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15 राज्यों के 32 IFS ऑफिसर्स ने की सीएम भूपेश बघेल से मुलाकात, 'लग रहे ऐसे कयास'!, जानें क्या है सच्चाई

Fri, 03 Feb 2023 11:03 PM IST
ललित कुमार सिंह अमर उजाला ब्यूरो, रायपुर
अमर उजाला ब्यूरो, रायपुर Published by: ललित कुमार सिंह Updated Fri, 03 Feb 2023 11:03 PM IST
सार

सीएम से मुलाकात के दौरान अधिकारियों ने कहा कि छत्तीसगढ़ में जल और वन संवर्धन की दिशा में सरकार की ओर से नरव विकास योजना और लघु वनोपज के संग्रहण का कार्य बखूबी किया जा रहा है। छत्तीसगढ़ की ये योजना देश के अन्य राज्यों के लिए अनुकरणीय है।

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32 IFS officers met to CM Bhupesh Baghel in raipur CG
IFS ऑफिसर्स से चर्चा करते सीएम भूपेश बघेल - फोटो : संवाद न्यूज एजेंसी

विस्तार

भारतीय वन सेवा के 2014-15 बैच के 32 ऑफिसर्स ने शुक्रवार की शाम मुख्यमंत्री निवास कार्यालय में छत्तीसगढ़ के सीएम भूपेश बघेल से मुलाकात की। 15 राज्यों से भारतीय वन सेवा के 32 अधिकारियों ने छत्तीसगढ़ मॉडल का अध्ययन करने भ्रमण पर रायपुर पहुंचे। सीएम से मुलाकात के दौरान अधिकारियों ने कहा कि छत्तीसगढ़ में जल और वन संवर्धन की दिशा में सरकार की ओर से नरव विकास योजना और लघु वनोपज के संग्रहण का कार्य बखूबी किया जा रहा है। छत्तीसगढ़ की ये योजना देश के अन्य राज्यों के लिए अनुकरणीय है । 

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अधिकारियों ने सीएम बघेल से दो दिवसीय भ्रमण के बाद अपने अनुभव साझा किए। इस मौके पर सीएम ने कहा कि छत्तीसगढ़ वनों के मामले में समृद्ध राज्य है । यहां वनों के साथ-साथ वनों पर आश्रित आदिवासियों-वनवासियों के विकास के लिये नवाचार का प्रयोग करते हुये कई योजनाओं का बेहतर ढंग से क्रियान्वयन किया जा रहा है । इसी तारतम्य में राज्य सरकार की महत्वाकांक्षी नरवा विकास योजना की सराहना देश के अन्य राज्यों में भी होने लगी है । यह योजना वनांचल में भू-जल संरक्षण के साथ-साथ लोगों की आजीविका और आय संवर्धन में महत्वपूर्ण साबित हो रही है। 
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'फलदार पौधों का रोपण भी जरूरी'
मुख्यमंत्री ने कहा कि जंगलों के संवर्धन और संरक्षण के लिये जरूरी है कि हम इमारती लकड़ी ही नहीं बल्कि वर्तमान दौर में फलदार वृक्षों के रोपण को भी अधिक से अधिक बढ़ावा दें । इससे वनवासियों का आजीविका संवर्धन तो होगा ही साथ ही साथ वन्य प्राणियों के भोजन और रहवास की सुविधा भी उपलब्ध होगी । राज्य में वनों के विकास के क्रम में संचालित नरवा विकास योजना का विशेष रूप से जिक्र किया । उन्होंने बताया कि छत्तीसगढ़ में नवाचार का प्रयोग करते हुये भू-जल संरक्षण के लिये नरवा विकास योजना को लागू कर इसका बेहतर ढंग से क्रियान्वयन जारी है । इसके तहत 8 हजार नरवा को पुनर्रजीवित करने के लिये वृहद स्तर पर कार्य किये जा रहे हैं । इनमें से अब तक वनांचल के 6 हजार 395 नरवा को पुनर्जीवित तथा जीर्णोद्धार किया जा चुका है । इनके क्रियान्वयन से राज्य में लगभग 23 लाख हेक्टेयर रकबा को भू-उपचार का लाभ मिलेगा ।
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'वन्यप्राणियों के लिए पेयजल की सुविधा'
मुख्यमंत्रीने बताया कि राज्य में नरवा विकास योजनांतर्गत वन क्षेत्रों में कराये जा रहे भू-जल संरक्षण कार्य से अनेक लाभ प्राप्त हो रहे हैं । इनमें वनों में मिट्टी के कटाव में कमी आयी है । वन क्षेत्रों में भू-जल स्तर में बढ़ोतरी से वनों के पुनरोत्पादन क्षमता में वृद्धि दर्ज हो रही है साथ ही साथ वन्य प्राणियों के लिये वर्ष भर पर्याप्त मात्रा में पेयजल की सुविधा हुई है । उन्होंने बताया कि इसके अलावा वन क्षेत्रों में रोजगार के भी बेहतर प्रबंध सुनिश्चित हुये हैं । नालों के आस-पास कृषि भूमि की सिंचाई क्षमता में वृद्धि हो रही है । भूजल संरक्षण के कार्यों के माध्यम से वन क्षेत्रों एवं वनों के आस-पास के ग्रामीणों को रोजगार उपलब्ध कराया गया है ।

