Bhanupratappur Bypoll Result 2022: कांग्रेस की हैट्रिक, सावित्री मंडावी ने 21171 वोटों से ब्रह्मानंद को हराया
छत्तीसगढ़ में भूपेश बघेल की सरकार बनने के बाद से उपचुनावों में कांग्रेस ने कई रिकार्ड बना दिए हैं। साल 2018 के बाद से कांग्रेस एक भी उपचुनाव नहीं हारी है। उसने यह रिकार्ड भानुप्रतापपुर उपचुनाव में भी बरकरार रखा। साथ ही अपनी परंरपरागत सीट को बचाते हुए सातवीं बार यहां कब्जा किया है।
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छत्तीसगढ़ के भानुप्रतापपुर उपचुनाव में एक बार फिर कांग्रेस का जादू चला है। आदिवासी आरक्षण को लेकर तमाम विरोध के बावजूद कांग्रेस की उम्मीदवार सावित्री मंडावी ने जीत दर्ज की है। उन्होंने अपने निकटतम प्रतिद्वंदी भाजपा के ब्रह्मानंद नेताम को 21 हजार से ज्यादा वोटों से शिकस्त दी है। हालांकि इसकी आधिकारिक घोषणा अभी नहीं की गई है। इस चुनाव में छाप छोड़ी पूर्व IPS और सर्व आदिवासी समाज के उम्मीदवार अकबर राम कोर्राम ने। उन्होंने जोरदार टक्कर दी। खास बात यह है कि बाकी चार प्रत्याशियों से ज्यादा वोट नोटा को मिले हैं।
कांग्रेस उम्मीदवार सावित्री मंडावी पहले राउंड से ही बढ़त बनाए हुए थीं। यह सिलसिला जो शुरू हुआ, वह आखिरी राउंड तक कायम ही रहा। इस चुनाव में सबसे ज्यादा दम सर्व आदिवासी समाज के प्रत्याशी अकबर राम कोर्राम ने दिखाया। शुरू से माना जा रहा था कि मुख्य टक्कर भाजपा और कांग्रेस के बीच है, लेकिन अकबर राम कोर्राम ने एक राउंड में ब्रह्मानंद को पछाड़ दिया। हालांकि इसके बाद उन्होंने काफी संघर्ष के बाद बढ़त बनाई। फिर भी अंतर अकबर से कुछ ज्यादा नहीं रहा।
इस तरह बढ़ता गया जीत का सिलसिला
| मतगणना राउंड | सावित्री मंडावी (कांग्रेस) | ब्रह्मानंद नेताम (भाजपा) | अकबर राम कोर्राम (सर्व आदिवासी समाज समर्थित) |
| पहला | 3397 | 1490 | 1196 |
| दूसरा | 2415 | 1488 | 2143 |
| तीसरा | 3780 | 1381 | 1657 |
| चौथा | 3732 | 1325 | 1635 |
| पांचवां | 2809 | 1433 | 2522 |
| छठवां | 3617 | 2703 | 464 |
| सातवां | 3306 | 2027 | 3032 |
| आठवां | 3604 | 2377 | 1331 |
| नौवां | 1554 | 3554 | 1247 |
| 10वां | 3627 | 2119 | 1423 |
| 11वां | 4031 | 3590 | 677 |
| 12वां | 3164 | 2578 | 1559 |
| 13वां | 3837 | 2084 | 841 |
| 14वां | 4150 | 3420 | 810 |
| 15वां | 3384 | 4012 | 646 |
| 16वां | 3982 | 3486 | 684 |
| 17वां | 3824 | 2225 | 288 |
| 18वां | 3775 | 3153 | 1037 |
| 19वां | 1297 | 1084 | 179 |
| कुल वोट | 65327 | 44229 | 23371 |
भाजपा उम्मीदवार के लगातार पीछे चलने के चलते कार्यकर्ताओं का भी जोश ठंडा हो गया। छठवें राउंड के बाद ही उन्होंने लौटना शुरू कर दिया था। वहीं दूसरी ओर कांग्रेस के खेमे में ढोल और पटाखों के साथ जश्न का माहौल अंगड़ाई ले रहा था। इसका नजारा दिखना शुरू भी हो गया था। आठवें राउंड के समाप्त होने के बाद ही पटाखे चलने लगे। कार्यकर्ताओं के इस जोश में पीसीसी चीफ मरकाम भी शामिल हुए। वहीं आबकारी मंत्री कवासी लखमा ने डांस करना शुरू कर दिया।
दरअसल, साल 1962 में भानुप्रतापपुर विधानसभा सीट वजूद में आई थी। इसके बाद से 13 विधानसभा चुनाव हो चुके हैं। इनमें से कांग्रेस ने छह बार जीत दर्ज की है। हालांकि 1985 से कांग्रेस के साथ भाजपा भी मैदान में हैं। दोनों पार्टी के उम्मीदवारों ने लगातार दो बार तो जीत दर्ज की है, लेकिन हैट्रिक कोई नहीं लगा सका था। कांग्रेस इस रिकार्ड को तोड़ने का दावा किया और तीसरी बार भानुप्रतापपुर सीट अपने नाम कर ली।
