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छत्तीसगढ़ में टाटा के लिए अधिग्रहित किसानों की 1,764 एकड़ जमीन होगी वापस

Tue, 25 Dec 2018 08:33 AM IST
Sneha Baluni न्यूज डेस्क, अमर उजाला, रायपुर
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, रायपुर Published by: Sneha Baluni Updated Tue, 25 Dec 2018 08:33 AM IST
सार

  • बस्तर के किसानों को टाटा स्टील के लिए अधीग्रहीत जमीन लौटाएगी सरकार।
  • कैबिनेट की अगली बैठक से पहले अधिकारियों से मांगा एक्शन प्लान।
  • 1,707 किसानों में से 1,165 ने मुआवजे की राशि को स्वीकार किया था। 

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Baghel government started the process of returning Bastar land acquired for Tata Steel to farmers
भूपेश बघेल - फोटो : Facebook

विस्तार

छत्तीसगढ़ में कांग्रेस की सरकार बनने के बाद भूपेश बघेल ने सबसे पहले किसानों का कर्ज माफ करने का काम किया किया था। अब सरकार ने किसानों को एक और तोहफा दिया है। सरकार ने बस्तर के किसानों को वह अधीग्रहीत जमीन वापस करने की घोषणा की है जो उसने टाटा स्टील परियोजना के लिए आदिवासी किसानों से खरीदी थी। इसके लिए प्रक्रिया की शुरुआत हो चुकी है। 

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राज्य के मुख्यमंत्री बघेल को अधिकारियों को निर्देश देते हुए सुना गया कि वह प्रक्रिया शुरू कर दें और कैबिनेट की अगली बैठक से पहले एक एक्शन प्लान जमा करवाएं। कैबिनेट की बैठक मंत्रियों के मंगलवार को होने वाले शपथग्रहण के बाद होगी। अपने चुनावी घोषणापत्र में कांग्रेस ने वादा किया था कि जिन परियोजनाओं के लिए जमीन अधीग्रहित की गई है यदि उनपर पांच सालों के अंदर काम शुरू नहीं होता है तो उस जमीन को उसके मालिकों को वापस कर दिया जाएगा।
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कांग्रेस पार्टी के राष्ट्रीय अध्यक्ष राहुल गांधी ने विधानसभा चुनाव के दौरान प्रभावित क्षेत्रों में किसानों से अपना यह वादा दोहराया था। 2005 में तत्कालीन भाजपा सरकार ने टाटा स्टील के साथ बस्तर जिले के लोहांडिगुडा में 19,500 करोड़ रुपये के मेमोरेंडम ऑफ अंडरस्टैडिंग (एमओयू) पर हस्ताक्षर किए थे। अधिग्रहीत जमीन आदिवासियों की थी। इसके अधिग्रहण की शुरुआत 2008 में हुई थी और सरकार ने 10 गांवों- लोहांडिगुडा, चिंदगांव. कुम्हली, बेलियापल, बंदाजी, बादेपरोडा, बेलार, सिरसिगुडा और टकरागुडा की 1,764 हेक्टेयर जमीन अधिग्रहीत की थी। 
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इस भूमि अधिग्रहण की प्रक्रिया के दौरान किसानों के मुद्दे को लेकर काफी बहस हुई थी और क्षेत्र में अशांति छाई हुई थी। सामाजिक कार्यकर्ताओं ने इसे शोषक और दवाब की प्रक्रिया कहा था। 1,707 किसानों में से 1,165 ने मुआवजे की राशि को स्वीकार किया था। सरकार ने कहा था कि जिन लोगों ने मुआवजे की राशि नहीं ली है उनके पैसे को राजस्व जमा निधि में जमा करवाया गया है। 2016 में टाटा स्टील ने इस परियोजना से खुद को अलग कर लिया था।

मंत्रिमंडल में शामिल न किए जाने पर कांग्रेस कविधायक अमितेश शुक्ल मुख्यमंत्री से नाराज हो गए हैं। शपथग्रहण से पहले उन्होंने कहा था, 'मुझे पता चला है कि मेरा नाम उन लोगों की सूची में शामिल नहीं है जिन्हें कि आज कैबिनेट मंत्री के तौर पर शपथ दिलाई जाएगी। हमारा परिवार पिछली तीन पीढ़ियों से नेहरु-गांधी परिवार से जुड़ा रहा है। मुझे हमेशा उनसे न्याय की अपेक्षा है।'

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