 नरवा विकास आदि योजनाओं का जिक्र
इस अवसर पर वन एवं जलवायु परिवर्तन मंत्री मोहम्मद अकबर ने राज्य में वनों के संरक्षण और संवर्धन के लिये संचालित गतिविधियों के बारे में विस्तार से अवगत कराया । उन्होंने इस दौरान विशेषकर वर्तमान सरकार की ओर से वनवासियों के हित में संचालित लघु वनोपजों के संग्रहण कार्य और नरवा विकास आदि योजनाओं के बारे में जिक्र किया । उन्होंने बताया कि राज्य में वनवासियों के हित में लिये गये फैसले के परिणामस्वरूप छत्तीसगढ़ लघुवनोपजों के संग्रहण में लगातार अव्वल बना हुआ है । यहां देश का 74 प्रतिशत लघु वनोपजों का संग्रहण हो रहा है। कार्यक्रम को मुख्यमंत्री के सलाहकार प्रदीप शर्मा, अध्यक्ष जैव विविधता बोर्ड राकेश चतुर्वेदी, मुख्य कार्यपालन अधिकारी कैंपा व्ही श्रीनिवास राव ने भी संबोधित किया । 




भारतीय वन सेवा के इन अधिकारियों ने साझा किए अनुभव ...

  •  गुजरात के अग्निश्वर ब्यास ने अपने अनुभव साझा करते हुए बताया कि वह दो दिवसीय प्रवास पर छत्तीसगढ़ आए हैं। उन्होंने कहा - हमारी टीम ने छत्तीसगढ़ के धमतरी जिले में स्थित नरवा विकास योजना के तहत पंपार नाला का भ्रमण किया तथा नरवा पुनर्जीवन का कार्य देखा। उन्होंने राज्य में संचालित योजना की सराहना करते हुए कहा कि इस योजना का क्रियान्वयन जीआईएस पद्धति से डी.पी.आर. तैयार कर क्रियान्वित किया गया है। 
  • ओडिशा की पूर्णिमा पी. ने बताया कि पंपार नाला में स्थित विभिन्न संरचनाओं, एनआरएम इंजीनियर द्वारा जीआईएस पद्धति का उपयोग कर विभिन्न संरचनाओं का स्थल चयन अत्यंत सटीक था एवं गुणवत्ता उत्तम है। उन्होंने कहा कि जिसके कारण परिणाम दो वर्ष में ही दिखने लगा है। वन क्षेत्र में पुनरोत्पादन में बढ़ोत्तरी देखी जा रही है। हिमाचल प्रदेश की श्रीमती सुविना ठाकुर ने बताया कि छत्तीसगढ़ में लघु वनोपज संग्रहण, प्रसंस्करण के क्षेत्र में कार्य देखा गया। इस दौरान धमतरी स्थित दुगली प्रसंस्करण केन्द्र का भ्रमण किया एवं देखा कि कैसे स्व-सहायता समूह के महिलाओं द्वारा कार्य किया जा रहा है और उन्हें लागातार रोजगार मिल रहा है जो कि महिला सशक्तिकरण का एक बहुत अच्छा उदाहरण है।
  • मणिपुर के शन्नगम एस. ने प्रस्तुतीकरण के दौरान बताया कि कैसे छत्तीसगढ़ में 13 लाख हेक्टेयर वन क्षेत्र को वन संसाधन अधिकार प्रदत्त कर ग्राम पंचायतों को प्रबंधन हेतु सौंपा गया है। पूरे देश में छत्तीसगढ़ में वन संसाधन की दिशा में सर्व श्रेष्ठ पहल हुई है। 
  • झारखंड के सत्यम कुमार ने बताया कि हमारी टीम ने छत्तीसगढ़ की राजधानी के नवा रायपुर में स्थित जंगल सफारी का भ्रमण किया। यह हिन्दुस्तान का सबसे बड़ा मानव निर्मित जंगल सफारी है, जिसमें दुर्लभ प्रजाति के अनेक जंगली जानवरों को रखा गया है, जंगल सफारी का प्रबंधन बहुत अच्छा है।
  • तेलंगाना के प्रदीप कुमार सेट्ठी ने बताया कि हमने छत्तीसगढ़ का नाम नक्सल प्रभावित क्षेत्र के नाम से सुना था, लेकि यहां आने के बाद प्रस्तुतीकरण में पाया गया कि यहां अनेक पर्यटन स्थल मौजूद हैं, जो कि मन मोह लेने वाली दिखाई दी जैसे- चित्रकोट का वाटर फॉल, तीरथगढ़ का जल प्रपात आदि। अतः भविष्य में जब भी मुझे कहीं भ्रमण करने का मौका मिलेगा तो मैं छत्तीसगढ़ में दोबारा जरूर आना चाहूंगा।
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