प्रत्याशियों से ज्यादा नोटा को मिले वोट
भानुप्रतापपुर उपचुनाव में कुल सात प्रत्याशी मैदान में थे। इनमें से असल मुकाबला तीन उम्मीदवारों के बीच ही हुआ। बाकी चार उम्मीदवारों से ज्यादा वोट तो नोटा को मिले। जबकि दो प्रत्याशियों की जमानत तक जब्त हो गई।
| प्रत्याशी | पार्टी | वोट |
| ब्रह्मानंद नेताम | भाजपा | 44229 |
| सावित्री मंडावी | कांग्रेस | 65327 |
| के.घनश्याम जुरी | गोंडवाना गणतंत्र पार्टी | 2479 |
| शिवलाल | पूडो अंबेडकराइट पार्टी | 1337 |
| हीरा नेताम | राष्ट्रीय जन संघ | 813 |
| अकबर राम कोराम | सर्व आदिवासी समाज | 23417 |
| दिनेश कल्लो | निर्दलीय | 3851 |
| नोटा | 4243 |
कांग्रेस उम्मीदवार सावित्री मंडावी ने कहा कि जनता ने उन पर भरोसा जताया है। अब उनका एक ही लक्ष्य है कि वह लोगों के बीच जाएं। उनकी समस्याओं को सुनें और उसे दूर करें। साथ ही साथ वह अपने पति के अधूरे कामों और सपनों को भी पूरा करना चाहती हैं। भानुप्रतापपुर को जिला बनाने के सवाल पर कहा कि वह भूपेश बघेल सरकार के हाथ में है, लेकिन यहां के लोगों की बात वह उनके सामने जरूर रखेंगी।
भानुप्रतापपुर से कांग्रेस विधायक और विधानसभा के उपाध्यक्ष रहे दिवंगत मनोज मंडावी की पत्नी सावित्री मंडावी एक शिक्षिका रही हैं। वह रायपुर के कटोरा तालाब स्थित एक सरकारी स्कूल में व्याख्याता थीं। चुनाव की घोषणा होने के बाद उन्होंने शिक्षिका के पद से इस्तीफा दे दिया था। तभी से कयास लगाए जा रहे थे कि कांग्रेस उन्हें पति की सीट पर उम्मीदवार बनाएगी।
कांग्रेस प्रत्याशी की जीत पर मुख्यमंत्री भूपेश बघेल ने कहा कि, सरकार के लिए जनता का विश्वास कायम है। उन्होंने कहा कि, भाजपा दूसरे और तीसरे स्थान के लिए संघर्ष करती रही। मनोज मंडावी के काम से ये जीत हुई है। उनके कामों के कारण जनता ने उनकी पत्नी पर प्यार लुटाया और भरोसा जताया। मुख्यमंत्री ने कहा कि, लगातार जितने उपचुनाव हुए हैं कांग्रेस अच्छे वोटों से जीती है। जनता का समर्थन बना हुआ है। इसे बनाकर रखेंगे और उनकी उम्मीदों पर खरा उतरेंगे।
भाजपा ने आदिवासियों का लड़ाने का काम किया
मंत्री कवासी लखमा ने कहा कि सरकार आदिवासी हित की सरकार है. भाजपा ने हमारे आदिवासियों को लड़ाने की कोशिश की, जिसका नतीजा उनको चुनाव में देखने को मिल गया है. मंत्री लखमा ने कहा, अकबर कोर्राम हमारे आदिवासी भाई हैं. हम कभी लड़ नहीं सकते. मंत्री लखमा ने एक-दूसरे को मिठाई खिलाकर कार्यकर्ताओं के साथ खुशी मनाई।
विधान सभा भानुप्रतापपुर के अबतक के विधायक
| साल | प्रत्याशी | पार्टी |
| 1962 | राम प्रसाद | निर्दलीय |
| 1967 | जे हथोई | पीएसपी |
| 1972 | सत्यनारायण सिंह | कांग्रेस |
| 1979 | प्यारेलाल सुखलाल सिंह | जनता पार्टी |
| 1980 | गंगा पोटाई | कांग्रेस |
| 1985 | गंगा पोटाई | कांग्रेस |
| 1990 | झाड़ूराम रावटे | निर्दलीय |
| 1993 | देवलाल दुज्गा | भाजपा |
| 1998 | मनोज मंडावी | कांग्रेस |
| 2003 | देवलाल दुज्गा | भाजपा |
| 2008 | ब्रम्हानंद नेताम | भाजपा |
| 2013 | मनाेज मंडावी | कांग्रेस |
| 2018 | मनेाज मंडावी | कांग्रेस |
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