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Sukma: नक्सलियों के शहीदी सप्ताह के बीच जवानों की कार्रवाई, मांद में घुसकर माओवादियों के स्मारक को गिराया
Wed, 31 Jul 2024 05:31 PM IST
Digvijay Singh
अमर उजाला नेटवर्क, सुकमा
अमर उजाला नेटवर्क, सुकमा
Published by: Digvijay Singh
Updated Wed, 31 Jul 2024 05:31 PM IST
सार
सीआरपीएफ की 150 वीं बटालियन और कोबरा 201 के जवान इलाके में सर्चिंग के लिए निकले इसके बाद जवानों के द्वारा नक्सलियों के द्वारा बनाए गए स्मारक को ध्वस्त कर दिया ।
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नक्सली स्मारक ध्वस्त
- फोटो : अमर उजाला
विस्तार
सुकमा जिले में नक्सलियों द्वारा मनाया जा रहे शहीदी सप्ताह के बीच सुरक्षा बलों ने नक्सलियों की मांद में जाकर नक्सलियों के स्मारक को ध्वस्त किया है । बता दें की 28 जुलाई से 3 अगस्त के बीच बस्तर भर में नक्सलियों के द्वारा शहीदी सप्ताह मनाया जा रहा है। इस दौरान सुकमा जिले में भी अलर्ट जारी है वहीं नक्सल गतिविधियों को रोकने के लिए सुरक्षाबलों के द्वारा लगातार अभियान भी चलाए जा रहे हैं इस बीच सुकमा जिले के टेकलगुडम तीम्मापुर के जंगलों में नक्सलियों के द्वारा नक्सली स्मारक बनाए जाने की सूचना जवानों को मिली।
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जिसके बाद सीआरपीएफ की 150 वीं बटालियन और कोबरा 201 के जवान इलाके में सर्चिंग के लिए निकले इसके बाद जवानों के द्वारा नक्सलियों के द्वारा बनाए गए स्मारक को ध्वस्त कर दिया ।
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मामले की पुष्टि करते हुए सुकमा एसपी किरण चौहान ने बताया कि जिले के नक्सल प्रभावित इलाकों में नक्सलियों के गतिविधियों पर लगातार नजर बनाई जा रही है 28 जुलाई से 3 अगस्त के बीच नक्सलियों के द्वारा शहीदी सप्ताह मनाया जाता है जिसको देखते हुए जवानों को अलर्ट किया गया है। वहीं सप्ताह भर के कार्यक्रम के दौरान इलाके में किसी भी तरह के आयोजन नक्सलियों के द्वारा ना किया जाए इसको लेकर भी नजर बनाई जा रही है अब तक चार नक्सली स्मारक को ध्वस्त किया गया है।
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क्यों बनाते हैं नक्सली स्मारक
बता दें कि नक्सली जल जंगल जमीन के नाम पर बस्तर में सरकार के खिलाफ हिंसक लड़ाई लड़ रहे हैं इस संघर्ष में मारे जाने वाले नक्सली साथी की याद को लोगों के बीच जिंदा रखना और माओवादी विचारधारा का प्रभाव और उसकी छाप छोड़ने के लिए नक्सलियों के द्वारा स्मारक बनाया जाता है । पुलिस का मानना है कि नक्सली स्मारकों के जरिए मानसिक लड़ाई लोगों के बीच बना कर रखते हैं और स्मारकों के माध्यम से अशिक्षित ग्रामीणों का ब्रेनवाश कर उन्हें अपनी लड़ाई का हिस्सा बनाते हैं । नक्सली संगठन के साथ-साथ नक्सली स्मारक भी एंटी नक्सल ऑपरेशन का हिस्सा है।