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व्हाट्सएप पर बॉस बनकर मांगे पैसे: रायपुर की दो कंपनियों से करोड़ों की ठगी, महाराष्ट्र-यूपी से 5 आरोपी गिरफ्तार
Sun, 01 Nov 2026 08:19 AM IST
अमन कोशले
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, रायपुर
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, रायपुर
Published by: अमन कोशले
Updated Sun, 01 Nov 2026 08:19 AM IST
सार
साइबर ठगों ने कंपनी के वरिष्ठ अधिकारियों के नाम और फोटो से फर्जी WhatsApp प्रोफाइल बनाकर दो व्यावसायिक संस्थानों से 2.93 करोड़ रुपये की ठगी की। पुलिस ने महाराष्ट्र के ठाणे और उत्तर प्रदेश के प्रयागराज से पांच आरोपियों को गिरफ्तार किया है।
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पुलिस के गिरफ्त में आरोपी
- फोटो : अमर उजाला
विस्तार
साइबर अपराधियों ने छत्तीसगढ़ की राजधानी रायपुर में कंपनियों के उच्च अधिकारियों के नाम पर फर्जी व्हाट्सएप प्रोफाइल बनाकर दो व्यावसायिक संस्थानों से 2.93 करोड़ रुपये की बड़ी साइबर ठगी की वारदात को अंजाम दिया है। जालसाजों ने कंपनी के अधिकृत अधिकारियों के फोटो और नाम का सहारा लेकर उनके कर्मचारियों को झांसे में लिया और बैंक खातों से ऑनलाइन रकम स्थानांतरित करवा ली। इस मामले में पुलिस और साइबर सेल की संयुक्त टीम ने महाराष्ट्र के ठाणे जिले से तीन आरोपियों और उत्तर प्रदेश के प्रयागराज से दो आरोपियों को गिरफ्तार किया है। इसके अलावा पुलिस ने बैंक अधिकारियों से बेहतर तालमेल बिठाकर ठगी गई राशि में से 1.38 करोड़ रुपये बैंक खातों में ही होल्ड करवा दिए हैं।
कंपनियों के खातों से धोखाधड़ी का तरीका
पहला मामला टिकरापारा थाना क्षेत्र का सामने आया है, जहां कमल विहार निवासी और राठी बंधुस कमर्शियल प्रा. लि. के निदेशक विजय राठी के नाम का दुरुपयोग किया गया। साइबर ठगों ने 19 से 21 अक्तूबर के बीच निदेशक विजय राठी की प्रोफाइल फोटो और नाम का इस्तेमाल करके कंपनी के अकाउंटेंट लेखराम चक्रधारी को व्हाट्सएप पर मैसेज भेजे। अकाउंटेंट ने संदेशों को असली समझकर कंपनी के यूनियन बैंक ऑफ इंडिया स्थित खाते से 93 लाख रुपये दूसरे खाते में स्थानांतरित कर दिए। धोखाधड़ी की जानकारी मिलने पर पीड़ित ने टिकरापारा थाने में प्राथमिकी दर्ज कराई।
दूसरा मामला, तेलीबांधा थाना क्षेत्र का है, जहां ट्रांसफॉर्मर एंड ट्रांसमिशन लिमिटेड के मुख्य वित्त अधिकारी ओमकार वरु ने शिकायत दर्ज कराई। इस मामले में आरोपियों ने कंपनी के अधिकृत व्यक्ति अंशुल शर्मा की पहचान का इस्तेमाल करके अकाउंटेंट बिरेश तिवारी को व्हाट्सएप संदेश भेजा। जालसाजों ने टी-के कंस्ट्रक्शन नाम के खाते में 2 करोड़ रुपये भेजने का निर्देश दिया। अकाउंटेंट ने बैंक ऑफ वडोदरा की पंडरी शाखा स्थित कंपनी के खाते से यह रकम तुरंत ऑनलाइन भेज दी।
