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छत्तीसगढ़: हाईकोर्ट का फर्जी वकील बनकर न्यायालय के नाम पर कारोबारियों से ठगी की कोशिश नाकाम

Thu, 01 Oct 2026 03:57 PM IST
अमन कोशले अमर उजाला नेटवर्क, रायपुर
अमर उजाला नेटवर्क, रायपुर Published by: अमन कोशले Updated Thu, 01 Oct 2026 03:57 PM IST
सार

दुर्ग में फर्जी सुप्रीम कोर्ट वकील बनकर कारोबारियों से ठगी की कोशिश का मामला सामने आया। आरोपी ने जज की तबीयत खराब होने का झांसा देकर पांच हजार रुपये का जुर्माना मांगा और फर्जी कागजात व क्यूआर कोड भेजा।

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Attempt to defraud businessmen in name of court by posing as a fake High Court lawyer fails in Chhattisgarh
सांकेतिक तस्वीर - फोटो : अमर उजाला

विस्तार

दुर्ग जिले में बिलासपुर हाईकोर्ट का फर्जी वकील बनकर खाद्य कारोबारियों को ठगने का प्रयास किया गया है। आरोपी ने खुद को अधिवक्ता बताकर दुकानदारों को कॉल किया और न्यायाधीश के अस्वस्थ होने का झूठा दावा करते हुए 5,000 रुपये का जुर्माना मांगा। समय रहते खाद्य एवं औषधि प्रशासन विभाग को सूचना देकर कारोबारियों ने इस ठगी को नाकाम कर दिया।
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फर्जी रसीद और क्यूआर कोड से दबाव
ठग ने कातुलबोड़ स्थित तृप्ति स्वीट्स और धमधा के इंदौर सेव भंडार के संचालकों को फोन करके झांसा देने की कोशिश की। उसने दावा किया कि उनकी दुकान की मिठाई खाने से हाईकोर्ट के एक न्यायाधीश की तबीयत खराब हो गई है। इसके बाद आरोपी ने न्यायालय के नाम पर बनी कथित जुर्माना रसीदें भेजीं और तुरंत भुगतान के लिए क्यूआर कोड भेजा। फोन करने वाले के नंबर पर एडवोकेट हिमांशु पाठक नाम दर्ज था, जबकि क्यूआर कोड में शिवांशी दो मनीष नाम दिखाई दे रहा था। पीड़ितों ने सजगता दिखाते हुए तुरंत खाद्य विभाग से संपर्क किया, जिससे वे आर्थिक नुकसान से बच गए।
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एआई से तैयार फर्जी चालान में कई गलतियां
कारोबारियों को भेजी गई कथित जुर्माना रसीदों में बिलासपुर उच्च न्यायालय और जिला-सत्र न्यायालय बिलासपुर के फर्जी नाम का प्रयोग किया गया था। खाद्य विभाग को सौंपी गई प्रतियों के अध्ययन से पता चला कि इन दस्तावेज को कृत्रिम बुद्धिमत्ता के माध्यम से तैयार किया गया था। रसीद में कई वर्तनी संबंधी त्रुटियां थीं, जिनमें जुर्माना के स्थान पर जुमाना और जर्माना तथा रसीद के स्थान पर रसीढ लिखा हुआ था। एक कथित चालान में रसीद संख्या 005872 और तारीख 28 सितंबर  दर्ज थी। इसमें लिखा था कि घटिया मिठाई देकर न्यायाधीश की गरिमा को ठेस पहुंचाने के अपराध में 5,000 रुपये का जुर्माना लगाया गया है। आरोपी ने फर्जी दस्तावेज के सहारे मानसिक दबाव बनाकर वसूली करने की साजिश रची थी।
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आधिकारिक प्रक्रिया और विभाग की चेतावनी
खाद्य विभाग के अधिकारी जितेंद्र नेले ने स्पष्ट किया कि किसी भी तरह की कानूनी कार्रवाई या जुर्माना तय सरकारी प्रक्रिया के तहत ही होता है। विभाग पहले औपचारिक प्रकरण तैयार करता है और नियमों के अनुसार लिखित आदेश जारी करता है। फोन पर किसी निजी क्यूआर कोड में राशि जमा करने का निर्देश देना विभाग की कार्यशैली का हिस्सा नहीं है। इसके अलावा खाद्य एवं औषधि प्रशासन विभाग ने 29 सितंबर को प्रेस विज्ञप्ति जारी कर खाद्य लाइसेंस और पंजीयन के नाम पर चल रही धोखाधड़ी से सावधान रहने के लिए कहा है। विभाग को शिकायतें मिली हैं कि कुछ तत्व खुद को खाद्य सुरक्षा अधिकारी बताकर पंजीयन के नाम पर मोटी रकम वसूल रहे हैं या पैसे लेकर फरार हो रहे हैं।
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