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दिल की तीनों नसें थीं ब्लॉक: बिहार की महिला को रायपुर में मिली नई जिंदगी, अंबेडकर अस्पताल में सर्जरी सफल
Tue, 01 Sep 2026 04:11 PM IST
अमन कोशले
अमर उजाला नेटवर्क, रायपुर
अमर उजाला नेटवर्क, रायपुर
Published by: अमन कोशले
Updated Tue, 01 Sep 2026 04:11 PM IST
सार
पंडित जवाहरलाल नेहरू स्मृति चिकित्सा महाविद्यालय से संबद्ध डॉ. भीमराव अंबेडकर स्मृति चिकित्सालय में बिहार की 48 वर्षीय महिला की जटिल हृदय सर्जरी सफलतापूर्वक की गई। मधुबनी जिले की रहने वाली महिला के हृदय की तीनों प्रमुख नसों में गंभीर ब्लॉकेज था।
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सांकेतिक तस्वीर
- फोटो : अमर उजाला
विस्तार
रायपुर स्थित पंडित जवाहरलाल नेहरू स्मृति चिकित्सा महाविद्यालय से संबद्ध डॉ. भीमराव अंबेडकर स्मृति चिकित्सालय में बिहार की 48 वर्षीय महिला की जटिल हृदय सर्जरी सफलतापूर्वक की गई। मधुबनी जिले की रहने वाली महिला के हृदय की तीनों प्रमुख नसों में गंभीर ब्लॉकेज था। चिकित्सकीय भाषा में इसे ट्रिपल वेसल डिजीज (TVD) कहा जाता है। इसके साथ ही उनके हृदय की पंपिंग क्षमता भी करीब 40 प्रतिशत रह गई थी।
हार्ट, चेस्ट एवं वैस्कुलर सर्जरी विभाग के विभागाध्यक्ष एवं प्रोफेसर डॉ. कृष्णकांत साहू और उनकी टीम ने मरीज की बीटिंग हार्ट कोरोनरी आर्टरी बाईपास सर्जरी (CABG) की। सर्जरी के दौरान बाईपास के लिए मैमरी आर्टरी का इस्तेमाल किया गया। मरीज की सर्जरी मिडलाइन स्टर्नोटोमी तकनीक से की गई, जिसे कोरोनरी बाईपास सर्जरी की स्थापित तकनीक माना जाता है।
मरीज के इलाज में सबसे बड़ी चुनौती उनका बेहद बढ़ा हुआ ब्लड शुगर था। अस्पताल पहुंचने के समय उनका ब्लड शुगर 500 mg/dL से अधिक था। ऐसी स्थिति में तुरंत सर्जरी करना जोखिम भरा हो सकता था। डॉक्टरों ने पहले शुगर को नियंत्रित किया और इसके बाद सफलतापूर्वक ऑपरेशन किया। सर्जरी के बाद मरीज की रिकवरी भी तेजी से हुई। ऑपरेशन के दिन ही उन्हें होश आ गया और शाम को हल्का नाश्ता कराया गया। दूसरे दिन से उन्होंने चलना-फिरना शुरू कर दिया। अब उनकी हालत बेहतर है और उन्हें अस्पताल से छुट्टी दी जा रही है।
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मरीज को शुरुआत में मधुबनी और बाद में दरभंगा के अस्पताल ले जाया गया था। एंजियोग्राफी में तीनों नसों में ब्लॉकेज सामने आने के बाद बाईपास की सलाह दी गई। परिजनों को रायपुर के अंबेडकर अस्पताल के हृदय रोग विभाग की जानकारी मिली, जिसके बाद वे यहां पहुंचे। आयुष्मान योजना के तहत बिहार के कार्ड से छत्तीसगढ़ में इलाज की सुविधा की पुष्टि होने के बाद मरीज को भर्ती कर उपचार शुरू किया गया। डॉक्टरों ने लोगों से अपील की है कि सीने में दर्द, सांस फूलना या असामान्य थकान जैसे लक्षणों को नजरअंदाज न करें और समय पर जांच कराएं।
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हार्ट, चेस्ट एवं वैस्कुलर सर्जरी विभाग के विभागाध्यक्ष एवं प्रोफेसर डॉ. कृष्णकांत साहू और उनकी टीम ने मरीज की बीटिंग हार्ट कोरोनरी आर्टरी बाईपास सर्जरी (CABG) की। सर्जरी के दौरान बाईपास के लिए मैमरी आर्टरी का इस्तेमाल किया गया। मरीज की सर्जरी मिडलाइन स्टर्नोटोमी तकनीक से की गई, जिसे कोरोनरी बाईपास सर्जरी की स्थापित तकनीक माना जाता है।
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मरीज के इलाज में सबसे बड़ी चुनौती उनका बेहद बढ़ा हुआ ब्लड शुगर था। अस्पताल पहुंचने के समय उनका ब्लड शुगर 500 mg/dL से अधिक था। ऐसी स्थिति में तुरंत सर्जरी करना जोखिम भरा हो सकता था। डॉक्टरों ने पहले शुगर को नियंत्रित किया और इसके बाद सफलतापूर्वक ऑपरेशन किया। सर्जरी के बाद मरीज की रिकवरी भी तेजी से हुई। ऑपरेशन के दिन ही उन्हें होश आ गया और शाम को हल्का नाश्ता कराया गया। दूसरे दिन से उन्होंने चलना-फिरना शुरू कर दिया। अब उनकी हालत बेहतर है और उन्हें अस्पताल से छुट्टी दी जा रही है।
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मरीज को शुरुआत में मधुबनी और बाद में दरभंगा के अस्पताल ले जाया गया था। एंजियोग्राफी में तीनों नसों में ब्लॉकेज सामने आने के बाद बाईपास की सलाह दी गई। परिजनों को रायपुर के अंबेडकर अस्पताल के हृदय रोग विभाग की जानकारी मिली, जिसके बाद वे यहां पहुंचे। आयुष्मान योजना के तहत बिहार के कार्ड से छत्तीसगढ़ में इलाज की सुविधा की पुष्टि होने के बाद मरीज को भर्ती कर उपचार शुरू किया गया। डॉक्टरों ने लोगों से अपील की है कि सीने में दर्द, सांस फूलना या असामान्य थकान जैसे लक्षणों को नजरअंदाज न करें और समय पर जांच कराएं।