Balod: बेमौसम बरसात से मूंग की फसल बर्बाद, किसानों को मुआवजे की उम्मीद, लगा रहे चक्कर
जल शक्ति मंत्रालय के जारी आंकड़ों के अनुसार बालोद जिले का गुरुर ब्लॉक भु जल स्तर को लेकर रेड जोन में चला गया है जिसे देखते हुए प्रशासन ने इस बार ग्रीष्मकालीन फसलों के रूप में धान के अलावा दलहन तिलहन फसलों के लिए किसानों को प्रेरित किया था।
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जल शक्ति मंत्रालय के जारी आंकड़ों के अनुसार बालोद जिले का गुरुर ब्लॉक भु जल स्तर को लेकर रेड जोन में चला गया है जिसे देखते हुए प्रशासन ने इस बार ग्रीष्मकालीन फसलों के रूप में धान के अलावा दलहन तिलहन फसलों के लिए किसानों को प्रेरित किया था किसानों ने दलहन तिलहन की फसल तो ली परंतु अब बे मौसम बारिश की वजह से मूंग की फसल पूरी तरह बर्बाद हो चुकी है किसानों को दुगना मेहनत करना पड़ रहा है अब किस प्रशासन से उम्मीद लगाए बैठे हैं कि उनके फसलों के नुकसान का आकलन कर प्रशासन उचित मुआवजा प्रदान करें वही मुख्यमंत्री किस बालू दौरे के दौरान मिलने की कोशिश भी किसानों ने की थी लेकिन अधिकारियों ने उन्हें आश्वासन देकर रोक दिया परंतु किसने की मुश्किल है कम होने का नाम नहीं ले रही है।
बालोद जिले के गुरूर ब्लॉक के ग्राम धनेली के किसान अश्विनी साहू ने बताया कि भूजलिस्टर घाट रहा है ऐसा प्रशासन ने कहा और किसी विभाग के अधिकारी भी गांव में आए थे हमने उनकी बातों को शहर से स्वीकारा और मूंग की फसल लिए पूरे गांव में लगभग 400 एकड़ में मूंग की फसल फैली हुई है लेकिन हमारे यहां की मिट्टी इसके लिए उपयुक्त नहीं थी और अब वह मौसम बारिश से खेतों में मूंग की फसल जो है वह बर्बाद हो गई हमने घरों में मूंग को लाकर घर के पंखों में उसे सूखने की कोशिश की है लेकिन उम्मीद से बेहद कम फसल हो रही है।
मुआवजे के लिए भटक रहे किसान
किसान देव नारायण महमल्ला ने बताया कि मुख्यमंत्री जब सुशासन त्यौहार में एक दिन पहले आए थे तो हम उनसे मिलने गए थे लेकिन पुलिस वालों और प्रशासन ने मामले का उचित निराकरण करने का आश्वासन देते हुए हमें उनसे मिलने भी नहीं दिया गया हम तो अपनी समस्या मुख्यमंत्री के समक्ष रखने वाले थे सरकार ने ही हमें दलहन तिलहन बन के लिए प्रोत्साहित किया था हमारे घरों को आप देखो हर तरफ मूंग को सुखाए हुए हैं लेकिन जितना पैदावार होना था उतना पैदावार तो नहीं हुई है ऊपर से हमारी मेहनत जो है वह बर्बाद होने के कगार पर है ऐसे में अब हम प्रशासन से मुआवजे की उम्मीद लगा रहे हैं ताकि हमें जो नुकसान हुआ है उसकी भरपाई हो सके।
सर पर कर्ज, बच्चों की पढ़ाई
किसानों ने बताया कि वह शुद्ध किसान है और कृषि पर ही निर्भर रहते हैं अब क्योंकि इस तरह फसल बर्बाद हुआ है कि हमें बच्चों को पढ़ने और कर्ज छूटने के लिए भी काफी दिक्कतों का सामना करना पड़ रहा है प्रशासन से उम्मीद है की फसलों का आकलन कर उचित निराकरण करें वहीं उन्होंने बताया कि पटवारी का कहना है की फसल काटने के बाद फसलों के नुकसान का आकलन नहीं लगाया जा सकता हम बड़े असमंजस की स्थिति में हैं अधिकारी टाल मटोल कर रहे हैं।