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स्वास्थ्य मंत्री के गृहक्षेत्र का ही बुरा हाल: 7 KM तक शव को खाट पर रखकर गांव पहुंचे, तब हुआ अंतिम संस्कार

Thu, 15 Jun 2023 11:33 AM IST
अनुज कुमार न्यूज डेस्क, अमर उजाला, अंबिकापुर
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, अंबिकापुर Published by: अनुज कुमार Updated Thu, 15 Jun 2023 11:33 AM IST
सार

सरगुजा जिले में सात किलोमीटर तक ग्रामीण शव को खाट पर रखकर गांव पहुंचे। उसके बाद अंतिम संस्कार किया। इस इलाके में सड़क नहीं होने की वजह से स्थानीय लोग परेशान हैं। 

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health Minister home area villager performed last rites by keeping dead body on cot for 7 KM Due to lack of ro
शव को खाट पर रखकर ले जाते ग्रामीण - फोटो : अमर उजाला

विस्तार

सरगुजा जिले के लखनपुर ब्लाक अंतर्गत ग्राम पटकुरा के आश्रित ग्राम घटोन तक सड़क नहीं बन सकी है। इसके कारण एक ग्रामीण की मौत होने पर शव को खाट पर रखकर ग्रामीण सात किलोमीटर पैदल चलकर गांव तक पहुंचे। सोशल मीडिया में यह वीडियो वायरल हो रहा है। विकास के दावों के बीच यह तस्वीर विचलित करने वाली है। घटोन में पंडो जनजाति के करीब सौ परिवार रहते हैं। गांव में कोई बीमार हो जाए तो उसे एंबुलेंस या अन्य वाहन सुविधा के लिए भी सात किलोमीटर दूर तक जंगल के रास्ते ढोना पड़ता है। मामले में सरगुजा कलेक्टर ने कहा कि सड़क के निर्माण के लिए पहल की जाएगी। 

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लखनपुर विकासखंड के वनांचल क्षेत्र ग्राम पंचायत पटकुरा के ग्राम घटोन में सड़क नहीं होने के कारण गांव के लोगों को सात किलोमीटर पैदल यात्रा करनी पड़ती है। इस गांव तक पहुंचने के लिए जंगल की सड़क में बाइक तक नहीं चल सकती। आपातकाल में इलाज या महिलाओं को प्रसव के लिए ले जाने और लाने में भी ग्रामीणों को मशक्कत का सामना करना पड़ता है। 

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गांव के एक ग्रामीण सेल्बेस्टर लकड़ा पिता नकुल साय 45 वर्ष की उपचार के दौरान मौत हो जाने पर बुधवार को उसके शव को खाट में लेकर ग्रामीण सात किलोमीटर जंगली रास्ते से पैदल गांव तक पहुंचे। शव को लेकर आया चारपहिया वाहन पटकुरा तक शव लेकर पहुंचा था, लेकिन आगे रास्ता नहीं होने के कारण शव को पटकुरा में ही उतार दिया गया। सात किलोमीटर शव को ढोकर गांव तक पैदल पहुंचने के बाद शव का अंतिम संस्कार शाम को हो सका। 

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कई बार मांग, लेकिन नहीं हो सकी पहल
ग्राम पंचायत पटपुरा के सरपंच सोनसाय ने बताया कि घटोन तक सड़क निर्माण की मांग कई बार की गई है, लेकिन आज तक इसके लिए पहल नहीं हो पाई है। गांव तक पहुंचने के लिए सड़क नहीं होने के कारण महिलाओं को प्रसव एवं अन्य इमरजेंसी के लिए एंबुलेंस सुविधा भी ग्रामीणों को नहीं मिल पाती। इसके लिए सात किलोमीटर पहाड़ी रास्ते का सफर पैदल ही तय करना पड़ता है। बीमार या प्रसूताओं को खाट में रखकर सात किलोमीटर पटकुरा तक लाते हैं, तब वाहन की सुविधा मिल पाती है। इससे ग्रामीणों को काफी दिक्कतों का सामना करना पड़ता है। कई बार सड़क निर्माण की मांग की गई, लेकिन अब तक पहल नहीं हो पाई। 

कलेक्टर बोले- जंगल होने के कारण नहीं बनी सड़क
सरगुजा कलेक्टर कुंदन कुमार ने बताया कि घटोन तक की सड़क वनमार्ग है। इस कारण सड़क निर्माण नहीं हो सका है। इसके लिए बड़ी संख्या में पेड़ काटने पड़ेगें। शव को गांव तक खाट में ले जाने की जानकारी मिली है। मैने सरगुजा डीएफओ को घटोन तक सड़क निर्माण को कार्ययोजना में शामिल करने कहा है। वनमार्ग में बाइक तक नहीं चल पाती है। इस मार्ग के निर्माण के लिए पहल की जाएगी। यह क्षेत्र अंबिकापुर विधानसभा का है, जो प्रदेश के स्वास्थ्य मंत्री टीएस सिंहदेव का गृहक्षेत्र है।

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