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अंतरराज्यीय छापेमारी में पांच आरोपी गिरफ्तार
दोनों वारदात में ठगी का एक जैसा तरीका देखने के बाद एंटी क्राइम एंड साइबर यूनिट, टिकरापारा पुलिस और तेलीबांधा पुलिस ने संयुक्त रूप से मामले की छानबीन शुरू की। पुलिस टीम ने संदिग्ध मोबाइल नंबरों, व्हाट्सएप प्रोफाइल, बैंक खातों के विवरण और सीसीटीवी फुटेज का गहराई से विश्लेषण किया। तकनीकी साक्ष्यों के आधार पर टिकरापारा थाना पुलिस ने महाराष्ट्र के ठाणे जिले में उल्हासनगर से तीन आरोपियों को गिरफ्तार किया। पकड़े गए आरोपियों की पहचान 20 वर्षीय आकाश कन्हैया लाल चुथ, 23 वर्षीय साहिल रमेश नथानी और 23 वर्षीय राज चन्दर लाल जुमानी के रूप में हुई।
तेलीबांधा के मामले में पुलिस टीम ने उत्तर प्रदेश के प्रयागराज से 47 वर्षीय विनय श्रीवास्तव और 49 वर्षीय विनोद कुमार को गिरफ्तार किया। हालांकि प्रयागराज की अदालत ने दोनों आरोपियों को जमानत पर रिहा कर दिया। पुलिस अब दोनों को आगे की कानूनी जांच के लिए रायपुर लाने की प्रक्रिया पूरी कर रही है। इसके साथ ही पुलिस ने इस मामले से जुड़े एक अन्य आरोपी को रायपुर में उपस्थित होने का नोटिस जारी किया है।
1.38 करोड़ रुपये होल्ड और सामग्री जब्त
पुलिस टीम ने बैंक अधिकारियों के साथ समन्वय स्थापित करके दोनों मामलों की ठगी गई राशि में से कुल 1.38 करोड़ रुपये तुरंत होल्ड करवा दिए हैं। इनमें टिकरापारा मामले के 24 लाख रुपये और तेलीबांधा मामले के 1.14 करोड़ रुपये शामिल हैं। टिकरापारा मामले में गिरफ्तार आरोपियों के पास से 25 हजार रुपये नकद, 6 मोबाइल फोन, 3 एटीएम कार्ड और 3 पासबुक जब्त की गई हैं, जबकि तेलीबांधा मामले में पुलिस ने 2 मोबाइल फोन जब्त किए हैं।
मोबाइल फोनों की तकनीकी जांच
पुलिस की शुरुआती जांच में यह खुलासा हुआ है कि टिकरापारा मामले में गिरफ्तार तीनों आरोपियों की तेलीबांधा में हुई 2 करोड़ रुपये की ठगी में भी सीधी संलिप्तता है। पुलिस अब जब्त किए गए सभी मोबाइल फोनों की तकनीकी जांच करवा रही है। पुलिस अधिकारी गिरफ्तार आरोपियों से पूछताछ कर रहे हैं ताकि साइबर अपराध के इस अंतरराज्यीय गिरोह, अन्य सहयोगियों और ठगी की रकम के लेन-देन वाले बैंक खातों की पूरी जानकारी जुटाई जा सके।
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कंपनियों के खातों से धोखाधड़ी का तरीका
पहला मामला टिकरापारा थाना क्षेत्र का सामने आया है, जहां कमल विहार निवासी और राठी बंधुस कमर्शियल प्रा. लि. के निदेशक विजय राठी के नाम का दुरुपयोग किया गया। साइबर ठगों ने 19 से 21 अक्तूबर के बीच निदेशक विजय राठी की प्रोफाइल फोटो और नाम का इस्तेमाल करके कंपनी के अकाउंटेंट लेखराम चक्रधारी को व्हाट्सएप पर मैसेज भेजे। अकाउंटेंट ने संदेशों को असली समझकर कंपनी के यूनियन बैंक ऑफ इंडिया स्थित खाते से 93 लाख रुपये दूसरे खाते में स्थानांतरित कर दिए। धोखाधड़ी की जानकारी मिलने पर पीड़ित ने टिकरापारा थाने में प्राथमिकी दर्ज कराई।
