फ्री ई-पेपर
पर्सनलाइज़्ड फ़ीड
पर्सनलाइज़्ड नोटिफ़िकेशन
चलते-फिरते ख़बरें
लॉयल्टी रिवॉर्ड्स
डाउनलोड करें

सब्सक्राइब करें
Hindi News ›   Chandigarh ›   World Cup 2019, Artist Balraj Creats World Cup Trophy, Bat and Ball Sculpture on Chalk

World Cup 2019: क्रिकेट के लिए दीवानगी ऐसी कि चॉक से बना डाली वर्ल्ड कप की ट्रॉफी, बैट-बॉल

Sun, 02 Jun 2019 12:29 PM IST
खुशबू गोयल संजीव पंगोत्रा, अमर उजाला, चंडीगढ़
संजीव पंगोत्रा, अमर उजाला, चंडीगढ़ Published by: खुशबू गोयल Updated Sun, 02 Jun 2019 12:29 PM IST
विज्ञापन
World Cup 2019, Artist Balraj Creats World Cup Trophy, Bat and Ball Sculpture on Chalk
क्रिकेट फैन बलराज - फोटो : फाइल फोटो

क्रिकेट के प्रति दीवानगी का आलम देखिए, एक शख्स ने चॉक पर वर्ल्ड कप 2019 की ट्रॉफी, बैट और बॉल बना दी। इंग्लैंड में क्रिकेट का वर्ल्ड कप चल रहा है। भारतीय क्रिकेट प्रशंसक भारत के पहले मुकाबले को देखने के लिए उत्सुकता से इंतजार कर रहे हैं। चंडीगढ़ के रहने वाले बलराज सिंह ने चॉक पर यह आकृति बनाई।

विज्ञापन


सेक्टर 23 के रहने वाले बलराज सिंह आईएस देव समाज स्कूल सेक्टर 21 में फिजिकल एजुकेशन के लेक्चरर हैं। वे चार सालों से ब्लैक बोर्ड पर इस्तेमाल होने वाले चॉक पर ही स्कल्पचर तैयार करते हैं। शहर में ऐसा आर्ट करने वाले वे अकेले आर्टिस्ट हैं। वह ह्यूमन फिगर्स को ही गढ़ते हैं। इनमें नरेंद्र मोदी, क्रिकेटर विराट कोहली, अभिनेता अमिताभ बच्चन, रजनीकांत के साथ कई अन्य बड़े लोग भी शामिल हैं।
विज्ञापन


बलराज सिंह ने एक ही चॉक का इस्तेमाल किया और अपनी कला से 4.5 सेंटीमीटर की वर्ल्ड कप की ट्रॉफी को बना डाला। इसके साथ ही उन्होंने तीन इंच का बल्ला और 1.5 सेंटीमीटर की गेंद भी चॉक से बना दी है। वर्ल्ड कप की ट्रॉफी को बनाने के लिए बलराज सिंह को दो दिन का समय लगा। इससे पहले भी वह फुटबॉल के खेल से जुड़ी फीफा वर्ल्ड कप की ट्रॉफी को चॉक पर बना चुके हैं।

विज्ञापन
विज्ञापन

पेन से देते हैं शेप

बलराज सिंह ने बताया कि वह चॉक पर आकृति बनाने के लिए पेन का इस्तेमाल करते हैं। वह पेन में रिफिल की जगह सुई लगाते हैं, जिसके जरिए वह चॉक पर अपनी पसंद की आकृति को बनाते हैं। आईसीसी वर्ल्ड कप 2019 की ट्रॉफी को भी उन्होंने पेन में पेन में रिफिल लगी सुई के इस्तेमाल से बनाया है।

काफी बारीकी का है यह काम
बलराज ने बताया यह काफी बारीकी का काम है। जब वह चॉक पर कुछ बना रहे होते हैं तो कई बार वह बीच में टूट जाता है। इससे उन्हें काफी दुख होता है। कई बार तो पैरेंट्स भी गुस्सा करते थे कि इतना बारीक काम करके क्यों अपनी आंखें खराब कर रहे हो। हालांकि अब मेरी लगन और बेहतरीन वर्क को देखने के बाद पैरेंट्स भी प्रशंसा करते हैं।

विज्ञापन
विज्ञापन
विज्ञापन
विज्ञापन
विज्ञापन

एड फ्री अनुभव के लिए अमर उजाला प्रीमियम सब्सक्राइब करें

Next Article

AU ऐप में पढ़ें

Followed