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छत्तीसगढ़ हाईकोर्ट का बड़ा फैसला: पत्नी को साथ रहने के लिए मजबूर नहीं कर सकता पति, खारिज हुई याचिका
Mon, 21 Sep 2026 08:15 PM IST
प्रिया वर्मा
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, जशपुर
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, जशपुर
Published by: प्रिया वर्मा
Updated Mon, 21 Sep 2026 08:15 PM IST
सार
जशपुर के एक मामले में छत्तीसगढ़ हाईकोर्ट ने फैसला देते हुए कहा कि पत्नी को जबरन पति के साथ रहने के लिए मजबूर नहीं किया जा सकता। दहेज मांग, मारपीट और घरेलू हिंसा के आरोपों को देखते हुए कोर्ट ने पति की अपील खारिज कर दी।
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छत्तीसगढ़ हाईकोर्ट का फैसला, पत्नी को जबरन पति के साथ रहने के लिए मजबूर नहीं किया जा सकता
- फोटो : अमर उजाला
विस्तार
छत्तीसगढ़ हाईकोर्ट की युगल पीठ ने एक मामले में महत्वपूर्ण फैसला सुनाते हुए स्पष्ट किया है कि पत्नी को जबरन पति के साथ रहने के लिए विवश नहीं किया जा सकता। न्यायमूर्ति पीपी साहू और न्यायमूर्ति सचिन सिंह राजपूत की पीठ ने पति की उस अपील को खारिज कर दिया, जिसमें उसने हिंदू विवाह अधिनियम के तहत पत्नी को उसके साथ रहने का निर्देश देने की मांग की थी।
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हाईकोर्ट ने माना कि पत्नी के अलग रहने के लिए पर्याप्त और संतोषजनक कारण मौजूद हैं। पारिवारिक न्यायालय के फैसले को बरकरार रखते हुए पीठ ने कहा कि पत्नी का बार-बार मायके जाना या कानूनी नोटिस भेजना मात्र यह साबित करने के लिए पर्याप्त नहीं है कि उसका पति के साथ लौटकर रहने से इनकार करना अनुचित था।
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दहेज की मांग और प्रताड़ना के आरोप
मामले के अनुसार जशपुर जिले के निवासी प्रवीण कुमार यादव का विवाह फरवरी 2022 में प्रियंका से हुआ था। अक्तूबर 2022 में प्रियंका अपनी बीमार मां को देखने मायके गई थी। इसके बाद उसने ससुराल लौटने से इनकार कर दिया।
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पति का दावा था कि उसने 31 अक्तूबर, 7 नवंबर और 11 नवंबर को मायके जाकर पत्नी को वापस लाने का प्रयास किया। इसके बाद उसके माता-पिता भी 24 नवंबर को प्रियंका को लेने गए लेकिन वह ससुराल नहीं लौटी। एसडीओ, पत्थलगांव के समक्ष दिया गया आवेदन भी 31 मार्च 2023 को खारिज हो गया। इसके बाद पति ने कानूनी नोटिस भेजा और पारिवारिक न्यायालय में याचिका दायर की। दूसरी ओर पत्नी ने आरोप लगाया कि शादी के कुछ समय बाद ही ससुराल पक्ष ने मायके से मिली स्विफ्ट कार को कम कीमत की बताते हुए क्रेटा कार और पांच लाख रुपए नकद की मांग शुरू कर दी थी।
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मारपीट के कारण गर्भपात का दावा
पत्नी ने न्यायालय के समक्ष आरोप लगाया कि पति और उसके परिजनों की मारपीट और प्रताड़ना के कारण उसका गर्भपात हो गया था। उसने इस संबंध में सखी सेंटर, जशपुर में शिकायत दर्ज कराने और घरेलू हिंसा से संबंधित कार्रवाई शुरू किए जाने की बात भी कही।
पत्नी ने पति के किसी अन्य युवती से संबंध होने का आरोप भी लगाया। इसके अलावा उसने बताया कि उसके शैक्षणिक प्रमाण पत्र, आधार कार्ड, जाति प्रमाण पत्र और बैंक पासबुक जैसे जरूरी दस्तावेज पति के पास थे। पारिवारिक न्यायालय ने इन दस्तावेजों को वापस करने का निर्देश भी दिया था।
हाईकोर्ट ने फैसला रखा बरकरार
हाईकोर्ट की पीठ ने दोनों पक्षों की दलीलों और उपलब्ध रिकॉर्ड का अवलोकन करने के बाद कहा कि मामला केवल पत्नी के अलग रहने तक सीमित नहीं है। पत्नी की ओर से लगाए गए मारपीट, क्रेटा कार और पांच लाख रुपए की मांग, गर्भपात तथा घरेलू हिंसा से संबंधित कार्रवाई को भी ध्यान में रखना होगा।
पीठ ने इन परिस्थितियों को देखते हुए माना कि पत्नी के अलग रहने के लिए पर्याप्त आधार मौजूद हैं। इसके साथ ही हाईकोर्ट ने पारिवारिक न्यायालय के फैसले को सही ठहराते हुए पति की अपील खारिज कर दी।