्शा खरीदी और उसे ही अपनी आजीविका का साधन बना लिया। इस योजना के अंतर्गत छत्तीसगढ़ भवन एवं अन्य सन्निर्माण कर्मकार कल्याण मंडल द्वारा पंजीकृत महिला श्रमिकों को ई-रिक्शा खरीदने पर 1 लाख रूपए की सब्सिडी प्रदान की जाती है। साहू ने इस योजना का लाभ उठाते हुए न केवल अपना स्वरोजगार स्थापित किया, बल्कि अपनी मेहनत से यह सिद्ध कर दिखाया कि अगर अवसर मिले और हौसला हो, तो कोई भी महिला आत्मनिर्भर बन सकती है और किसी भी मुकाम को हासिल कर सकती है।
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वर्तमान में साहू प्रतिदिन 6 से 8 घंटे ई-रिक्शा चलाती हैं और उसी से प्राप्त आय से अपने घर का खर्च चलाने के साथ-साथ अपने बच्चों को पढ़ा रही हैं। वे नियमित रूप से लोन की मासिक किश्त ईएमआई चुका रही हैं और भविष्य में अपने व्यवसाय के विस्तार का सपना देख रही हैं। उनका मानना है कि स्वरोजगार केवल आय का स्रोत नहीं होता, बल्कि यह आत्मसम्मान और आत्मविश्वास का प्रतीक होता है।
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भुनेश्वरी साहू कहती हैं, पहले मैं एक श्रमिक के रूप में काम करती थी और मुश्किल से घर चलाती थी। लेकिन मेरा सपना था कि मैं कुछ अपना करूं, जिससे न केवल मेरा बल्कि मेरे बच्चों का भविष्य भी सुरक्षित हो सके। जब मैंने छत्तीसगढ़ भवन एवं अन्य सन्निर्माण कर्मकार कल्याण मंडल में पंजीयन कराया, तब मुझे श्रम विभाग से जानकारी मिली कि सरकार महिलाओं के लिए स्वरोजगार की योजनाएं चला रही है। जब मैंने दीदी ई-रिक्शा योजना के बारे में जाना, तो मुझे लगा कि यही मौका है। मैंने साहस किया, आवेदन किया और आज परिणाम मेरे सामने है।
पात्रता
- केवल ऑटो/साइकिल रिक्शा चालक जो छत्तीसगढ़ असंगठित कर्मकार राज्य सामाजिक सुरक्षा बोर्ड में पंजीकृत हैं, इस योजना के लिए पात्र हैं।
- पंजीकृत श्रमिकों की आयु 18 से 50 वर्ष के बीच होनी चाहिए।
- पंजीकृत श्रमिकों को आर.टी.ओ. में पंजीकृत होना चाहिए।
- पंजीकृत श्रमिकों के पास वाणिज्यिक वाहन चालक लाइसेंस होना चाहिए।
- श्रमिकों को छत्तीसगढ़ असंगठित कर्मकार राज्य सामाजिक सुरक्षा मंडल में कम से कम 90 दिनों से पंजीकृत होना चाहिए।
- प्रत्येक लाभार्थी इस योजना का लाभ केवल एक बार ही प्राप्त कर सकता है।
- वे लाभार्थी जो पहले से ही राज्य सरकार द्वारा प्रस्तावित किसी अन्य समतुल्य योजना से लाभ प्राप्त कर चुके हैं, इस योजना के लाभ के लिए पात्र नहीं हैं।
फ़ायदे
- पंजीकृत असंगठित श्रमिक व्यक्तियों को योजना क्रियान्वयन के लिए ₹ 10,000 का खर्च वहन करना होगा।
- छत्तीसगढ़ असंगठित कर्मकार राज्य सामाजिक सुरक्षा मंडल द्वारा ₹ 30,000/- का अनुदान प्रदान किया जाएगा।
- शेष राशि रिक्शा/ऑटो चालक को बैंक ऋण के रूप में दी जाएगी, जिसे लाभार्थी को निर्दिष्ट समय सीमा के भीतर तथा बैंक द्वारा निर्धारित ब्याज दर पर चुकाना होगा।
- बोर्ड अपना अंशदान लाभार्थी के खाते में तभी स्थानांतरित करेगा जब ऋण से संबंधित सभी आवश्यक दस्तावेज बोर्ड के समक्ष प्रस्तुत कर दिए जाएंगे।
आवश्यक दस्तावेज़
- आधार कार्ड।
- स्थायी निवास प्रमाण पत्र।
- राशन कार्ड की प्रति।
- बैंक के खाते का विवरण।
- ई-रिक्शा की प्राप्ति।