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मणिपुर में उग्रवादियों की गोलीबारी में बस्तर का लाल शहीद: 3 बेटियों से छिना पिता का साया, परिवार में छाया मातम

Sat, 20 Sep 2025 11:50 AM IST
अमन कोशले अमर उजाला नेटवर्क, जगदलपुर
अमर उजाला नेटवर्क, जगदलपुर Published by: अमन कोशले Updated Sat, 20 Sep 2025 11:50 AM IST
सार

मणिपुर में शुक्रवार शाम उग्रवादियों द्वारा किए गए हमले में असम राइफल्स के दो जवान शहीद हो गए। शहीदों में छत्तीसगढ़ के बस्तर जिले के बालेंगा ग्राम उपयगुड़ापारा निवासी रंजीत कुमार कश्यप भी शामिल हैं। यह खबर मिलते ही पूरे गांव में शोक की लहर दौड़ गई।

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Bastar boy martyred in Manipur militant firing: 3 daughters lose their father, family in mourning
मणिपुर में उग्रवादियों की गोलीबारी में बस्तर का लाल शहीद - फोटो : अमर उजाला

विस्तार

मणिपुर में शुक्रवार शाम उग्रवादियों द्वारा किए गए हमले में असम राइफल्स के दो जवान शहीद हो गए। शहीदों में छत्तीसगढ़ के बस्तर जिले के बालेंगा ग्राम उपयगुड़ापारा निवासी रंजीत कुमार कश्यप भी शामिल हैं। यह खबर मिलते ही पूरे गांव में शोक की लहर दौड़ गई। घर के आंगन में परिजनों का रो-रोकर बुरा हाल है। बुजुर्ग माँ-बाप का सहारा छिन गया, वहीं रंजीत की तीन मासूम बेटियों के सिर से पिता का साया उठ गया।
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अधिकारियों से मिली जानकारी के मुताबिक, शुक्रवार शाम करीब 6 बजे बिष्णुपुर जिले के नांबोल सबल लीकाई इलाके में उग्रवादियों ने असम राइफल्स के काफिले पर घात लगाकर हमला किया। अचानक हुई गोलीबारी में एक वाहन बुरी तरह क्षतिग्रस्त हो गया। इस हमले में एक जूनियर कमीशंड ऑफिसर (जेसीओ) और जवान रंजीत कुमार कश्यप शहीद हो गए, जबकि तीन अन्य गंभीर रूप से घायल हैं। घायलों को नजदीकी अस्पताल में भर्ती कराया गया है, जिनमें से एक की हालत नाजुक बताई जा रही है।
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परिवार की उम्मीदें टूटीं
ग्रामीणों और दोस्तों ने बताया कि रंजीत पिछले महीने ही छुट्टी पर गांव आया था। करीब एक माह तक वह अपने परिजनों के साथ रहा और फिर पिछले रविवार को ही वापस ड्यूटी पर लौटा था। उसने अपने साथियों से कहा था कि सेवा के तीन साल शेष हैं, इसके बाद रिटायर होकर गांव लौटेगा और बुजुर्ग माता-पिता का सहारा बनेगा।
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लेकिन नियति को कुछ और ही मंजूर था। छुट्टी खत्म होने के महज पांच दिन बाद ही वह शहीद हो गया। उसके बलिदान की खबर आते ही गांव के लोग अंतिम दर्शन के इंतजार में शोकाकुल घर पहुंचने लगे। परिजन बताते हैं कि रंजीत शुरू से ही देश की सेवा करना चाहता था। उसका सपना था फोर्स ज्वाइन कर देश की रक्षा करना। रंजीत की तीन बेटियां हैं और एक बहन, जिसकी शादी एक बीएसएफ जवान से हुई है। अब रंजीत का बलिदान पूरे गांव ही नहीं, पूरे बस्तर के लिए गर्व और पीड़ा दोनों लेकर आया है।
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