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Balod: महाशिवरात्रि पर प्राचीन कपिलेश्वर मंदिर में विशेष पूजा, सुबह से लगी लंबी कतारें, आज से मेले का आयोजन

Fri, 08 Mar 2024 02:28 PM IST
Digvijay Singh अमर उजाला नेटवर्क, बालोद, छत्तीसगढ़
अमर उजाला नेटवर्क, बालोद, छत्तीसगढ़ Published by: Digvijay Singh Updated Fri, 08 Mar 2024 02:28 PM IST
सार

कपिलेश्वर जनसेवा समिति के सदस्य चेतन नागवंशी ने बताया कि यहां शिव मंदिर के सामने एक कुंड है। जहां हमेशा पानी भरा रहता है। जो कभी नहीं सूखता। मेरी जानकारी में तो सूखा ही नहीं है। कई योद्धाओं की प्रतिमा स्तंभों पर स्थापित हैं।

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Special puja in ancient Kapileshwar temple on Mahashivratri long queues started since morning in Balod
कपिलेश्वर मंदिर में भक्तों ने की पूजा - फोटो : अमर उजाला

विस्तार

बालोद में महाशिवरात्रि पर्व पर भगवान भोलेनाथ की विशेष पूजा अर्चना आज जिले भर में की जा रही है लेकिन जिले में कई ऐसे प्राचीन शिव मंदिर हैं, जो अपनी विशेषता के लिए जाने जाते हैं। उसी में से एक जिला मुख्यालय के नयापारा में स्थित 11वीं शताब्दी का शिवलिंग, भगवान गणेश की मूर्तियां आज भी शोभायमान है। यहां की पहचान देशभर में कपिलेश्वर शिव मंदिर समूह एवं बावड़ी के रूप में होती है यहां आज विशेष मेले का आयोजन किया जा रहा है। सुबह से ही भगवान भोलेनाथ की पूजा के लिए लोग दूर-दूर से पहुंचे हुए हैं। 

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मंदिर में कई देवी-देवताओं की प्राचीन प्रतिमाएं

कपिलेश्वर मंदिर समूह में भगवान शिव, गणेश को समर्पित मंदिर है। कृष्ण, देवी दुर्गा, संतोषी और राम जानकी मंदिर भी है। भगवान शंकर को समर्पित कपिलेश्वर मंदिर सबसे बड़ा है। पूर्वाभिमुख इस मंदिर में सिर्फ गर्भगृह मात्र है। मंदिर का शिखर काफी ऊंचा है। दोनों तरफ भगवान गणेश की छह फीट की प्रतिमा स्थापित है। मंदिर द्वार के दाएं और बाएं तरफ कई देवी-देवताओं की प्रतिमाएं स्थापित हैं।

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जल कुंड का पानी कभी नहीं सूखता

कपिलेश्वर जनसेवा समिति के सदस्य चेतन नागवंशी ने बताया कि यहां शिव मंदिर के सामने एक कुंड है। जहां हमेशा पानी भरा रहता है। जो कभी नहीं सूखता। मेरी जानकारी में तो सूखा ही नहीं है। कई योद्धाओं की प्रतिमा स्तंभों पर स्थापित हैं।

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हर दरवाजे के ऊपर गणेश की मूर्तियां

शिवलिंग, राजा-रानी की मूर्तियां 11वीं से 14वीं शताब्दी का है। प्रत्येक मंदिर के दरवाजे के ऊपर गणेश की मूतियां अंकित है। मंदिरों के शिखर भाग पर नागों की आकृतियां अंकित है। अनुमान है कि यहां पर भी स्थानीय नागवंशी राजाओं का शासन रहा होगा। किवंदती है कि इनके शासन काल में ही इन मंदिरों का निर्माण होना माना गया है। यहां भगवान राम का मंदिर गर्भगृह और मंडप में विभक्त है। आज महाशिवरात्रि पर यहां विभिन्न आयोजन हो रहे हैं।

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