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महिला आरक्षण बिल: पूरे देश में महिलाओं के जश्न से बालोद अछूता, महिला मोर्चा उदासीन; विधायक ने कसा तंज

Sat, 23 Sep 2023 09:50 PM IST
अनुज कुमार अमर उजाला नेटवर्क, बालोद
अमर उजाला नेटवर्क, बालोद Published by: अनुज कुमार Updated Sat, 23 Sep 2023 09:50 PM IST
सार

पूरे देश में इस आरक्षण बिल के पास होने के बाद जश्न मनाया जा रहा है। पूरे देश भर से छत्तीसगढ़ से अलग-अलग जश्न की तस्वीर सामने आ रही है। बालोद जिले के लिए यह खुशी महज औपचारिकताएं साबित हो रही हैं। दरअसल यहां पर उदासीन महिला मोर्चा के तरफ से न किसी जश्न का आयोजन किया गया है। 

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Celebration on Women Reservation Bill across country but Balod Mahila Morcha is indifferent and MLA taunts
भाजपा - फोटो : अमर उजाला

विस्तार

नरेंद्र मोदी के नेतृत्व वाले केंद्र में बैठी भाजपा सरकार ने कुछ दिनों पूर्व महिला आरक्षण बिल लोकसभा और राज्यसभा में भारी बहुमत से पास किया है। पूरे देश में इस आरक्षण बिल के पास होने के बाद जश्न मनाया जा रहा है। पूरे देश भर से छत्तीसगढ़ से अलग-अलग जश्न की तस्वीर सामने आ रही है। कहीं पर गुलाल तो कहीं पर पटाखे फोड़ कर मिठाई खिलाकर एक दूसरे को बधाई दे रहे हैं।

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बालोद जिले के लिए यह खुशी महज औपचारिकताएं साबित हो रही हैं। दरअसल यहां पर उदासीन महिला मोर्चा के तरफ से न किसी जश्न का आयोजन किया गया है, न पटाखे फोड़े गए और न ही कोई आयोजन किया गया। बल्कि खुशी जाहिर करने कोई एकत्र भी नहीं हुआ। इससे महिला मोर्चा एवं भारतीय जनता पार्टी के उदासीनता झलकती है या फिर उन्हे कोई खुशी सरकार के इस बिल से नहीं हुई है, विधानसभा चुनाव का वर्ष है, आने वाले कुछ महीनो में चुनाव हैं और ऐसे में इस तरह भाजपा एवं महिला मोर्चा के उदासीनता कहीं भाजपा को भारी न पड़ जाए।

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शायद सरकार से खुश नहीं भाजपा की महिलाएं - विधायक सिन्हा
संजारी बालोद विधानसभा क्षेत्र की विधायक संगीता सिन्हा ने भारतीय जनता पार्टी एवं महिला मोर्चा की इस उदासीनता पर तंज कसा है। उन्होंने कहा कि शायद भाजपा की महिलाएं अपने ही केंद्र सरकार के फैसले से खुश नहीं हैं। तभी बालोद जिले में कहीं भी जश्न देखने को नहीं मिला। वैसे राज्यसभा और लोकसभा में बहुमत से यह बिल पारित हुआ है। इस बिल की शुरुआत कांग्रेस सरकार के नेतृत्व में हुई थी। 

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हमारे नेता राजीव गांधी जी का सपना 
विधायक संगीता सिन्हा ने कहा कि पहली बार स्थानीय निकायों में स्त्री की भागीदारी तय करने वाला संविधान संशोधन देश के दिवंगत नेता पूर्व प्रधानमंत्री राजीव गांधी लेकर आए थे। राज्य सभा में ये 7 वोटों से गिर गया। इसके बाद पी वी नरसिम्हा राव के अगुवाई में कांग्रेस सरकार ने इसे राज्यसभा में पास करवाया था। नतीजतन लोकल बॉडी से देश भर में आज 15 लाख निर्वाचित महिला लीडर्स हैं।

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क्या नेतृत्व क्षमता की कमी
पूरे देश में महिलाओं के जश्न में बालोद अछूता क्या इसे संगठन की उदासीनता कही जा सकती है गरम  गरम बिल का मसला ठंडा होने का इंतजार यहां की संगठन कर रही है इस तरह के हर मोर्चे पर फेल टीम कहीं आगामी चुनावों में भाजपा के प्रमुख संगठन के लिए सर दर्द ना बन जाए, जश्न  के लिए इच्छाशक्ति की जरूरत होती है, वैसे जब पुरे मामले में भाजपा महिला मोर्चा के जिलाध्यक्ष दीपा साहू से बात की गई तो उन्होनें बताया कि तीज़ा पोला पर्व के कारण कोई एकत्र नहीं हो पाया है कोई आयोजन नहीं किया जा सका बुलाने  से महिलाएं नहीं आती है जल्द ही आयोजन किया जाएगा  

विधानसभाओं में महिलाओं के लिए 33% रिजर्वेशन
बता दें कि लोकसभा और राज्यसभा  में 128 वां संविधान संशोधन बिल यानी नारी शक्ति वंदन विधेयक पेश किया गया। इसके मुताबिक, लोकसभा और राज्यों की विधानसभाओं में महिलाओं के लिए 33% रिजर्वेंशन लागू किया जाएगा। इस फॉर्मूले के मुताबिक, लोकसभा की 543 सीटों में 181 महिलाओं के लिए आरक्षित होंगी।

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