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शराबखोरी, हत्या या फिर बलात्कार, हर मामले में गवाही देता है ये 'चाय वाला'

Wed, 11 Oct 2017 12:06 PM IST
आलोक प्रकाश पुतुल
आलोक प्रकाश पुतुल Updated Wed, 11 Oct 2017 12:06 PM IST
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a tea seller from chhattisgarh, who is Witness in more than 200 cases
मनोहर वर्ल्यानी - फोटो : BBC

छत्तीसगढ़ की राजधानी रायपुर के तेलीबांधा इलाके में चाय की छोटी दुकान चलाने वाले मनोहर वर्ल्यानी को ठीक-ठीक याद नहीं है कि वे रायपुर की विभिन्न अदालतों में चल रहे कितने मामलों में गवाह हैं।

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वे बेफिक्री के साथ कहते हैं, "सौ-सवा सौ मामले होंगे, जिनमें मैं गवाह हूं।" लेकिन दस्तावेजों की मानें तो रायपुर की अदालतों में कम से कम 231 मामले ऐसे हैं, जिनमें मनोहर महत्वपूर्ण गवाह हैं। 
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इनमें शराबखोरी और सड़क दुर्घटना से लेकर दुष्कर्म और हत्या की कोशिश जैसे मामले भी शामिल हैं। अभी पिछले महीने ही तेलीबांधा थाने की पुलिस ने राजधानी रायपुर के अग्रसेन धाम इलाके में सुबह पांच बजे चार किलोग्राम गांजा जब्त किया और दो लोगों को गिरफ्तार किया। एफआईआर के अनुसार इस मामले में जब्ती की कार्रवाई मनोहर वर्ल्यानी के समक्ष हुई और वे ही इस मामले के गवाह बनाए गए हैं।
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हर मामले में गवाह कैसे बनते हैं मनोहर?
पिछले महीने ही रायपुर के वीआईपी चौक पर पुलिस ने पिस्तौल और गोलियों के साथ एक युवक को गिरफ्तार किया। इस मामले में पुलिस की ओर से मनोहर ही गवाह बनाए गए। रायपुर के तेलीबांधा थाने के ठीक पीछे मनोहर की चाय-समोसे की दुकान है। राजधानी के इस व्यस्ततम इलाके में वे पिछले दस सालों से यह दुकान चला रहे हैं। थाने में भी चाय-पानी इसी दुकान से जाता है।

पढ़ें: 112 साल बाद छत्तीसगढ़ में नजर आया सबसे छोटा हिरण

मनोहर कहते हैं, "व्यस्त सड़क है। कोई दुर्घटना होती है तो गवाह के तौर पर मैं सामने रहता हूं तो पुलिस मेरा नाम दर्ज कर लेती है। आसपास में कहीं झगड़ा-फसाद हुआ और मैं सामने रहा तो भला मैं उस घटना से इनकार कैसे कर सकता हूं।"

क्या कहता है कानून

a tea seller from chhattisgarh, who is Witness in more than 200 cases
मनोहर वर्ल्यानी - फोटो : BBC

जाहिर है, पुलिस में दर्ज मामले अदालत में पहुंचते हैं और बतौर गवाह मनोहर को भी अदालत में पेश होना पड़ता है। महीने के कई दिन इसी में गुजर जाते हैं। तेलीबांधा थाने के प्रभारी लक्ष्मण खूंटे कहते हैं, "मनोहर वर्ल्यानी कितने मामलों में गवाह हैं, यह बता पाना तो मुश्किल है। लेकिन कई मामलों में गवाह के रूप में हमें जान-पहचान वालों पर ही निर्भर होना पड़ता है। कानूनन भी ऐसी कोई पाबंदी नहीं है कि कोई व्यक्ति कितने मामलों में गवाह रह सकता है।"

लक्ष्मण खूंटे का दावा है कि मनोहर अकेले ऐसे व्यक्ति नहीं हैं, जिन्हें पुलिस ने अपने कई-कई मामलों में गवाह बना रखा है। बल्कि ऐसे लोगों की फेहरिश्त है। उनकी सफाई है कि अधिकांश मामलों में आम आदमी, पुलिस और अदालत के पचड़े में नहीं फंसना चाहता। ऐसे में मनोहर जैसों को गवाह बनाना पुलिस की मजबूरी है। लेकिन हाईकोर्ट के वकील सतीशचंद्र वर्मा का मानना है कि इस तरह से किसी व्यक्ति को गवाह बनाना कानून का मजाक है।

कानून व्यवस्था पर सवाल

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तेलीबांधा थाना - फोटो : BBC

सतीश वर्मा मानते हैं कि इस तरह से तयशुदा या पेशेवर गवाह के कारण कोई निर्दोष महीनों या सालों जेल में सड़ता रह सकता है या फिर कोई अपराधी भी आसानी से बच निकलता है। वर्मा का कहना है कि इस बात की जांच की जानी चाहिए कि जिन मामलों में मनोहर जैसे गवाह हैं, उनमें से सजा कितने मामलों में हो पाई है?

अगर गवाह की गड़बड़ी का लाभ अपराधी को मिलता है तो फिर भारतीय दंड संहिता की धारा 211 के तहत मामला पुलिस या गवाह पर दर्ज होना चाहिए। वर्मा कहते हैं, "पुलिस की यह कार्यप्रणाली पूरी कानून व्यवस्था को कटघरे में खड़ा करती है। सरकार को इस पूरे मामले की गंभीरता से जांच करनी चाहिए।"

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