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दूसरा मामला, तेलीबांधा थाना क्षेत्र का है, जहां ट्रांसफॉर्मर एंड ट्रांसमिशन लिमिटेड के मुख्य वित्त अधिकारी ओमकार वरु ने शिकायत दर्ज कराई। इस मामले में आरोपियों ने कंपनी के अधिकृत व्यक्ति अंशुल शर्मा की पहचान का इस्तेमाल करके अकाउंटेंट बिरेश तिवारी को व्हाट्सएप संदेश भेजा। जालसाजों ने टी-के कंस्ट्रक्शन नाम के खाते में 2 करोड़ रुपये भेजने का निर्देश दिया। अकाउंटेंट ने बैंक ऑफ वडोदरा की पंडरी शाखा स्थित कंपनी के खाते से यह रकम तुरंत ऑनलाइन भेज दी।
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अंतरराज्यीय छापेमारी में पांच आरोपी गिरफ्तार
दोनों वारदात में ठगी का एक जैसा तरीका देखने के बाद एंटी क्राइम एंड साइबर यूनिट, टिकरापारा पुलिस और तेलीबांधा पुलिस ने संयुक्त रूप से मामले की छानबीन शुरू की। पुलिस टीम ने संदिग्ध मोबाइल नंबरों, व्हाट्सएप प्रोफाइल, बैंक खातों के विवरण और सीसीटीवी फुटेज का गहराई से विश्लेषण किया। तकनीकी साक्ष्यों के आधार पर टिकरापारा थाना पुलिस ने महाराष्ट्र के ठाणे जिले में उल्हासनगर से तीन आरोपियों को गिरफ्तार किया। पकड़े गए आरोपियों की पहचान 20 वर्षीय आकाश कन्हैया लाल चुथ, 23 वर्षीय साहिल रमेश नथानी और 23 वर्षीय राज चन्दर लाल जुमानी के रूप में हुई।
तेलीबांधा के मामले में पुलिस टीम ने उत्तर प्रदेश के प्रयागराज से 47 वर्षीय विनय श्रीवास्तव और 49 वर्षीय विनोद कुमार को गिरफ्तार किया। हालांकि प्रयागराज की अदालत ने दोनों आरोपियों को जमानत पर रिहा कर दिया। पुलिस अब दोनों को आगे की कानूनी जांच के लिए रायपुर लाने की प्रक्रिया पूरी कर रही है। इसके साथ ही पुलिस ने इस मामले से जुड़े एक अन्य आरोपी को रायपुर में उपस्थित होने का नोटिस जारी किया है।
1.38 करोड़ रुपये होल्ड और सामग्री जब्त
पुलिस टीम ने बैंक अधिकारियों के साथ समन्वय स्थापित करके दोनों मामलों की ठगी गई राशि में से कुल 1.38 करोड़ रुपये तुरंत होल्ड करवा दिए हैं। इनमें टिकरापारा मामले के 24 लाख रुपये और तेलीबांधा मामले के 1.14 करोड़ रुपये शामिल हैं। टिकरापारा मामले में गिरफ्तार आरोपियों के पास से 25 हजार रुपये नकद, 6 मोबाइल फोन, 3 एटीएम कार्ड और 3 पासबुक जब्त की गई हैं, जबकि तेलीबांधा मामले में पुलिस ने 2 मोबाइल फोन जब्त किए हैं।
मोबाइल फोनों की तकनीकी जांच
पुलिस की शुरुआती जांच में यह खुलासा हुआ है कि टिकरापारा मामले में गिरफ्तार तीनों आरोपियों की तेलीबांधा में हुई 2 करोड़ रुपये की ठगी में भी सीधी संलिप्तता है। पुलिस अब जब्त किए गए सभी मोबाइल फोनों की तकनीकी जांच करवा रही है। पुलिस अधिकारी गिरफ्तार आरोपियों से पूछताछ कर रहे हैं ताकि साइबर अपराध के इस अंतरराज्यीय गिरोह, अन्य सहयोगियों और ठगी की रकम के लेन-देन वाले बैंक खातों की पूरी जानकारी जुटाई जा सके।