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Balod: कवर्धा मामले पर न्याय और OBC प्रोटेक्शन बिल की मांग लेकर महासभा ने कलेक्ट्रेट तक निकाली मशाल यात्रा

Fri, 27 Sep 2024 05:55 PM IST
Digvijay Singh अमर उजाला नेटवर्क, बालोद
अमर उजाला नेटवर्क, बालोद Published by: Digvijay Singh Updated Fri, 27 Sep 2024 05:55 PM IST
सार

बालोद में पिछड़ा वर्ग महासभा द्वारा आज कलेक्ट्रेट परिसर तक मसाले यात्रा निकाल कर अपनी तीन सूची मांगों को सरकार के समक्ष रखा गया यहां पर आगामी होने वाली जनगणना में ओबीसी वर्ग के लिए अलग कलम करने की मांग की गई। 

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Mahasabha took out a torch march to Collectorate demanding justice on Kawardha case OBC Protection Bill in Ba
ओबीसी महासभा ने किया प्रदर्शन - फोटो : अमर उजाला

विस्तार

बालोद में पिछड़ा वर्ग महासभा द्वारा आज कलेक्ट्रेट परिसर तक मसाले यात्रा निकाल कर अपनी तीन सूची मांगों को सरकार के समक्ष रखा गया यहां पर आगामी होने वाली जनगणना में ओबीसी वर्ग के लिए अलग कलम करने की मांग की गई और जो 27 प्रतिशत आरक्षण का मामला छत्तीसगढ़ में लंबे समय से लंबित है उसे भी लागू करने की मांग यहां पर की गई है साथ ही ओबीसी वर्ग से आने वाले कवर्धा के प्रशांत साहू मौत मामले में कड़ी से कड़ी कार्रवाई करने और ओबीसी वर्ग के सुरक्षा के लिए कानून बनाए जाने की मांग यहां पर पिछड़ा वर्ग महासभा द्वारा की गई है यहां पर केंद्र शासन के नाम संयुक्त कलेक्टर पूजा बंसल को ज्ञापन सोपा गया।

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ओबीसी महासभा के प्रदेश अध्यक्ष राधेश्याम साहू ने बताया कि लंबित राष्ट्रीय जनगणना 2021 के फार्मेट में ओबीसी के लिए कॉलम नम्बर 13 में पृथक से कोड नम्बर निर्धारित कर जनगणना किए जाने एवं छत्तीसगढ़ में लंबित ओबीसी आरक्षण शीघ्र लागू करने की मांग लेकर हम यहां पर मशाल रैली निकाली हुए हैं। उन्होंने बताया कि  संविधान में सामाजिक तथा शैक्षणिक दृष्टि से पिछड़े हुए समुदायो को अनुसूचित जाति, अनुसूचित जनजाति एवं अन्य पिछड़े वर्ग के रूप में 3 वर्ग बनाये गए है। जनगणना में इन तीनों वर्गों की दशाओं के आकड़े एकत्रित किए जाने चाहिए। अनुसूचित जाति व अनुसूचित जनजाति वर्ग की जनगणना तो होती है किन्तु राष्ट्रीय जनगणना फार्मेट में अन्य पिछड़ा वर्ग का पृथक से कोड नम्बर नहीं होने के कारण अन्य पिछड़ा वर्ग की जनगणना नहीं होती है उन्होंने कहा कि पिछड़ा वर्ग की जनगणना यदि होती है तो उन्हें अनुपात के आधार पर आरक्षण मिलेगा और उनके हित हो पाएगा।

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बालोद जिलाध्यक्ष भगवती सोनकर ने बताया कि विगत ३० वर्षों से लंबित ओबीसी आरक्षण 27 प्रतिशत छत्तीसगढ़ राज्य में शीघ्र लागु किया जावे। संविधान लागू होने के 43 साल बाद 1993 माननीय सुप्रीम कोर्ट के निर्णयानुसार ओबीसी 27 प्रतिशत आरक्षण केन्द्र सरकार केन्द्रीय सेवाओं में दिया गया, साथ ही राज्यों की स्थिति के आधार पर ओबीसी के लिए आरक्षण सुनिश्चित करने का अधिकार राज्य सरकार को दिया गया, किन्तु ओबीसी समुदाय को अविभाजित मध्यप्रदेश में मात्र 14 प्रतिशत आरक्षण शिक्षा एवं रोजगार में दिया गया, जोकि छत्तीसगढ़ में आज पर्यंत लागू है। बहुसंख्यक ओबीसी समुदाय को आबादी के अनुरूप हिस्सेदारी (आरक्षण) प्रदान नहीं करने के कारण प्रदेश में ओबीसी समुदाय के समुचित विकास एवं उत्थान में अपरिमित नुकसान हो रही है। पिछली छत्तीसगढ़ सरकार द्वारा 02 दिसम्बर 2022 को पारित आरक्षण संशोधन विधेयक में महामहिम राज्यपाल के हस्ताक्षर नहीं हो पाने के कारण 27 प्रतिशत आरक्षण लागू नहीं पाया है। अतः महामहिम राज्यपाल का हस्ताक्षर उक्त बिल में जल्द से जल्द होना चाइए।

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कवर्धा मामले पर मांगा न्याय
छत्तीसगढ़ राज्य के विभिन्न जिलों में ओबीसी समुदाय के लोगों के साथ आये दिन मारपीट प्रताड़ना, हत्या, शोषण आदि की वारदात हो रही है। अतः ओबीसी प्रोटेक्शन बिल पारित कर न्यायिक सुरक्षा प्रदान की जाए तथा हाल ही में कवर्धा जिला में प्रशांत कुमार साहू का पुलिस हिरासत में दर्दनाक जघन्य हत्या हुई है। मृतक श्री प्रशांत कुमार साहू के परिवार एवं अन्य मृतक परिवार के एक सदस्य को शासकीय सेवा एवं 2-2 करोड़ रूपये की क्षतिपूर्ति राशि प्रदान करते हुए एवं सीबीआई जांच किया जाये।


 
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