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CG News: छत्तीसगढ़ में कोनोकार्पस के नए पौधे लगाने पर रोक, पर्यावरण संरक्षण के लिए सरकार का बड़ा फैसला
Wed, 15 Jul 2026 05:51 PM IST
अमन कोशले
अमर उजाला नेटवर्क, रायपुर
अमर उजाला नेटवर्क, रायपुर
Published by: अमन कोशले
Updated Wed, 15 Jul 2026 05:51 PM IST
सार
छत्तीसगढ़ सरकार ने पर्यावरण संरक्षण और जैव विविधता को बढ़ावा देने के उद्देश्य से राज्य में कोनोकार्पस प्रजाति के नए पौधरोपण पर तत्काल प्रभाव से प्रतिबंध लगा दिया है।
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सांकेतिक तस्वीर
- फोटो : अमर उजाला
विस्तार
छत्तीसगढ़ सरकार ने पर्यावरण संरक्षण और जैव विविधता को बढ़ावा देने के उद्देश्य से राज्य में कोनोकार्पस प्रजाति के नए पौधरोपण पर तत्काल प्रभाव से प्रतिबंध लगा दिया है। इस संबंध में आवास एवं पर्यावरण विभाग ने अधिसूचना जारी कर दी है, जिसका प्रकाशन 7 जुलाई 2026 को छत्तीसगढ़ राजपत्र (असाधारण) में किया गया।
सरकार के अनुसार यह निर्णय पर्यावरण (संरक्षण) अधिनियम, 1986 की धारा-5 के तहत लिया गया है। अधिसूचना में कहा गया है कि कोनोकार्पस एक आक्रामक विदेशी प्रजाति है, जिससे स्थानीय जैव विविधता, प्राकृतिक पारिस्थितिकी तंत्र, भूजल संसाधनों और जनस्वास्थ्य पर प्रतिकूल प्रभाव पड़ने की आशंका रहती है।
यह फैसला उच्चतम न्यायालय के निर्देश पर गठित केंद्रीय सशक्त समिति की सिफारिशों के आधार पर लिया गया है। समिति ने अपनी रिपोर्ट में कोनोकार्पस के नए पौधरोपण, प्रचार-प्रसार और बिक्री पर रोक लगाने के साथ-साथ पहले से लगे पौधों को चरणबद्ध तरीके से स्थानीय एवं देशी प्रजातियों से प्रतिस्थापित करने की अनुशंसा की थी।
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नई अधिसूचना के तहत राज्य की सीमा में कोई भी व्यक्ति, स्थानीय निकाय, शासकीय या अर्द्धशासकीय संस्था, स्वायत्त निकाय, सार्वजनिक उपक्रम अथवा अन्य संगठन अब कोनोकार्पस का नया पौधरोपण नहीं कर सकेंगे और न ही इसके रोपण को बढ़ावा देंगे।
राज्य सरकार ने स्पष्ट किया है कि यह आदेश राजपत्र में प्रकाशित होने की तिथि से प्रभावी है। सरकार का कहना है कि इस निर्णय का उद्देश्य पर्यावरणीय संतुलन बनाए रखना, स्थानीय वृक्ष प्रजातियों को बढ़ावा देना और प्राकृतिक संसाधनों का दीर्घकालिक संरक्षण सुनिश्चित करना है।
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सरकार के अनुसार यह निर्णय पर्यावरण (संरक्षण) अधिनियम, 1986 की धारा-5 के तहत लिया गया है। अधिसूचना में कहा गया है कि कोनोकार्पस एक आक्रामक विदेशी प्रजाति है, जिससे स्थानीय जैव विविधता, प्राकृतिक पारिस्थितिकी तंत्र, भूजल संसाधनों और जनस्वास्थ्य पर प्रतिकूल प्रभाव पड़ने की आशंका रहती है।
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यह फैसला उच्चतम न्यायालय के निर्देश पर गठित केंद्रीय सशक्त समिति की सिफारिशों के आधार पर लिया गया है। समिति ने अपनी रिपोर्ट में कोनोकार्पस के नए पौधरोपण, प्रचार-प्रसार और बिक्री पर रोक लगाने के साथ-साथ पहले से लगे पौधों को चरणबद्ध तरीके से स्थानीय एवं देशी प्रजातियों से प्रतिस्थापित करने की अनुशंसा की थी।
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नई अधिसूचना के तहत राज्य की सीमा में कोई भी व्यक्ति, स्थानीय निकाय, शासकीय या अर्द्धशासकीय संस्था, स्वायत्त निकाय, सार्वजनिक उपक्रम अथवा अन्य संगठन अब कोनोकार्पस का नया पौधरोपण नहीं कर सकेंगे और न ही इसके रोपण को बढ़ावा देंगे।
राज्य सरकार ने स्पष्ट किया है कि यह आदेश राजपत्र में प्रकाशित होने की तिथि से प्रभावी है। सरकार का कहना है कि इस निर्णय का उद्देश्य पर्यावरणीय संतुलन बनाए रखना, स्थानीय वृक्ष प्रजातियों को बढ़ावा देना और प्राकृतिक संसाधनों का दीर्घकालिक संरक्षण सुनिश्चित करना है।