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रायपुर: मजदूरों के नाम 10 फर्जी फर्में बनाकर 24 करोड़ का किया फर्जीवाड़ा

Sun, 20 Sep 2026 02:51 PM IST
अमन कोशले अमर उजाला नेटवर्क, रायपुर
अमर उजाला नेटवर्क, रायपुर Published by: अमन कोशले Updated Sun, 20 Sep 2026 02:51 PM IST
सार

मजदूरों, सफाईकर्मियों और छोटे कामगारों के नाम पर 10 फर्जी फर्में बनाकर 150 करोड़ रुपये का कथित बोगस कारोबार दिखाने का मामला सामने आया है। जीएसटी शिकायत के बाद पुलिस जांच में 24 करोड़ रुपये से अधिक की आईटीसी के कथित फर्जी दावे की पड़ताल शुरू हुई है।

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10 fake firms created in the name of labourers and committed fraud of Rs 24 crore
सांकेतिक तस्वीर - फोटो : अमर उजाला

विस्तार

रायपुर जिले के व्यावसायिक क्षेत्र लभांडी में स्थित एम. अगस्त्य इंटरप्राइजेस के संचालक अमन कुमार अग्रवाल के खिलाफ पुलिस ने फर्जीवाड़ा और अमानत में खयानत का गंभीर मामला दर्ज किया है। आरोपी कारोबारी ने दिहाड़ी मजदूरों, सफाईकर्मियों, इलेक्ट्रिशियनों और फेरीवालों के नाम पर 10 फर्जी फर्में बनाकर 150 करोड़ रुपये का बोगस कारोबार दर्शाया। इस पूरे फर्जीवाड़े के जरिये कारोबारी ने 24 करोड़ रुपये से अधिक के इनपुट टैक्स क्रेडिट (आईटीसी) का अवैध दावा ठोंका। माल एवं सेवा कर (जीएसटी) अधिकारियों की शिकायत के बाद तेलीबांधा थाना पुलिस ने यह बड़ी कार्रवाई शुरू की है।
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जांच अधिकारियों ने जब पंजीकृत ठिकानों का भौतिक सत्यापन किया तो धरातल पर कोई भी फर्म संचालित नहीं मिली। आरोपी अमन अग्रवाल ने 30 से अधिक कारोबारियों को बिना बिल यानी कच्चे में माल बेचा और फिर अस्तित्वहीन फर्मों के नाम से फर्जी बिल जारी कर दिए। इन बिलों की आड़ में आरोपी ने सरकार से करोड़ों रुपये का फर्जी आईटीसी हासिल करने की कोशिश की। शिकायत मिलने के बाद पुलिस अब उन सभी संबंधित कारोबारियों की जानकारी जुटा रही है, जिन्होंने इस नेटवर्क के माध्यम से अनुचित लाभ उठाया या माल खरीदा।
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मजदूर और विक्रेताओं के नाम का इस्तेमाल
आरोपी ने जिन लोगों के नाम पर बोगस फर्में पंजीकृत कराई थीं, उनमें से अधिकतर बेहद मामूली आय वर्ग से आते हैं। गरियाबंद निवासी मजहर खान पूर्व में फेरी लगाने का काम करते थे और वर्तमान में इलेक्ट्रिशियन हैं, जिनके नाम पर मेसर्स यूनिक इंटरप्राइजेस बनाई गई। रायपुर के बैजनाथपारा निवासी अफजल अंसारी एक पार्किंग में मासिक वेतन पर काम करते हैं, जिन्हें मेसर्स अंसारी ट्रेडर्स का स्वामी दर्शाया गया। इसी तरह महादेवघाट रोड रायपुरा निवासी विकास यदु चाय का ठेला लगाते हैं और उनके नाम पर मेसर्स अगस्त इंटरप्राइजेस का पंजीयन कराया गया।
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कागजी किराएनामे और फर्जी दस्तावेज का सच
जांच में कई चौंकाने वाले तथ्य सामने आए हैं। हुसैनी इंटरप्राइजेस के नाम से बनी फर्म के किराएनामे में जिस मकान मालिक फूल सिंह का नाम दर्ज था, उनका निधन वर्ष 2010 में ही हो चुका था। इसके बावजूद 21 मार्च 2025 की तिथि में किरायानामा निष्पादित दर्शाया गया। इसके प्रोपराइटर मोहम्मद इस्लाम भिलाई में चूड़ी की दुकान चलाते हैं। वहीं, दुर्ग के पाटन निवासी प्रताप सिंह वर्मा दिहाड़ी मजदूरी करते हैं, जिनके नाम पर मेसर्स विनायक वेंचर्स गठित हुई। बिलासपुर के कोनी निवासी सफाईकर्मी महेश फकीरा सोनी को मेसर्स महावीर इंटरप्राइजेस और सेजबहार निवासी कुलेश्वर नौरंगे को मेसर्स जय भोले इंटरप्राइजेस का मालिक दिखाया गया।
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